साहित्य आजतक: 'इश्क पानी की अजमत तो है पर पानी नहीं, मैंने समझाया बहुत पर वो मानी नहीं..'

साहित्य आजतक 2019 के तीसरे और आखिरी दिन मुशायरे की महफिल सजी. इस मुशायरे में कई जाने-माने शायर शामिल हुए.

साहित्य आजतक 2019 के मुशायरे में अभिषेक शुक्ला
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 6:11 PM IST

  • 'साहित्य आजतक 2019' के तीसरे दिन सजी मुशायरे की महफिल
  • साहित्य आजतक 2019 में मुशायरे में शामिल हुए अभिषेक शुक्ला
'साहित्य आजतक 2019' के तीसरे और आखिरी दिन मुशायरे की महफिल सजी. इस मुशायरे में कई जाने-माने शायर शामिल हुए. मुशायरे में वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी, नवाज देवबंदी, अभिषेक शुक्ला, जीशान नियाजी, कुंवर रंजीत चौहान ने शिरकत की और अपने शेरों से खूब वाहवाही लूटी. साहित्य आजतक 2019 में हुए मुशायरे में शायर अभिषेक शुक्ला भी कहीं पीछे नहीं रहे और उन्होंने भी अपने शेयरों पर काफी वाहवाही लूटी. उनके शेर कुछ इस तरह से रहे.

इश्क पानी की अजमत तो है, पर पानी नहीं,मैंने समझाया बहुत, पर वो मानी नहीं.मैंने जब खुद की तरफ गौर से देखा तो खुला,मुझको एक मेरे सिवा कोई परेशानी नहीं.

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ये और बात तेरे दिल में घर नहीं करूंगा,पर इस मुकाम से आगे सफर नहीं करूंगा,दुआएं क्या दूं उसे जिंदगी की, इतना है,मैं जहर हूं मगर उस पर असर नहीं करूंगा,किसी से झूठी मोहब्बत, किसी से सच्चा बैरमैं कर तो सकता हूं ये सब, मगर नहीं करूंगापाए उम्मीद पर रखे हुए सर में हम लोग,हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग.जितनी जल्दी हो बस हमसे किनारा कर ले,तू सफीना है मेरी जान, भंवर हैं हम लोग.हम पर इतना भी यकीं ठीक नहीं जाने-बहार,उड़ती-उड़ती सी फखत एक खबर हैं हम लोग.देखने का ये हुनर आया है आते-आते,जाते-जाते जो बची है वो नजर हैं हम लोग.

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