'क्या अपने अंतिम संस्कार का न्योता भेजूं?', रिटायर्ड जस्टिस का दर्द, पूरे परिवार को मारने की सुपारी किसने दी?

दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार मामले में फैसला सुनाने वाले रिटायर्ड जस्टिस गौतम पटेल ने सनसनीखेज दावा किया है कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. लंदन में उनकी बेटी पर हमला हो चुका है, जबकि हालिया पत्र में पूरे परिवार के ‘अंतिम संस्कार’ की धमकी दी गई. जस्टिस पटेल ने अधिकारियों की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं.

Advertisement
रिटायर्ड जस्टिस की बेटी पर हमला हुआ, उनके चेहरे पर घूंसे मार-मारकर नाक तोड़ दी गई (फोटो- ITG) रिटायर्ड जस्टिस की बेटी पर हमला हुआ, उनके चेहरे पर घूंसे मार-मारकर नाक तोड़ दी गई (फोटो- ITG)

विद्या

  • मुंबई,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:26 AM IST

दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद से जुड़े मामले में 2024 में आए फैसले को लेकर रिटायर्ड जस्टिस गौतम पटेल को पिछले कुछ महीनों में कई धमकियां मिली हैं. धमकियों के अलावा, इस साल अप्रैल में लंदन में उनकी बेटी पर हमला भी हुआ था. रिटायर्ड जस्टिस भी फिलहाल लंदन में हैं.

अप्रैल 2024 में, जस्टिस पटेल ने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें दाई अल-मुत्लक (नेता) के रूप में बरकरार रखा था, साथ ही यह भी कहा था कि उनकी नियुक्ति वैध थी.

Advertisement

बॉम्बे बार एसोसिएशन ने बार-बार मिल रही धमकियों की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव जारी किया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, इंडिया टुडे टीवी की विद्या से बात करते हुए जस्टिस पटेल ने कहा कि हमले और धमकियों पर एक्शन की जगह हर अधिकारी एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहा है. उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश- 

सवाल – पहली बार धमकी कब मिली थी?

जस्टिस पटेल – मेरी पत्नी को सबसे पहले सितंबर में मुंबई में धमकी मिली थी. हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, मैंने भी शिकायत दी. मुझे सिक्योरिटी दी गई लेकिन 22 अप्रैल 2026 तक कुछ नहीं हुआ. मेरी बेटी पर उसके घर के ठीक बाहर हमला हुआ. हुडी पहने एक नकाबपोश व्यक्ति ने उसके चेहरे पर बार-बार घूंसे मारे. उसकी नाक टूट गई और वह जमीन पर गिर पड़ी.

Advertisement

अब 5 जून को हमें एक पत्र मिला जिसमें लिखा था कि हमने मांगों का पालन नहीं किया है और अब हमें परिणाम भुगतने होंगे. उसमें लिखा था कि अगला कदम मेरे और मेरे परिवार के लिए अंतिम संस्कार (मार डालने की धमकी) होगा. यह अविश्वसनीय है.

सवाल – धमकियों में क्या कहा गया था?

जस्टिस पटेल – सितंबर में मिली धमकी में दो-तीन बातें कही गई थीं. पहली, कि वे दाऊदी बोहरा समुदाय के भीतर एक शक्तिशाली संगठन हैं. दूसरी, कि उत्तराधिकार मामले में हारने वाले पक्ष, वादी द्वारा दायर अपील से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन वे चाहते हैं कि मैं 'यूट्यूब के हाई कोर्ट' में जाऊं और एक वीडियो बनाकर अपने फैसले से मुकर जाऊं. यह बेतुका है. फैसले से मुकरने की कोई अवधारणा ही नहीं है, और वह भी यूट्यूब पर तो बिल्कुल नहीं. अपील दायर की जा चुकी है; यह लंबित है और अपीलीय न्यायालय द्वारा इस पर फैसला सुनाया जाएगा.

सवाल – धमकी भरे पत्र में और क्या-क्या लिखा था?

जस्टिस पटेल – इसमें कहा गया है कि अगर मैं अपना बयान वापस नहीं लेता, तो मुझे और मेरे परिवार को भारी नुकसान होगा क्योंकि उन्होंने एक खतरनाक आपराधिक गिरोह को काम पर रखा है. नवीनतम धमकी में कहा गया है कि गिरोह को पूरी रकम दे दी गई है, और अनुबंध तभी रद्द किया जा सकता है जब मैं यह तथाकथित यूट्यूब वीडियो बनाकर उनकी बात मान लूं.

