मन सात समंदर डोले या नहीं पर साहित्य आजतक 2019 में जरूर डोलेगा

'साहित्य आजतक 2019' के मंच पर इस बार लेखक, कवि, गीतकार इरशाद कामिल से आपकी मुलाकात होगी. इरशाद के गीतों ने आपको जरूर हंसाया- रुलाया होगा. कभी मन बहलाया और नचाया होगा. इरशाद कामिल का अपना खुद का म्युजिक बैंड भी है.

लेखक, कवि, गीतकार इरशाद कामिल #SahityaAajtak19
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 10:18 AM IST

नई दिल्लीः याद कीजिए, ‘चमेली’ फिल्म का वो गाना जिस पर आप हौले-हौले बीट मिलाते थे, 'मन सात समंदर डोल गया, जो तू आंखों से बोल गया, ले तेरी हो गई यार सजणा वे सजणा.' इसके अलावा जब वी मेट के ‘मौज्जा ही मौज्जा’, रॉकस्टार के ‘साड्डा हक ऐथे रख’, सुल्तान के 'जग घूमया' और टाइगर जिंदा है के 'स्वैग से करेंगे का सबका स्वागत' पर आप जरूर थिरकने पर मजबूर हो जाएंगे. इन गीतों के रचयिता चर्चित गीतकार इरशाद कामिल का अपना खुद का म्युजिक बैंड भी है. इस बार 'साहित्य आजतक 2019 ' के मंच पर इन गीतों के लेखक इरशाद कामिल से आपकी मुलाकात होगी. इरशाद के गीतों ने आपको जरूर हंसाया- रुलाया होगा. कभी मन बहलाया और नचाया होगा.  इरशाद के साथ ही आप को इस बार साहित्य आजतक के मंच पर उनके बैंड का जलवा भी देखने को मिलेगा. साहित्य आजतक का काउंट डाउन शुरू हो चुका है. 1 नवंबर से 3 नवंबर तक राजधानी के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में सजने वाले इस मेले के लिए कला, साहित्य, संगीत, संस्कृति और सिनेमा जगत के एक से बढ़कर एक दिग्गज तैयार हो चुके हैं. इरशाद कामिल बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार हैं. इरशाद कामिल के बारे में कहा जाता है कि उनके गीतों के शब्द उम्मीद के धागों पर, बारिश के बाद पानी की बूंदों की तरह तैरते रंग-बिरंगे ख़्वाबों को ज़ुबान देते हैं. इरशाद टेलीविजन की भी जानीमानी हस्ती हैं. उन्होंने कई टीवीशो के टाइटल ट्रैक लिखे. जिसमें ना जइयो परदेश, कहां से कहां तक शामिल है. तीन फ़िल्म फ़ेयर, दो ज़ी सिने, दो जीमा, अलावा, दो मिर्ची म्यूज़िक अवार्ड्स के अलावा स्क्रीन, आइफा, अप्सरा, बिग एण्टरटेनमेण्ट, ग्लोबल इण्डियन फ़िल्म, शैलेन्द्र सम्मान, टीवी अवार्ड और दादा साहेब फाल्के फ़िल्म फॉउण्डेशन अवार्ड जैसे फ़िल्मी पुरस्कारों से नवाजे गए कामिल एक उम्दा कवि भी हैं. उनकी छपी किताबों में समकालीन कविता पर आलोचना पुस्तक ‘समकालीन कविता: समय और समाज’ एक नाटक ‘बोलती दीवारें’ और एक नज़्मों की किताब ‘एक महीना नज़्मों का’ आदि किताबें शामिल हैं. उनके गीतों में हिन्दी, उर्दू के साथ-साथ पंजाबी भाषा का तुकबंदी सुनने को मिलती है. वह अपने गीतों से जवां दिलों को जीतने में महारथ रखते हैं.

गौरतलब है कि 2016 से देश के नंबर 1 हिंदी समाचार चैनल 'आजतक' की ओर से हर साल आयोजित हो रहा 'साहित्य आजतक ' साहित्य के सितारों के सबसे बड़े महाकुंभ के रूप में स्थापित हो चुका है. यह मेला अपनी व्यापकता और विशिष्टता के लिए मशहूर है. 'साहित्य आज तक' का यह चौथा वर्ष है. इस साल इसमें भारतीय भाषाओं को भी शामिल किया गया है.

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