PM के दौरे को लेकर डेरा बाबा नानक में सुरक्षा कड़ी, श्रद्धालुओं के साथ खाएंगे लंगर

सिखों के प्रसिद्ध एतिहासिक धार्मिक स्थल डेरा बाबा नानक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के चलते सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. प्रधानमंत्री सुल्तानपुर लोधी के एतिहासिक गुरुद्वारे में माथा टेकने के बाद शिकार माछिया नामक जगह पर एक जनसभा को संबोधित करेंगे.

पीएम मोदी (फाइल फोटो)
मनजीत सहगल
  • चंडीगढ़,
  • 08 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:17 PM IST

  • गुरुद्वारे में माथा टेकने के बाद जनसभा को संबोधित करेंगे पीएम
  • बारिश के बाद बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने में लगा प्रशासन

सिखों के प्रसिद्ध एतिहासिक धार्मिक स्थल डेरा बाबा नानक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के चलते सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. प्रधानमंत्री सुल्तानपुर लोधी के एतिहासिक गुरुद्वारे में माथा टेकने के बाद शिकार माछिया नामक जगह पर एक जनसभा को संबोधित करेंगे. उसके बाद वह करतारपुर कॉरिडोर का विधिवत उद्घाटन करने के बाद श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को पाकिस्तान स्थित करतारपुर दरबार साहिब गुरुद्वारा के लिए रवाना करेंगे. पीएम मोदी डेरा बाबा नानक में आम श्रद्धालुओं के साथ लंगर भी ग्रहण करेंगे.

गुरदासपुर के जिलाधीश विपुल उज्जवल के मुताबिक, श्रद्धालुओं के पहले जत्थे में 500 से ज्यादा लोग शामिल होंगे, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, बॉलीवुड अभिनेता और सांसद सनी देओल और विधायक नवजोत सिंह सिद्धू भी शामिल हैं.

बारिश से बिगड़ी व्यवस्था सुधारने में जुटा प्रशासन

गुरदासपुर जिला प्रशासन करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है. जिलाधीश और दूसरे अधिकारी देर रात तक काम करते नजर आए. उधर, गुरुवार को अचानक बारिश होने के बाद प्रशासन के कई इंतजाम पानी में धुल गए.

3500 लोगों के ठहरने के लिए बनाई गई टेंटेड सिटी में बारिश का पानी भर गया जिससे यह अस्थाई आवास बुरी तरह से खराब हो गए. कई स्वयंसेवी और प्रशासन द्वारा तैनात लोग शुक्रवार को इन तम्बूओं को सुखाने में व्यस्त रहे. दूसरी ओर करतारपुर में स्थापित पांडाल और लंगर हाल भी कीचड़ में डूबा हुआ है.

पंजाब सरकार द्वारा स्थापित पांडाल चारों तरफ बारिश के पानी में डूब गया है, जिसके चलते अब सरकार को यहां पर प्रस्तावित कई सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द करने पड़ रहे हैं. हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि सब कुछ चुस्त-दुरुस्त कर लिया जाएगा, लेकिन 4 दिनों तक यहां आनेवाले प्रतिदिन लगभग 30,000 श्रद्धालुओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. करतारपुर में भारी अवस्थाएं हैं. एक तरफ जहां लोगों के लिए ठहरने की व्यवस्था नहीं है. वहीं निर्माणाधीन सड़क भी लोगों के लिए जी का जंजाल बन रही है.

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