इस एंटी-माइक्रोबियल कोटिंग तकनीक के सामने सुस्त पड़ सकता है कोरोना

कोरोना काल में हमें जितना हो सके सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए. कई धार्मिक स्थलों ने तो शाम की प्रार्थना सत्र को कम करने के लिए डिजिटल साधनों का उपयोग करना शुरू कर दिया है.

कोरोना वायरस का संक्रमण भीड़ वाली जगहों पर फैलने की ज्यादा संभावना होती है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 मई 2020,
  • अपडेटेड 7:32 PM IST

कोरोना वायरस के देशभर में लॉकडाउन जारी है और इस बीच काफी चीचों पर सख्ती से रोक लगाई गई है. लॉकडाउन के चौथे चरण में कई चीजों पर पाबंदी जारी है. कोरोना वायरस का संक्रमण भीड़ वाली जगहों पर फैलने की ज्यादा संभावना होती है. इसी वजह से सरकार ने कई धार्मिक स्थलों जैसे कि गुरुद्वारों, मंदिरों, चर्चों और मस्जिदों को बंद रखने का फरमान जारी किया हुआ है.

इन सभी जगहों पर लोगों की भीड़ हमेशा जमी रहती है. इस समय हमें जितना हो सके सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए. कई धार्मिक स्थलों ने तो शाम की प्रार्थना सत्र को कम करने के लिए डिजिटल साधनों का उपयोग करना शुरू कर दिया है. हालांकि इन धार्मिक स्थलों को में जैसा माहौल बनाने के लिए खास तरह की टेक्नोलॉजीस पर काम किया जा रहा है.

नैनो केमिक्स नाम की एक कंपनी ने दावा किया है कि उसने एक ऐसा नैनोटेक स्प्रे बनाया है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को काफी हद तक दूर कर सकता है. कंपनी का दावा है कि यह एंटी-माइक्रोबियल कोटिंग हर तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम के लिए उपयोगी है और हर तरह के बैक्टीरिया, फुनगी और वायरस से लड़ सकती है.

कंपनी दिल्ली स्थित ग्रेटर कैलाश के गुरुद्वारा के परिसर, रसोई से लेकर कई जगहों पर इस कोटिंग का उपयोग लगातार कर रही है, ताकि वहां पर काम कर रहे लोगों और सेवकों के लिए धार्मिक स्थल को वायरस मुक्त बनाया जा सके. साशा बोस का कहना है कि इस एंटी माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी से हम गुरुद्वारे के प्रमुख हिस्सों में स्प्रे करते हैं.

इस स्प्रे का उपयोग छत, टेबल, पोल, हैंडल, ग्लास, दीवारों और लकड़ी के फर्नीचर, प्लास्टिक और सिरेमिक टाइल्स पर किया जा सकता है. इसकी मदद से किसी भी जगह या चीजों को बैक्टीरिया, फुनगी या वायरस का असर कम किया जा सकता है. इसमें कोटिंग का टेस्ट अच्छे से किया गया है और यह कई तरह के बैक्टीरिया को बेअसर करने में कारगर है.

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