बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है एनीमिया का खतरा, शोध में खुलासा

हाल ही में हुए एक सर्वे की रिपोर्ट में सामने आया है कि बड़ों के साथ बच्चों में भी एनीमिया के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है.

प्रतीकात्मक फोटो
प्रज्ञा बाजपेयी
  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 4:22 PM IST

एनीमिया एक ऐसी समस्या है जिस पर लोग कम ही ध्यान देते हैं.  लेकिन हाल ही में हुए सर्वेक्षण के आधार पर जारी एक रिपोर्ट में पाया गया है कि एनीमिया केवल वयस्कों में ही नहीं, बल्कि बच्चों में भी आमतौर पर पाया जाता है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बढ़ती उम्र के साथ एनीमिया की संभावना भी बढ़ जाती है.

सर्वेक्षण के परिणाम जनवरी 2016 से मार्च 2019 के बीच देशभर की एसआरएल लैबोरेटरीज में हीमोग्लोबिन जांचों की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में दो अरब लोग एनीमिया से ग्रस्त हैं और इनमें से आधे मामलों का कारण आयरन की कमी होती है. 

सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, 80 साल से अधिक उम्र के 91 फीसदी लोग, 61 से 85 साल से 81 फीसदी लोग, 46 से 60 साल से 69 फीसदी लोग, 31 से 45 साल के 59 फीसदी लोग, 16 से 30 साल के 57 फीसदी लोग और 0-15 साल के 53 फीसदी बच्चे और किशोर एनीमिया से ग्रस्त हैं. वहीं, 45 साल से अधिक उम्र के मरीजों में एनीमिया के सबसे गंभीर मामले पाए गए हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कम मात्रा होने पर शरीर के ऑर्गन सिस्टम को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचाते हैं. लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से शरीर में खून के जरिए ऑक्सीजन का प्रवाह कम मात्रा में होता है, जिससे लोगों को थकान, त्वचा का पीला पड़ना, सिर में दर्द, दिल की धड़कनों का अनियमित होना और सांस फूलना आदि समस्याएं होने लगती हैं. इसके अलावा मूड में बदलाव और चिड़चिड़ापन, कमजोरी आदि समस्याएं भी सामने आती हैं.

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