लखनऊ: घंटाघर से हटाए गए प्रदर्शनकारी, सैनिटाइजेशन के बाद PAC ने लगाया कैंप

घंटाघर पर पिछले दो महीने से सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था. इसमें बुजुर्गों और महिलाओं समेत सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी जुटते थे और सीएए हटाने की मांग कर रहे थे. पुलिस ने कई बार इनके खिलाफ कार्रवाई की लेकिन धरना यूं ही चलता रहा.

घंटाघर पर पीएसी की तैनाती (फोटो-नीलांशु शुक्ला)
नीलांशु शुक्ला/शिवेंद्र श्रीवास्तव
  • लखनऊ,
  • 24 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST

  • धरनास्थल पर हुआ सैनिटाइजेशन का काम
  • लॉकडाउन में घंटाघर से हटाए गए प्रदर्शनकारी

लखनऊ के घंटाघर इलाके में जहां नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाया गया है, अब वहां पीएसी ने कैंप लगा दिया है. इसके साथ ही इलाके को सैनिटाइज किया गया है. कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने धरनास्थल को खाली कराया है. इसके बाद प्रशासन की ओर से इस जगह पर सैनिटाइजेशन का काम शुरू किया गया. लखनऊ नगर निगम के कर्मचारियों ने सफाई के लिए कीटाणुनाशक (डिसइनफेक्टेंट्स) का प्रयोग किया.

घंटाघर पर पिछले दो महीने से सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था. इसमें बुजुर्गों और महिलाओं समेत सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी जुटते थे और सीएए हटाने की मांग कर रहे थे. पुलिस ने कई बार इनके खिलाफ कार्रवाई की लेकिन धरना यूं ही चलता रहा. अंततः मंगलवार को कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए पुलिस ने धरनास्थल को खाली करा दिया. खाली कराने के बाद इसे व्यापक तौर पर सैनिटाइज किया गया और पीएसी ने यहां अपने कैंप लगा लिए.

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लखनऊ प्रशासन के सूत्रों ने आजतक को बताया कि पीएसी की तरफ से कैंप इसलिए भी लगाए गए ताकि वहां फिर से प्रदर्शनकारी न जुट सकें. क्योंकि पिछली बार लाख मना करने के बावजूद प्रदर्शनकारी दिन-रात वहां डटे रहे. उनके खिलाफ कई बार पुलिस कार्रवाई हुई, यहां तक कि मुकदमे भी दर्ज किए गए, लेकिन उनका प्रदर्शन चलता रहा. ऐसे में जब धरनास्थल खाली हो गया है, तो पुलिस दोबारा प्रदर्शन की नौबत नहीं आने देना चाहती. दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर घंटाघर में भी कई दिनों से सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था.

कोरोना वायरस से संक्रमित उत्तर प्रदेश में चार और नए मरीज मिले हैं. इसमें कानपुर, पीलीभीत, जौनपुर और गजियाबाद के एक-एक मरीज शामिल हैं. अब यूपी में कोरोना से संक्रमित कुल मरीजों की संख्या 33 हो गई है. सरकार ने हर उस शहर को लॉकडाउन करने का फैसला किया है जहां पर संक्रमित मरीज मिल रहे हैं. सोमवार को जौनपुर में एक मरीज मिलने के बाद उसे भी देर रात लॉकडाउन कर दिया गया है. अब तक कुल 17 जिले इसकी जद में हैं.

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संक्रामक रोग विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. विकासेंदु अग्रवाल ने बताया कि ये सभी मरीज सर्विलांस पर हैं और इनकी लगातार निगरानी की जा रही है. इन मरीजों के स्वास्थ्य में हर दिन सुधार हो रहा है. उन्होंने बताया कि सोमवार तक 49 संदिग्ध मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. अभी तक 1487 संदिग्ध मरीजों के नमूने जांच के लिए भेजे जा चुके हैं. जिनमें 1325 मरीजों की जांच रिपोर्ट निगेटिव है. वहीं 131 संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट आना बाकी है. अभी तक 11 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं

उधर घंटाघर की तर्ज पर शाहीन बाग में नागरिकता संसोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को दिल्ली पुलिस ने मंगलवार सुबह कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान हटा दिया. पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पूर्व) आर पी मीणा ने कहा कि छह महिलाओं सहित कुल नौ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और उन्हें नजदीकी पुलिस स्टेशन ले जाया गया. आंदोलनकारी जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं, नागरिकता संशोधन कानून का पिछले तीन महीने से विरोध कर रहे थे और धरनास्थल पर डटे थे. इन्हें हटाने के लिए पुलिस ने अनुरोध किया कि वे साइट को खाली कर दें क्योंकि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण लॉकडाउन लगाया गया है. हालांकि लोगों ने पुलिस की बात मानने से इनकार कर दिया जिस पर पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी.

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