नरेंद्र मोदी के वन नेशन-वन इलेक्शन का विरोध कर सकता है विपक्ष, अंतिम फैसला कल

विपक्ष की बैठक में एक नेता ने यहां तक कहा कि कभी वन नेशन वन इलेक्शन, कभी वन नेशन वन लैंग्वेज इस तरह की बातें देश को बांटने वाली है और हमारा देश ऐसा नहीं है. इस नेता ने कहा कि जिस तरीके से देश में चुनाव होते हैं एक बार आपने वन नेशन वन इलेक्शन कराया भी तो उसके बाद उपचुनाव भी होते हैं. कभी कोई सरकारी गिरती है तो यह फिर लगातार चलने वाली प्रक्रिया नहीं रह पाएगी.

विपक्षी पार्टियों की मीटिंग के लिए सोनिया गांधी संसद पहुंची. (फोटो-ANI)
मौसमी सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2019,
  • अपडेटेड 7:08 PM IST

संसद में सरकार को घेरने के लिए विपक्ष ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है. इसी सिलसिले में मंगलवार को संसद में विपक्ष की बड़ी हुई. इस बैठक में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत दूसरी पार्टी के कई नेता मौजूद रहे. इन नेताओं में सीपीआई नेता डी राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, डीएमके नेता कनिमोझी, टीआर बालू, एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले शामिल थे.

सोनिया गांधी ने करीब 10 विपक्षी नेताओं के साथ मुलाकात की. इस मुलाकात में सोनिया गांधी ने सभी लोगों से हालचाल जाना और यह तय किया कि कल एक बार फिर बैठक होगी और उसमें तय होगा कि वन नेशन वन इलेक्शन पर प्रधानमंत्री ने जो बैठक बुलाई है उसमें पार्टी के अध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि जाएंगे या नहीं. हालांकि सभी पार्टियां इस बात पर सहमत हैं कि वन नेशन वन इलेक्शन संभव नहीं है, और यह ठीक भी नहीं है.

एक नेता ने यहां तक कहा कि कभी वन नेशन वन इलेक्शन, कभी वन नेशन वन लैंग्वेज इस तरह की बातें देश को बांटने वाली है और हमारा देश ऐसा नहीं है. इस नेता ने कहा कि जिस तरीके से देश में चुनाव होते हैं एक बार आपने वन नेशन वन इलेक्शन कराया भी तो उसके बाद उपचुनाव भी होते हैं. कभी कोई सरकारी गिरती है तो यह फिर लगातार चलने वाली प्रक्रिया नहीं रह पाएगी. इसलिए इसे लादना ठीक नहीं. एक नेता ने राय दी कि आज आप एक देश एक चुनाव की बात करेंगे, कल एक देश एक धर्म की बात होगी, फिर एक देश एक पहनावे की बात होगी.

बता दें कि 17वीं लोकसभा गठन के बाद सदन की कार्यवाही शुरू हो चुकी है. लोकसभा में पहले दो दिन नव निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाया गया.  19 जून को लोकसभा के स्पीकर का औपचारिक रुप से चयन होगा. कांग्रेस ने बीजेपी के उम्मीदवार ओम बिड़ला को समर्थन देने की घोषणा की है. 

लोकसभा में विपक्ष संख्याबल के मामले में पहले ही कमजोर है, अब उसके सामने आपस में सामंजस्य बनाने और सरकार को मुद्दों के आधार पर घेरने की चुनौती है. विपक्ष रोजगार के आंकड़े, जीडीपी, चमकी बुखार जैसे मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार को घेर सकता है. इसके अलावा नरेंद्र मोदी सरकार को लोकसभा में तीन तलाक बिल को पास कराने के लिए भी विपक्ष के सहयोग की जरूरत होगी. विपक्ष इस पर भी अपना रुख स्पष्ट करने वाला है.

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