Advertisement

मुंबई में, यह एक सुपारी का सौदा है – और क्या है? यह स्पष्ट रूप से किसी प्रभावशाली व्यक्ति का काम है. कोई ऐसा व्यक्ति जो दाऊदी बोहरा समुदाय और उसके भीतर एक शक्तिशाली गिरोह से संबंधित होने का दावा करता है. मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे मुकदमे में किस पक्ष में हैं; मैं यहां पीड़ित हूं.

इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है क्योंकि सितंबर में मिली धमकी भरी चिट्ठी के अलावा भारत में कोई नुकसान नहीं हुआ था. हर कोई जानता है कि मैं कहां रहता हूं और मेरा दफ्तर कहां है. इसके बजाय, लंदन में मेरे परिवार को निशाना बनाया गया है.

सवाल – धमकियों और हमले के बाद से अधिकारियों की क्या प्रतिक्रिया रही है?

जस्टिस पटेल – हर अधिकारी मामले को एक-दूसरे पर डाल रहा है. उच्चायोग का कहना है कि वे कार्रवाई नहीं कर सकते क्योंकि हमले में मेरी बेटी शामिल थी, जो ब्रिटिश नागरिक है. लेकिन ताजा धमकी मुझे, एक भारतीय नागरिक और पूर्व न्यायाधीश को, ब्रिटिश धरती पर रहते हुए मिली है. मुझे समझ नहीं आता कि ब्रिटेन स्थित भारतीय उच्चायोग कार्रवाई करने से कैसे इनकार कर सकता है या लापरवाही बरत सकता है. मैं एक भारतीय नागरिक हूं. मुझे उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है. मैंने शनिवार को सभी विवरणों के साथ एक विस्तृत पत्र भेजा था. अब यहां सोमवार दोपहर हो चुकी है. अभी तक कोई जवाब तक नहीं आया है. अब क्या करना पड़ेगा? क्या मुझे उन्हें अपने अंतिम संस्कार का निमंत्रण भेजना चाहिए या क्या? यह बेतुका है.

Advertisement

सवाल – आपकी बेटी को मिली धमकियों और हमले के बाद से अधिकारियों की क्या प्रतिक्रिया रही है?

जस्टिस पटेल – पुलिस तुरंत आ गई और लगभग डेढ़ घंटे तक रुकी रही. लेकिन यह इंग्लैंड है, और वीकेंड में यहां कुछ भी नहीं होता. मुझे किसी अधिकारी से सूचना मिलने की उम्मीद है. उच्चायोग, महानगर पुलिस या स्थानीय पुलिस से.

सवाल – क्या आपकी बेटी पर हुए हमले का इन धमकियों से कोई संबंध है?

जस्टिस पटेल – जी हां, यह इसी मामले से जुड़ा है. 5 जून के पत्र में कहा गया था कि मैंने निर्देशों का पालन नहीं किया और मेरी बेटी को इसके परिणाम भुगतने पड़ चुके हैं. पत्र में एक एसडी कार्ड भी संलग्न था, जो अब पुलिस के पास है. मुझे नहीं पता कि उसमें क्या है और मैं उसे अपने कंप्यूटर में नहीं डालूंगा.

सवाल – क्या इससे आपके दैनिक जीवन पर कोई असर पड़ा है?

जस्टिस पटेल - बिल्कुल. पड़ोस की दुकान पर जाना या बच्चों को स्कूल छोड़ना जैसी सामान्य गतिविधियां भी अब अत्यधिक जोखिम भरी हो गई हैं. आपको लगातार सतर्क रहना पड़ता है और सुरक्षा सावधानियां बरतनी पड़ती हैं. यह पूरी तरह से व्यवधान है.

इससे भारतीय न्याय प्रणाली पर क्या असर पड़ेगा? कौन सा न्यायाधीश सुरक्षित है? फैसला सुनाने के सालों बाद, कोई आपके परिवार को धमकी देकर YouTube पर आकर आपसे अपना फैसला वापस लेने की मांग कर सकता है. यह अपराध की जीत और कानून के शासन का पतन है. इसे जड़ से उखाड़ फेंकना होगा. एक कड़ा संदेश जाना चाहिए कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और दोषियों को पकड़ा जाएगा और कानून के तहत कड़ी सजा दी जाएगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »