विपक्ष की बैठक में बोले राहुल गांधी- श्रमिकों, किसानों की मदद अभी नहीं की तो आर्थिक तबाही होगी

राहुल गांधी ने कहा कि लॉकडाउन के दो लक्ष्य हैं. बीमारी को रोकना और आने वाली बीमारी से लड़ने की तैयारी करना. लेकिन आज संक्रमण बढ़ रहा है और लॉकडाउन हम खोल रहे हैं. क्या इसका मतलब है कि यकायक बग़ैर सोचे किए गए लॉकडाउन से सही नतीजा नहीं आया?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (राहुल गांधी)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2020,
  • अपडेटेड 9:10 PM IST

  • श्रमिकों, किसानों, उद्योगों की मदद पर दिया जोर
  • मदद नहीं करने से बढ़गा आर्थिक संकट-राहुल गांधी

देश में कोरोना वायरस और चक्रवाती तूफान अम्फान संकट के मुद्दे पर शुक्रवार को विपक्षी दलों की बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रवासी श्रमिकों, किसानों और छोटे उद्योगों की मदद किए जाने पर जोर दिया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बताया कि राहुल गांधी भी विपक्षी नेताओं की बैठक में शामिल हुए.

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बताया कि बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि लॉकडाउन के दो लक्ष्य हैं. बीमारी को रोकना और आने वाली बीमारी से लड़ने की तैयारी करना. लेकिन आज संक्रमण बढ़ रहा है और लॉकडाउन हम खोल रहे हैं. क्या इसका मतलब है कि यकायक बग़ैर सोचे किए गए लॉकडाउन से सही नतीजा नहीं आया?

राहुल गांधी ने कहा कि लॉकडाउन से करोड़ों लोगों को ज़बरदस्त नुक़सान हुआ है. अगर आज उनकी मदद नहीं की, उनके खातों में 7,500 रुपये नहीं डाला, अगर राशन का इंतज़ाम नहीं किया, अगर प्रवासी मज़दूरों, किसानों और छोटे उद्योगों की मदद नहीं की तो आर्थिक तबाही हो जाएगी.

राहुल गांधी ने कहा कि लोगों को क़र्ज़ की जरूरत नहीं पर सीधे मदद की आवश्यकता है. हमारी जिम्मेदारी है कि हम सब आवाज़ उठाएं. ये देश का सवाल है, दलों का नहीं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो करोड़ों ग़रीबी के जाल में उलझ जाएंगे.

अम्फान को घोषित करें राष्ट्रीय आपदा

इससे पहले, बैठक में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से तुरंत अम्फान चक्रवाती तूफान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का आग्रह किया और प्रभावित राज्यों को इस आपदा के प्रभाव से निपटने में मदद की मांग की.

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चक्रवाती तूफान को लेकर विपक्षी दलों ने कहा कि इस समय, राहत और पुनर्वास सबसे प्रमुख प्राथमिकता होनी चाहिए. लेकिन इस तरह की आपदा के परिणामस्वरूप अन्य बीमारियों के प्रकोप की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. इसके बाद, विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से नागरिकों, देशवासियों को तत्काल सहायता मुहैया कराये जाने का आह्वान किया.

विफल साबित हुए पीएम मोदी

वहीं सोनिया गांधी ने बैठक की शुरुआत करने के साथ ही कोरोना संकट को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कोरोना संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत में उम्मीद जताई थी कि इस पर 21 दिन में काबू पा लिया जाएगा जबकि उनकी धारणा गलत साबित हुई. उन्होंने कहा कि सरकार न केवल लॉकडाउन के मानदंडों को लेकर अनिश्चित थी बल्कि वह उसके पास इससे निकलने की भी कोई रणनीति नहीं थी. इस क्रमिक लॉकडाउन के नतीजे भी खास नहीं देखने को मिले.

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सोनिया गांधी ने कहा कि कोरोना टेस्ट और टेस्टिंग किट के आयात पर भी झटका लगा. लॉकडाउन से उपजे संकट पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नकदी गरीबों को हस्तांतरित की जानी चाहिए, सभी परिवारों को मुफ्त अनाज वितरित किया जाना चाहिए, प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों में वापस जाने के लिए बसों और ट्रेनों की व्यवस्था करनी चाहिए.

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