साहित्य आजतक 2019: वो लड़की ना जानें कहां होगी...इरशाद कामिल की नज्मों ने बांधा समां

कामिल ने अपनी रचनाओं की संगीतमय प्रस्तुति से उपस्थित लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया. कामिल ने इश्क और प्रेम पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, तो वहीं अपने घर से दूर रह रहे लोगों के दर्द को भी जुबां दी.

साहित्य आजतक के मंच पर इरशाद कामिल
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:40 AM IST

  • इंक बैंड ने दी प्रस्तुति
  • नज्मों पर झूमे श्रोता

साहित्यकारों के महाकुंभ साहित्य आजतक के दूसरे दिन शनिवार को जहां गंभीर विषयों पर मंथन हुआ, वहीं संगीत की स्वर लहरियां भी बिखरीं. रांझणा, जब वी मेट, आशिकी 2 जैसी फिल्मों में गीत लिखकर सितारों की दुनिया में अलग मुकाम बनाने वाले गीतकार इरशाद कामिल के बैंड इंक बैंड ने भी साहित्य आजतक के मंच पर अपनी दमदार परफार्मेन्स से समां बांधा.

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कामिल ने अपनी रचनाओं की संगीतमय प्रस्तुति से उपस्थित लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया. कामिल ने इश्क और प्रेम पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, तो वहीं अपने घर से दूर रह रहे लोगों के दर्द को भी जुबां दी. कामिल ने 'मैं मोहब्बत में छलका हुआ नूर हूं, मैं पुराने जमाने का दस्तूर हूं' सुनाया, तो वहीं 'तेरे खत में रहूंगा मैं आदाब सा' भी. 'गांव की गलियां पूछ रही हैं, कहां रहे तुम इतने दिन' सुनाकर श्रोताओं को भावुक भी किया.

कामिल ने संगीत के साथ 'वो लड़की न जाने कहां होगी, ख़त आधे अधूरे से लिखती थी जो, जैसा चाहूं मैं वैसा दिखती थी जो, ख़त आधा थमा के हाथों में कह देती थी, ख़ुद पूरा कर लेना मेरे दिल में है क्या, तुमको मालूम है दिल की बातों से कागज़ को भर लेना, बातें मेरी तुम्हारी जुबां होगी, वो लड़की न जाने कहां होगी...' सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी.

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इससे पहले दूसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के सांसद और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी की गायकी के साथ हुई. मनोज तिवारी ने छठ पूजा के गीतों की प्रस्तुति से माहौल को भक्तिमय बनाया.

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