अवमानना याचिका पर गहलोत सरकार को HC का नोटिस, 6 हफ्ते में मांगा जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट के 2 जजों की बेंच ने सोमवार को अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार में मुख्य सचिव डी बी गुप्ता को नोटिस जारी किया है. नोटिस में जवाब देने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया गया है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो)
देव अंकुर
  • जयपुर,
  • 18 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 2:35 PM IST

  • गहलोत सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका पर HC में सुनवाई
  • अशोक गहलोत पर कोर्ट का आदेश लागू नहीं करने का आरोप

राजस्थान हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर गहलोत सरकार एवं मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए 6 हफ्ते में जवाब देने के लिए कहा है. दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट के 2 जजों की बेंच ने सोमवार को अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार में मुख्य सचिव डी बी गुप्ता को नोटिस जारी किया है. नोटिस में जवाब देने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया गया है.

यह नोटिस 88 वर्षीय याचिकाकर्ता मिलाप चंद डांडिया की याचिका पर दिया गया है. याचिकाकर्ता मिलाप चंद डांडिया के वकील विमल चौधरी ने आज तक से कहा कि कोर्ट ने राजस्थान सरकार एवं मुख्य सचिव से 6 हफ्ते में जवाब देने के लिए कहा है.

गहलोत सरकार पर क्या आरोप हैं?

याचिका के तहत गहलोत सरकार के ऊपर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को क्रियान्वित नहीं किया, जिसके तहत कोर्ट ने यह आदेश दिया था कि राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री सरकारी खर्चे पर आजीवन सुविधाएं नहीं उठा सकेंगे. राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से दिए गए एक बड़े फैसले के तहत इसी साल के 4 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा ली जा रही आजीवन सुविधाओं पर रोक लगा दी गई थी.

जस्टिस प्रकाश गुप्ता द्वारा 4 सितंबर को दिए गए फैसले के तहत राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम 2017 को अवैध घोषित कर दिया गया था. इस फैसले के तहत राजस्थान में किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री को सरकारी खर्चे पर असुविधा जीवन सुविधाएं नहीं मिल पाने का आदेश दिया गया था. याचिकाकर्ता मिला चंद डांडिया का आरोप है कि आदेश आने के 2 महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी गहलोत सरकार ने कोर्ट के फैसले को इंप्लीमेंट नहीं किया है.

क्या था कोर्ट का फैसला?

राजस्थान हाईकोर्ट के सितंबर माह में आए फैसले के बाद यह माना जा रहा था कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जैसे कि वसुंधरा राजे, जगन्नाथ पहाड़िया को सरकारी बंगले एवं अन्य सुविधाएं आजीवन के लिए नहीं मिलेंगी.

राजस्थान हाईकोर्ट का 4 सितंबर को दिया गया फैसला मिलाप चंद डांडिया एवं अन्य द्वारा लगाई गई याचिकाओं पर दिया गया था. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यूपी के मामले में इसी तरह के विधेयक को अवैध घोषित कर दिया था. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता विमल चौधरी एवं योगेश डीलर ने पैरवी की थी.

वसुंधरा सरकार ने विधानसभा से पास कराया था बिल

राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार के दौरान लाए गए राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन नियम 2017 के तहत बंगला टेलीफोन समेत कई सुविधाएं पूर्व मुख्यमंत्रियों को देने का बिल विधानसभा में पास करा लिया गया था. जिसके बाद इसको लेकर कई विरोध के स्वर भी उठे थे.

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