NIA का दावा, साध्वी प्रज्ञा का 'गलत' फायदा उठाने के चक्कर में मारा गया सुनील जोशी

2007 में आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी मर्डर केस की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) इस नतीजे पर पहुंची है कि जोशी, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का शारीरिक रूप से गलत 'फायदा उठाना' चाहता था.

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली,
  • 17 अगस्त 2014,
  • अपडेटेड 3:12 PM IST

2007 में आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी मर्डर केस की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) इस नतीजे पर पहुंची है कि जोशी, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का शारीरिक रूप से गलत 'फायदा उठाना' चाहता था. प्रचारक की हत्या में यह अहम वजह है. प्रज्ञा सिंह ठाकुर को इसी केस में मध्य प्रदेश की देवास पुलिस ने आरोपी बनाया है. यह खबर अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने दी है.

2008 के मालेगांव बम ब्लास्ट केस में साध्वी का आरोपी बनाया जाना तय है. एनआईए अगले हफ्ते इस मामले में चार्जशीट दाखिल करेगी. साध्वी के साथ अन्य चार लोगों के खिलाफ एनआईए आर्म्स एक्ट और अवैध गतिविधियों के तहत मामला दर्ज कर सकती है. साध्वी एक मात्र आरोपी है जिन्हें देवास पुलिस और एनआईए की चार्जशीट में आरोपी बनाया गया है.

एनआईए ने दावा किया है कि जोशी की हत्या के पीछे की अहम वजह उसका साध्वी के करीब आने की कोशिश करना और शारीरिक रूप से 'गलत फायदा' उठाना था. एजेंसी के मुताबिक साध्वी, जोशी को लेकर सावधान थी और उसे आशंका थी कि आरएसएस प्रचारक आतंकी साजिश का भेद खोल सकता है.

एनआईए की चार्जशीट में इस बात का जिक्र हो सकता है कि अजमेर ब्लास्ट के बारे में जोशी को खुलासा करने से रोकने के लिए भी निशाना बनाया गया हो. साध्वी प्रज्ञा ने इसी मामले में आरोपी आनंदराज कटारिया को अपने घर में दस दिनों तक रखा था. हालांकि देवास पुलिस ने कटारिया को आरोपी बनाया है, लेकिन जोशी मर्डर केस में एनआईए की अंतिम लिस्ट में उसका नाम नहीं है.

गौरतलब है कि 2011 में देवास पुलिस द्वारा पहली चार्जशीट फाइल किए जाने के बाद इस मर्डर केस की रूपरेखा बदलती रही है. ऐसा तब हुआ जब कुछ आरोपी मालेगांव ब्लास्ट केस में पकड़े गए. इनमें से चार- राजेंद्र चौधरी, लोकेश शर्मा, जितेंद्र शर्मा (भारतीय जनता युवा मोर्चा का नेता) और बलबीर सिंह के साथ साध्वी को जोशी मर्डर केस में आरोपी बनाया गया है. जबकि छठा आरोपी दिलीप जगताप, इस मामले में अनुमोदक बन गया है.

एनआईए का दावा है कि राजेंद्र और लोकेश ने 29 दिसंबर 2007 की रात जोशी की हत्या कर दी. इस साजिश को अंजाम देने के लिए जितेंद्र शर्मा और बलबीर सिंह ने पिस्टल और मैगजीन छुपाया था. एजेंसी का कहना है कि फोरेंसिक जांच में यह साबित हो गया है कि मर्डर स्थल से मिले नमूने से हथियारों से मेल खाते हैं.

जांच एजेंसी का दावा है कि लोकेश, राजेंद्र और जोशी एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे, जिसमें मुस्लिमों को निशाना बनाकर और ब्लास्ट किए जाने थे.

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