उत्तराखंड: सड़क बंद, बुजुर्ग महिला को कंधे पर लादकर पहुंचाया अस्पताल

सड़कें बंद होने से मुनस्यारी विकासखंड के गांव अलग-थलग पड़े हुए हैं. जिसकी वजह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बीमारों को अस्पताल पहुंचाने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ रहा है. रविवार को चौना गांव की एक बीमार बुजुर्ग महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए युवाओं को 18 किलोमीटर की दूरी पैदल चलना पड़ा.

बीमार बुजुर्ग महिला को पैदल अस्पताल ले जाते युवक (Photo Aajtak)
राकेश पंत
  • पिथौरागढ़,
  • 03 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 4:54 PM IST

  • बुजुर्ग महिला को 18 किमी दूर अस्पताल पहुंचाया
  • मदकोट-दारमा सड़क पिछले 15 दिनों से बंद है

पिथौरागढ़ तहसील मुनस्यारी विकासखंड के गांव से एक 70 साल की बुजुर्ग महिला को 18 किलोमीटर कंधे पर बिठाकर अस्पताल पहुंचाया गया. सती देवी बोकटी का अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया और पांव में सूजन आने के कराण उनका चलना मुश्किल हो गया. फिर गांव के युवाओं ने उन्हें कंधें पर बिठाकर 18 किलोमीटर दूर पैदल ले गए.

गांव में साधन न होने की वजह से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. जिसकी वजह से एक बुजुर्ग महिला को 18 किलोमीटर दूर कंधे पर बिठाकर अस्पताल लाया गया. इससे पहले चौना गांव के युवाओं के द्वारा गर्भवती महिला राखी देवी को भी कंधे पर बैठाकर मदकोट 9 किलोमीटर दूर लाया गया था. इस गांव की हालत यह हो गई है कि किसी के भी बीमार होने पर लोगों को युवाओं के कंधे के सहारे ही अस्पताल ले जाना पड़ता है.

आपदा के कारण रास्ते बंद है

जोशा गांव में भीषण आपदा आई है. रोड के बंद होने से गोल्फा, इमला, कोटालगांव, चौना, मटेना, मालुपाती, हरकोट, जोशा, ढूनामानी, गांधीनगर के लोगों को पैदल ही आना-जाना करना पड़ रहा है.

बुजुर्ग महिला को अस्पताल ले जाते युवक

सरकार से पुलिया बनाने की मांग की

गांव के प्रधान चंचल सिंह चिराल का कहना है कि बीमार और गर्भवती महिलाओं के लिए अब डोली ही एकमात्र सहारा रह गया है. सड़क में मलबा होने से पैदल चलना भी आसान नहीं है. उन्होंने प्रशासन से शीघ्र सड़क खोलने और जिन नालों में पैदल पुल बहे हैं उनमें अस्थाई लकड़ी के पुल बनाने की मांग की है.

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