पुलिस की तरफदारी में बोले CM शि‍वराज, 'लातों के भूत बातों....'

मुख्समंत्री ने कहा कि आम आदमी के मानवाधिकारों का हनन करने वाले असामाजिक तत्वों के मानवाधिकारों की परवाह करने की क्या आवश्यकता है, बल्कि आज के दौर में ‘मानवाधिकारों’ को नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है.

Shivraj Singh Chauhan
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 31 मई 2015,
  • अपडेटेड 8:18 AM IST

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को असामाजिक तत्वों और बदमाशों पर पुलिस की सख्ती पर मानवाधिकार की बात करने वाले लोगों पर जमकर बरसे. मुख्समंत्री ने कहा कि आम आदमी के मानवाधिकारों का हनन करने वाले असामाजिक तत्वों के मानवाधिकारों की परवाह करने की क्या आवश्यकता है, बल्कि आज के दौर में ‘मानवाधिकारों’ को नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है.

शिवराज ने प्रेस क्लब द्वारा आयोजित दो दिवसीय भाषाई पत्रकारिता महोत्सव के शुभारंभ समारोह में कहा, ‘बदमाशों पर पुलिस की सख्ती पर मानवाधिकार संगठन मीडिया में मानवाधिकारों के हनन का हल्ला मचाने लगते हैं. मैं कहता हूं जो दूसरों के मानवाधिकारों की चिंता नहीं कर घृणित अपराध करते हैं, वह मानव कहलाने के ही लायक नहीं हैं तो ऐसे लोगों के मानवाधिकारों की परवाह हम क्यों करें.'

उन्होंने असामाजिक तत्वों के मानवाधिकारों की बात करने वाले लोगों को आड़े हाथों लेते हुए मजाक किया, 'अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण के लिये पुलिस क्या थानों में बदमाशों की आवभगत करे और उनकी आरती उतारे.’ मुख्यमंत्री ने प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की हिमायत करते हुए कहा कि ‘लातों के भूत, बातों से नहीं मानते.' उन्होंने कहा कि आज के दौर में मानवाधिकार को नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को दिशा देने का काम मीडिया करता है. मीडिया आम आदमी का दर्द समझता है और उसे सरकार के सामने रखता है.

उन्होंने कहा कि मीडिया और राजनीति के लोग आम आदमी से जुड़कर ही सफल हो सकते हैं. हमें अपनी आलोचनाओं से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सीख लेकर अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए.

-इनपुट भाषा से

 

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