आज कल शब्द लाइन लगा कर खड़े हैं और अर्थ एटीएम में बंद पड़े हैं: अशोक चक्रधर

'साहित्य आज तक' के मंच पर हिंदी कविता के चार बड़े नाम अशोक चक्रधर, मधु मोहिनी उपाध्याय, हरि ओम पवार, पॉपुलर मेरठी एक साथ आए और अपनी कविताओं से उन्होंने समा बांध दिया.

अशोक चक्रधर
स्वाति पांडे
  • नई दिल्ली,
  • 13 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 8:18 AM IST

'साहित्य आज तक' के मंच पर हिंदी कविता के चार बड़े नाम अशोक चक्रधर, मधु मोहिनी उपाध्याय, हरि ओम पवार, पॉपुलर मेरठी एक साथ आए और अपनी कविताओं से उन्होंने समा बांध दिया.

अशोक चक्रधर ने खुद को शब्दों का जादूगर कहने पर कहा कि मैं शब्दों का जादूगर नहीं हूं. शब्द अपने आप में जादू होते हैं. शब्दों में जादू आने से ही कोई बच्चन, कबीर, नायक, दादू बन जाती है. शब्दों में जादू अर्थों से आता है. देश में 500, 1,000 के नोट बंदी पर अशोक जी ने कहा कि आज कल शब्द लाइन लगा कर खड़े हैं और अर्थ एटीएम में बंद पड़ी है. इस पर उन्होंने एक कविता भी सुना डाली:

'कवि सम्मेलन में रो रहा था बच्चा, चुप कराने के लिए मैंने उसे 500 का नोट दिखाया, उसे देख वह और रोने लगा, फिर मैंने उसे कागज और कलम दिया, उसे पाकर वो कहने लगा, इस कागज पर मैं अंडा बनाऊंगा, और, ऊपर-नीचे हरे और नारंगी नोट लगा कर भारत का झंडा बनाऊंगा.' अपने व्यंग्य के लिए जाने जाने वाले हरि ओम पवार ने संविधान की बेबसी को अपनी कविता के जरिए बयां किया.

'मैं भारत का संविधान हूं, लाल किले से बोल रहा हूं, क्योंकि संसद से मुझे कोई बोलने नहीं देता, मेरा मन क्रंदन करता है, जब से मैं आजाद हुआ हूं.... मैं चोटिल हूं, मैं क्षत-विक्षत हूं, मैंने ये आघात सहा है, जैसे घायल पड़ा जटायु, हरा-थका कराह रहा है...' हरि ओम पवार ने अपने कविता से देश की व्यवस्था पर चोट किया. उन्होंने सीमा पर मर रहे जवानों, निठारी कांड, नंदीग्राम, सिंगुर मामले सब पर अपना दुख जताया.

'मेरे तन में अपमानों के भाले गढ़े हुए हैं, जैसे सत सइया पर भिष्म पितामह पड़े हुए हैं.' इसके बाद बारी थी श्रृंगार रस की कवयित्री मधु मोहिनी उपाध्याय की. उन्होंने सबसे पहले कविता की परिभाषा बताई:

'झूठ के सारे कपाट खोलती है कविता, सत्य को तराजू में तोलती है कविता, देश प्रेमियों में आग घोलती है कविता...' प्यार, इश्क, प्रीत, भक्ति सबको ढ़ाई अक्षर का बताती हुई मधु ने कविता पाठ किया:

'रूप को निखार दे तो जानिए वो प्यार है, जिंदगी को राह दे तो जानिए वो प्यार है, सर्द में पिघल गया तो जानिए वो प्यार है, सुनते-सुनते सुर मिले तो जानिेए वो प्यार है, बिन कहे सुनाई दे तो जानिए वो प्यार है.' इसके बाद आए हास्य रस के कवि पॉपुलर मरेठी जी . उन्होंने नोटों पर चल रहे रहे बवाल पर अपने मजाक भरे अंदाज में कहा,

'मैं खाली हाथ भला, घर लौटता तो कैसे, उधार मांगने छमो से आया था, भला वो मुझे उल्लू बनाती कैसे, नोट मैंने वहीं से निकाला, जहां उसने छुपाया था...' उनकी एक और कविता: 'तदबीर का खोटा है, मुक्कदर से अड़ा है, दुनिया उसे कहती, तू चालाक बड़ा है, वो खुद 30 साल का, और दुल्हन 60 बरस की, गिरती हुई दीवार के साए में खड़ा है.' कवि कुंवर बैचेन ने बस में एक मजदूर की बात को अपनी कविता के लाइनों में पिरोया:

'बच्चों को अभी भूखा सुलाने की दवा दे, जैसे भी बने रात बिताने की दवा दे, क्यों भूख बढ़ाने की दवा बेच रहा है, मजदूर हैं हम, भूख घटाने की दवा दे.' उनकी एक और कविता की दो लाइनें देखें:

'याद आई उनकी फिर मुझे रूला दिया, मैं कैसे मान लूं उन्हें मैंने भूला दिया.'

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