साहित्य आजतक: भगवानदास मोरवाल बोले- लेखक कहना कुछ चाहता है लोग समझते कुछ हैं

साहित्य आज तक के मंच पर खास सत्र साहित्य की बेड़ियां में लेखक भगवान दास मोरवाल, निर्मला भुराड़िया और शरद सिंह जैसे लेखक शामिल हुए. इन लेखकों ने बताया कि मौजूदा समय में साहित्य की स्थिति कैसी है.

साहित्य आजतक 2019- भगवानदास मोरवाल
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 4:33 PM IST

साहित्य आज तक के मंच पर खास सत्र साहित्य की बेड़ियां में लेखक भगवान दास मोरवाल, निर्मला भुराड़िया और शरद सिंह जैसे लेखक शामिल हुए. इन लेखकों ने बताया कि मौजूदा समय में साहित्य की स्थिति क्या है. एक लेखक किन मजबूरियों में जकड़ा हुआ है और क्यों वो खुलकर नहीं लिख पा रहा है. इसी के साथ भगवान दास ने अपनी सातवीं किताब का विमोचन भी किया. हरियाणा के मेवात से आए भगवान दास मोरवाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से मेवात को बिना किसी पहचान के हमेशा ये कहा जाता रहा है कि कोई भी गलत हुआ है तो वो इसी इलाके के गिरोह द्वारा किया गया है, उसे मिनी पाकिस्तान तक कहा जाता है. इसके अलावा भगवान ने कहा कि आज हमारे दौर का लेखक डरा हुआ और बचाव की मुद्रा में है.

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भगवान ने कहा कि लेखक कोई आसमान से उतरा हुआ फरिश्ता नहीं है, हम लोगों की तरह इंसान ही है. लेखक का धर्म इंसानियत के पक्ष में लिखना है. मैं बेड़ियों के बारे में जितना समझ पाया हूं वो ये है कि आज के दौर में अगर मैं कुछ कहना चाहता हूं तो मुझे 10 बार सोचना पड़ता है, आज लेखक कहना कुछ और चाहता है मगर समझा कुछ और जाता है. लेखक और पाठकों के बीच का तालमेल पूरी तरह से टूट चुका है.

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भगवान जी की सातवीं किताब का विमोचन- भगवान दास मोरवाल जी ने अपनी किताब वंचना का विमोचन किया. किताब के बारे में बात करते हुए भगवान दास मोराला जी ने बताया कि- इसका नाम वंचना इसलिए रखा गया क्योंकि वंचना का शाब्दिक अर्थ किसी के साथ छल या कपट करना है. हमारे भारतीय कानून में कुछ ऐसे नियम हैं जो हैं तो स्त्रियों के पक्ष में मगर अदालत में ये महिलाओं के खिलाफ जाते हैं.

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