धर्म के नाम पर बेजुबान पशुओं की बलि... सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

जनहित याचिका में दलील दी गई है कि सुप्रीम कोर्ट पहले कह चुका है कि हर जीव को जीवन का अधिकार है. संविधान के अनुच्छेद 21 में पशुओं के जीवन की सुरक्षा शामिल है.

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पशु बलि का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट. (File Photo: ITG) पशु बलि का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट. (File Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:33 PM IST

धर्म के नाम पर पशु बलि पर रोक लगाने की गुहार वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. अदालत ने याचिकाकर्ता वकील श्रुति बिष्ट की अर्जी पर सुनवाई करते हुए धर्म के नाम पर बेजुबान पशुओं की हत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान की जाने वाली पशु बलि के मामलों में सरकारी स्तर पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है.

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याचिका में पशु अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 28 को संशोधित करने की गुहार लगाई गई है. इस प्रावधान के तहत किसी धर्म की प्रथा, परंपरा या मान्यता के अनुसार की गई पशु हत्या को अपराध नहीं माना जाता.

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह प्रावधान पशुओं के संरक्षण के उद्देश्य के विपरीत है. इससे सरकारी खजाने के साथ-साथ पशु अधिकारों को भी नुकसान होता है. याचिका में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पशु बलि पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाने, जन-जागरूकता बढ़ाने और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम करने की मांग की गई है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट पहले कई मामलों में कह चुका है कि हर जीव को जीवन का अधिकार है. संविधान के अनुच्छेद 21 के व्यापक दायरे में पशुओं के जीवन की सुरक्षा भी शामिल है.

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अब अदालत चार सप्ताह बाद इस मामले पर अगली सुनवाई करेगी.

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