बेटे, बहू, पोतियों और पत्नी को खोने के 6 दिन बाद पिता ने भी तोड़ा दम, मालवीय नगर अग्निकांड ने उजाड़ दिया पूरा अग्रवाल परिवार

दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड में अपने बेटे, बहू, पोतियों, पत्नी और रिश्तेदारों को खोने वाले 75 वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल का भी इलाज के दौरान निधन हो गया. वह फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे थे और साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती थे. इस तरह छह दिन के भीतर अग्रवाल परिवार का आखिरी सदस्य भी दुनिया से चला गया.

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मालवीय नगर अग्निकांड की सबसे दर्दनाक कहानी. (File Photo: ITG) मालवीय नगर अग्निकांड की सबसे दर्दनाक कहानी. (File Photo: ITG)

नीरज वशिष्ठ

  • गुरुग्राम ,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड ने एक पूरे परिवार को खत्म कर दिया. इस दर्दनाक हादसे में पहले ही गुरुग्राम निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल समेत उनके परिवार के आठ लोगों की मौत हो चुकी थी. अब इस परिवार के आखिरी सदस्य और विवेक अग्रवाल के पिता 75 वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल का भी निधन हो गया है. वह साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थे और फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे.

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राधेश्याम अग्रवाल की मौत बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों की दर्दनाक मौत के ठीक छह दिन बाद हुई. सोमवार 9 जून को इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन के साथ ही उस परिवार का आखिरी सदस्य भी दुनिया से चला गया, जिसने कुछ ही दिनों में अपने लगभग सभी करीबी रिश्तों को खो दिया था.

बता दें, 3 जून की सुबह दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में भीषण आग लगी  थी. इस हादसे में कुल 21 लोगों की मौत हुई थी. मृतकों में गुरुग्राम के रहने वाले विवेक अग्रवाल और उनके परिवार के कई सदस्य भी शामिल थे. आग इतनी भयानक थी कि होटल में ठहरे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला.

8 अपनों के बाद पिता भी चल बसे

इस हादसे में विवेक अग्रवाल, उनकी मां प्रेमलता अग्रवाल, पत्नी तर्जनी अग्रवाल, बेटियां जीविशा और वारिया अग्रवाल की मौत हो गई थी. इसके अलावा राजस्थान से आए उनके रिश्तेदार भी इस हादसे का शिकार बन गए. मृतकों में विवेक के मौसा जवरी लाल, मौसी कमला और मामा अशोक पंसारी भी शामिल थे. इस तरह अग्रवाल परिवार और उनके करीबी रिश्तेदारों के कुल आठ लोगों की जान चली गई थी.

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विवेक अग्रवाल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और गुरुग्राम में रहते थे. उनके पिता राधेश्याम अग्रवाल का इलाज साकेत के मैक्स अस्पताल में चल रहा था. वह फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थे और अस्पताल में भर्ती थे. पिता की देखभाल और इलाज के सिलसिले में विवेक अपनी मां, पत्नी और दोनों बेटियों के साथ दिल्ली आए हुए थे.

परिवार खोने का गम ले डूबा

अस्पताल के पास रहने की सुविधा के लिए परिवार ने मालवीय नगर स्थित होटल में कमरा लिया था. इसी दौरान राजस्थान से आए उनके कुछ रिश्तेदार भी उनके साथ होटल में ठहरे हुए थे. किसी ने नहीं सोचा था कि अस्पताल में भर्ती पिता की सेवा के लिए दिल्ली आया यह परिवार कुछ ही घंटों बाद एक ऐसे हादसे का शिकार हो जाएगा, जो उनकी पूरी जिंदगी को समाप्त कर देगा.

3 जून की तड़के होटल में आग लग गई. आग तेजी से पूरे भवन में फैल गई और होटल में मौजूद कई लोग उसकी चपेट में आ गए. विवेक अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्य भी बाहर नहीं निकल सके. हादसे में सभी आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था.

हादसे के बाद से ही राधेश्याम अग्रवाल अस्पताल में भर्ती थे. वह पहले से ही गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. बेटे, पत्नी, बहू, पोतियों और अन्य रिश्तेदारों की मौत की खबर ने परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ तोड़ दिया, जिसकी भरपाई संभव नहीं थी. छह दिन तक जिंदगी और बीमारी से लड़ने के बाद आखिरकार राधेश्याम अग्रवाल ने भी दम तोड़ दिया.

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दिल्ली की आग ने सब कुछ छीन लिया

राधेश्याम अग्रवाल के निधन के साथ ही यह त्रासदी और भी मार्मिक हो गई है. जिस परिवार के सदस्य इलाज के लिए दिल्ली आए थे, वह परिवार अब लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है. एक तरफ अस्पताल में बीमारी से जूझ रहे पिता थे और दूसरी तरफ होटल में ठहरा उनका पूरा परिवार आग की भेंट चढ़ गया.

मालवीय नगर अग्निकांड पहले ही दिल्ली के सबसे दर्दनाक हादसों में गिना जा रहा है. अब राधेश्याम अग्रवाल की मौत ने इस घटना को और भी भावुक बना दिया है. छह दिनों के भीतर एक परिवार के लगभग सभी सदस्यों का दुनिया से चले जाना लोगों को अंदर तक झकझोर रहा है. यह हादसा सिर्फ एक आग की घटना नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की कहानी बन गया है जिसने कुछ दिनों के भीतर अपने सभी रिश्ते खो दिए. अब अग्रवाल परिवार की यह दर्दनाक दास्तान लोगों के दिलों में लंबे समय तक एक गहरे जख्म की तरह याद की जाएगी.
 

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