पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का आवागमन प्रभावित होने से भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी हो गई है. सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए रिफाइनरियों को घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इससे होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड वेंडर्स बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. दिल्ली-NCR में कई दुकानदारों ने मेन्यू कट करना शुरू कर दिया है, जबकि दिहाड़ी मजदूरों के पेट भरने वाले सस्ते ठेले अब बंद होने की कगार पर हैं.
देश में एलपीजी क्राइसिस के कारण दिल्ली के कई इलाकों में मशहूर छोले भटूरे अब प्लेट से गायब हो गए हैं, जहां पहले एक दुकान में 6-7 तरह की खाने की चीजें मिलती थी, उस जगह पर अब केवल 2-3 चीजें ही उपलब्ध हैं. कई दुकानदारों ने पोस्टर लगा दिए हैं- 'सिलेंडर न होने के कारण मेन्यू सीमित है.'
गांव लौटने पर विचार कर रहे हैं स्ट्रीट वेंडर्स
इसी तरह स्ट्रीट वेंडर्स की हालत और भी खराब है. 30-40 रुपये में थाली बेचकर दिहाड़ी मजदूरों का पेट भरने वाले पटरी वाले अब गांव लौटने पर विचार कर रहे हैं.
एक वेंडर ने बताया, '₹1100 में मिलने वाला कमर्शियल सिलेंडर अब ब्लैक में ₹3000 से भी ज्यादा का मिल रहा है. हम क्या कमाएंगे और क्या बचाएंगे? इससे अच्छा है कि गांव वापस चले जाएं.'
चाय-समोसा, पोहा और मोमोज के ठेके बंद
दूसरी ओर नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में कई चाय, समोसा, पोहा और मोमोज वाले ठेले बंद हो गए हैं या कीमतें बढ़ा दी हैं. कई वेंडर्स ने कहा कि अगर ये संकट जारी रहा तो वो अपने गांव लौट जाएंगे, क्योंकि वह रोजाना की कमाई से महंगे सिलेंडर नहीं खरीद सकते.
बता दें कि ब्लैक मार्केट में कमर्शियल सिलेंडर ₹3000 से 5000 तक पहुंच गए हैं. दिल्ली में कई ईटरीज और क्लाउड किचन बंद कर दिए हैं. नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई नहीं सुधरी तो 60% तक आउटलेट बंद हो सकते हैं, जिससे लाखों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं. छोटे व्यवसायों को लकड़ी, इंडक्शन स्टोव या इलेक्ट्रिक उपकरणों का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन इससे खर्च बढ़ रहा है और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.
वहीं, सरकार ने बुधवार को एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट लागू कर ब्लैक मार्केटिंग रोकने के निर्देश दिए हैं और राज्यों से निगरानी बढ़ाने को कहा है.
सुशांत मेहरा