3,300 करोड़ के रक्षा सौदे को मंजूरी, मेक इन इंडिया के तहत बनेंगी मिसाइलें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक में देश में बने रक्षा उपकरणों की 3300 करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दी गई है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Courtesy- Facebook)
अभि‍षेक भल्ला
  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 9:29 AM IST

  • डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की बैठक में रक्षा उपकरणों की खरीद को हरी झंडी
  • रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की बैठक

मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए देश में बने रक्षा उपकरणों की 3300 करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दे दी है. सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक में इस फैसले को हरी झंडी दी गई.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक मेक इन इंडिया के तहत डीएसी ने 3300 करोड़ रुपये के तीन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. इन प्रोजेक्ट्स के तहत रक्षा उपकरणों को भारतीय उद्योगों द्वारा डिजाइन और विकसित करने के साथ ही  बनाया भी जाएगा. इसके जरिए सरकार रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता को कम करना चाहती है.

पहले बनेगी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल

पहले दो प्रोजेक्ट्स में T-72 और T-90 टैंकों के लिए तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) और एग्जिलरी पॉवर यूनिट (APUs) बनाई जाएंगी. इससे सेना की मारक क्षमता में कई गुना इजाफा होगा. तीसरी पीढ़ी के एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल से 'फायर एंड फोरगेट' और 'टॉप अटैक' की क्षमता हासिल हो जाएगी.

एग्जिलरी पॉवर यूनिट से टैंकों के फायर कंट्रोल सिस्टम और नाइट फाइटिंग क्षमता में इजाफा होगा. तीसरे प्रोजेक्ट के तहत पहाड़ों और ऊंचाई वाले इलाकों के लिए डिसक्रीट इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर सिस्टम बनाया जाएगा. इसको रक्षा अनुसंधान और विकास परिषद यानी डीआरडीओ डिजाइन और विकसित करेगा. इसके बाद इसको इंडियन इंडस्ट्री की भागीदारी से बनाया जाएगा.

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार के इस कदम से प्राइवेट सेक्टर में रक्षा उपकरणों के रिसर्च और विकास को बढ़ावा मिलेगा. यह पहली बार है, जब रक्षा मंत्रालय ने इंडियन प्राइवेट इंडस्ट्री द्वारा डिजाइन, विकसित और निर्मित सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी गई है.

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