शिरोमणि अकाली दल को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के बागी विधायक मनप्रीत सिंह अयाली अब 'वारिस पंजाब दे' पार्टी के साथ जुड़ गए हैं. मनप्रीत सिंह अयाली ने 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख और सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह, सांसद सरबजीत सिंह खालसा और दिवंगत दीप सिद्धू के भाई मनदीप सिद्धू की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली.
पार्टी का दामन थामने के बाद मनप्रीत सिंह अयाली ने अपनी पुरानी पार्टी के नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पंजाब में लंबे समय से सिखों और पंथ से जुड़े बेहद जरूरी मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था और उन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था. अयाली ने स्पष्ट किया कि अब इन गंभीर मुद्दों को पूरी ताकत से उठाना और इन पर काम करना ही उनकी सबसे पहली प्राथमिकता होगी.
उन्होंने बीते 2 दिसंबर को अकाल तख्त साहिब की तरफ से जारी हुए आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी बड़े नेता ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. अगर उस समय इस आदेश पर सही से अमल किया जाता, तो आज पंजाब में पंथक एकता की स्थिति कुछ और होती.
अयाली बोले- विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे अयाली
अपनी आगे की रणनीति को स्पष्ट करते हुए मनप्रीत सिंह अयाली ने बताया कि 'वारिस पंजाब दे' अभी चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक और सामाजिक पार्टी है. इसी वजह से वे इस पार्टी के साथ एक साथी के तौर पर जुड़कर काम करेंगे. उन्होंने कानूनी स्थिति को साफ करते हुए कहा कि वे अभी अपने विधायक पद से इस्तीफा नहीं देने वाले हैं और विधानसभा में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे.
जब उनसे खालिस्तान को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे पूरी तरह से लोकतांत्रिक, कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ेंगे और अकाली दल के पुराने और मूल सिद्धांतों पर ही कायम रहेंगे.
साल 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत शुरुआत
अयाली के इस फैसले का पार्टी के कई बड़े नेताओं ने स्वागत किया है और इसे भविष्य की राजनीति के लिए बेहद अहम बताया है. सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने खुशी जताते हुए कहा कि मनप्रीत सिंह अयाली पंजाब की राजनीति में एक बहुत ही साफ-सुथरी छवि वाले नेता हैं और उनके आने से पार्टी को बहुत ज्यादा मजबूती मिलेगी. वहीं, दीप सिद्धू के भाई मनदीप सिद्धू ने इस घटनाक्रम को एक बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत बताया.
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक नेता का पार्टी में आना भर नहीं है, बल्कि पंजाब में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए एक बहुत ही मजबूत नींव रख दी गई है.
बता दें कि 'वारिस पंजाब दे' पार्टी की शुरुआत सबसे पहले मशहूर अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता दिवंगत दीप सिद्धू ने की थी. दीप सिद्धू के बाद इस पार्टी की कमान पूरी तरह से अमृतपाल सिंह के हाथों में आ गई. अमृतपाल सिंह पर खालिस्तान समर्थक होने का आरोप है. अप्रैल 2023 में पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं. हालांकि, जेल में रहने के बावजूद अमृतपाल सिंह ने पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था और रिकॉर्ड वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत हासिल कर सांसद बने हैं.
अमन भारद्वाज