खराब एयर क्वालिटी से लोगों में बढ़ा डिप्रेशन और बाइपोलर डिसऑर्डर का खतरा

फेफड़ों को नुकसान पहुंचने के अलावा वायु प्रदूषण से अब कई तरह की मानसिक बीमारियों भी हो रहीं हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 5:44 PM IST

  • वायु प्रदूषण से सिर्फ शारीरिक ही नहीं मानसिक बीमारियों का भी खतरा
  • खराब एयर क्वालिटी से लोगों में बाइपोलर डिसऑर्डर और डिप्रेशन बढ़ा

दूषित हवा या खराब एयर क्वालिटी सेहत के लिए बहुत खरतनाक है. वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत पर पड़ता है. फेफड़ों को नुकसान पहुंचने के अलावा वायु प्रदूषण से अब कई तरह की मानसिक बीमारियों भी हो रहीं हैं.

हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हआ है. अमेरिका और डेनमार्क में लाखों रोगियों के स्वास्थ्य डेटा के आधार पर एक स्टडी की गई. स्टडी में दोनों देशों में एक जैसी बीमारी होने की बात कही गई है.

शिकागो विश्वविद्यालय और इस स्टडी के मुख्य शोधकर्ता एंड्रे रेजत्स्की ने कहा कि वैसे तो मानसिक बीमारी के बहुत कारण होते हैं लेकिन वायु प्रदूषण एक नया कारण बनकर उभरा है.

हालांकि इस स्टडी की आलोचना भी की जा रही है और लोगों ने इस विषय पर और रिसर्च करने की सलाह दी है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि वायु प्रदूषण से हर साल लगभग 7 मिलियन लोगों की मौत होती है.

आपको बता दें की वायु प्रदूषण के मामले में भारत भी बहुत खराब स्थिति में हैं खासतौर से दिल्ली-एनसीआर की एयर क्वालिटी लगातार गिरती चली जा रही है. दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर खतरनाक बना हुआ है.

दिल्ली एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से ऊपर जा चुका है, जो कि खतरे की घंटी है. कुल मिलाकर दिल्ली में हवा का स्तर यानी एक्यूआई 306 अंक पर पहुंच गया है.

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