साहित्य आजतक: पहले हंसते थे लोग, आज सरकारी स्कूलों में एडमिशन की सिफारिश: मनीष सिसोदिया

साहित्य आजतक 2019 के सीधी बात के शिक्षा क्रांति सेशन में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री ने अपनी बात रखी. उन्होंने यहां दिल्ली के स्कूलों में बदलाव से लेकर नये एजुकेशन बोर्ड बनाने के प्रस्ताव पर बात की.

शिक्षा क्रांति सेशन में अपनी बात रखते शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया, Photo Credit: Bandeep Singh
मानसी मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 01 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:56 AM IST

  • मनीष सिसोसिदा बोले- दिल्ली में टीचर बदले, स्कूल बदले
  • कहा- मेरे पास सरकारी स्कूलों में एडमिशन की सिफारिशें आ रहीं

साहित्य आजतक 2019 के शिक्षाक्रांति सेशन में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री ने अपनी बात रखी. उन्होंने यहां दिल्ली के स्कूलों में बदलाव से लेकर नये एजुकेशन बोर्ड बनाने के प्रस्ताव पर बात की. दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लगातार हो रहे सकारात्मक बदलावों को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है. दिल्ली के शिक्षामंत्री इसे सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि मानते हैं. उन्होंने यहां कहा कि पहले जब मैं कहता था कि सरकारी स्कूल सुधार दूंगा तो लोग हंसते थे. मेरे पास प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के लिए सिफारिशें आती थीं, तब सरकारी स्कूलों को कोई पूछता नहीं था. पांच साल बाद आज जब सरकारी स्कूलों में एडमिशन की सिफारिशें आती हैं तो मुझे खुशी होती है. वो साहित्य आजतक में शम्स ताहिर खान के साथ बातचीत कर रहे थे. यहां उन्होंने अपनी किताब 'शिक्षा: माय एक्सपेरीमेंट एज एन एजुकेशन मिनिस्टर' पर भी चर्चा की. इस पुस्तक में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में किस तरह नूतन बदलाव की जरूरत है, इस पर चर्चा की है. उन्होंने कहा कि आज दिल्ली सरकार के स्कूलों की स्थिति बदल रही है. स्कूलों को आठ हजार कमरे बनाकर दिए हैं, 12 हजार अभी बन रहे हैं. दिल्ली का नया एजुकेशन बोर्ड वक्त की जरूरत शिक्षामंत्री ने यहां कि दिल्ली सरकार CBSE या यूपी, एमपी, बिहार की तर्ज पर अपना एक एजुकेशन बोर्ड ला रही है. इस बोर्ड की जरूरत पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज हम NEP (न्यू एजुकेशन पॉलिसी) की बात कर रहे हैं.  इसमें शिक्षा में नई व्यवस्था, नये बदलावों पर अच्छी अच्छी बातें की गईं, लेकिन ये सब लागू तो बोर्ड करता है. लेकिन जब तक आप बोर्ड का कैरेक्टर चेंज नहीं करोगे, जमीनी बदलाव नहीं होगा. इसके लिए हमें देश भर के बोर्ड का कैरेक्टर बदलना होगा. हर प्रदेश का अपना अलग बोर्ड है, इसी तरह दिल्ली का भी जल्द ही अपना अलग बोर्ड होगा, इस पर तेजी से काम चल रहा है. दिल्ली के स्कूलों में बना शिक्षा का वातावरण सिसोदिया ने कहा कि कभी जब हम बात करते थे कि टीचर्स की ट्रेनिंग करानी है तो लोग कहते थे कि ये कैसे संभव होगा. इसके बाद टीचर्स को अमेरिका, जर्मनी, फिनलैंड, जापान सिंगापुर भेजा वहां से आकर वो आउटकम दे रहे हैं. हम 50 हजार टीचर्स को वर्ल्ड की बेस्ट ट्रेनिंग नहीं दिला सकते. लेकिन जरूरी है पढ़ाई का माहौल बनना, स्कूलों में अच्छा वातावरण तैयार करना जो कि दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाई का वातावरण बन रहा है. प्रिंसिपल को पांच से सात लाख रुपये खर्च करने का हकसरकारी स्कूलों में तभी सुधार आएगा जब टीचर्स के स्टैंडर्ड में सुधार होगा. टीचर्स से कहा जाता था कि जाओ फैमिली रजिस्टर भर आओ, ढिढोरा पीट आओ सरकार की योजना का. लेकिन सवाल ये है कि बीएड का एग्जाम फैमिली रजिस्टर भराने के लिए नहीं होता. जब हमने ये सब रोका तो टीचर्स को लगा कि उनकी भी पावर है. वे पढ़ाई में सुधार लाए, वरना टीचर्स और सिस्टम वही है, बस बदलाव नया है. इसी तरह पहले प्रिंसिपल के पास भी पावर न के बराबर थी. पहले ये था कि अगर प्रिंसिपल छोटे-छोटे आयोजन करना चाहता है तो इससे पहले उसे डिप्टी डायरेक्टर से पूछना होगा. अब SMC बनाकर प्रिंसिपल को एम्पावर किया. अब प्रिंसि‍पल को 5 से सात लाख रुपये दे रखे हैं कि उन्हें कहीं फाइल भेजने की जरूरत नहीं है. छोटे छोटे आयोजन कराइए. स्कूलों में टॉयलेट, बोर्ड, पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए. यहां तक कि अगर टीचर नहीं हैं तो उन्हें अधिकार है कि एसएमसी कमेटी के साथ टीचर हायर कर लो. सिवाय चुनाव के कोई काम टीचर्स से नहीं कराएंगे.

उन्होंने यहां प्रदूषण पर भी अपनी बात रखी और बताया कि स्कूलों में 50 लाख मास्क दे रहे हैं. ये एक तरह का एमरजेंसी अरेंजमेंट है. आने वाले समय में पराली का विकल्प भी देंगे. कंपनियां आएं और पराली को उठाकर ले जाएं. वहीं ऑड ईवन को भी प्रदूषण से जंग में सफल बताया.

साहित्य आजतक में रजिस्ट्रेशन के लिए यहां क्लिक करें

स्कूलों में अब 35:1 होगा टीचर स्टूडेंट अनुपात

सिसोदिया ने कहा कि जब सरकार बनी थी तब एक कमरे में 80 से 100 बच्चे इनरोल होते थे. अब आठ हजार कमरे बनवाए, 12 हजार और बना रहे. अब टीचर स्टूडेंट रेशियो 44:1 पर आ गया. इसे अब 35:1 लेकर आना है. अर्थात 35 बच्चों पर एक टीचर हो.

साहित्य आजतक की पूरी कवरेज यहां देखें

हम प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ नहीं

सिसोदिया ने कहा कि प्राइवेट स्कूल हमारे समय की एक रिऐलिटी हैं. जब सरकारी स्कूल इस स्थिति में आ गए कि वो क्वालिटी एजुकेशन नहीं दे पाए तो ऐसे में सारा दारोमदार निजी स्कूलों ने संभाला. दोनों शिक्षा की आर्म है, लेकिन एक लॉ ऑफ लैंड है जिसमें स्प्ष्ट है कि प्राइवेट स्कूलों का उद्देश्य प्राफिट मेकिंग न हो.

Read more!

RECOMMENDED