बिहार: सुशील मोदी-तेजस्वी में जुबानी जंग तेज, चुनाव को लेकर भिड़े दोनों नेता

सुशील मोदी ने ट्वीट में लिखा, विधानसभा चुनाव समय पर हों या टल जाएं, एनडीए आयोग के निर्णय का पालन करेगा. हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं, लेकिन जैसे कमजोर विद्यार्थी परीक्षा टालने के मुद्दे खोजते हैं, वैसे ही राजद अपनी संभावित हार को देखते हुए चुनाव टालने के लिए बहाना खोज रहा है.

तेजस्वी यादव की फाइल फोटो
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 8:26 AM IST

  • चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप तेज
  • सुशील मोदी के विजन पर उठाया सवाल

इस साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव संभावित है. उसके पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. खासकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता आमने-सामने हैं. इसी क्रम में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और उपमुख्यमंत्री व बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं. तेजस्वी ने एक ट्वीट में लिखा कि नीतीश कुमार ने बाहर किया उसके बाद भी किस कारण से सुशील मोदी उन्हीं की सरकार में शामिल हो गए. तेजस्वी ने सुशील मोदी के विजन पर भी सवाल उठाया है.

तेजस्वी यादव ने सुशील मोदी के एक ट्वीट का जवाब देते हुए यह बात कही. सुशील मोदी ने ट्वीट में लिखा था, विधानसभा चुनाव समय पर हों या टल जाएं, एनडीए आयोग के निर्णय का पालन करेगा. हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं, लेकिन जैसे कमजोर विद्यार्थी परीक्षा टालने के मुद्दे खोजते हैं, वैसे ही राजद अपनी संभावित हार को देखते हुए चुनाव टालने के लिए बहाना खोज रहा है.

इससे पहले सुशील मोदी ने यह भी कहा कि आरजेडी प्रमुख लालू यादव अगर जेल से छूट कर बाहर आएं तो एनडीए को बिहार में जीत हासिल करना आसान होगा. उन्होंने कहा कि ऐसी सूरत में एनडीए बिहार में तीन चौथाई सीटें जीतेगी और 2010 की जीत का रिकॉर्ड दोहराया जाएगा. उन्होंने कहा, लालू यादव अगर जनता में रहते हैं तो हमें उनके भयानक शासनकाल के बारे में बताने में आसानी होगी. पिछली बार लालू यादव जमानत पर बाहर थे और उनकी पार्टी 22 सीटों पर सिमट गई थी. यहां तक कि आरजेडी को नेता प्रतिपक्ष का भी दर्जा नहीं मिल पाया था.

तेजस्वी यादव ने अभी हाल में कोरोना को देखते हुए चुनाव टालने की बात कही थी. उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'मैं लाशों पर चुनाव कराने वाला अंतिम व्यक्ति होऊंगा. अगर सीएम नीतीश स्वीकार करते हैं कि कोविड अभी भी एक संकट है, तो चुनावों को तब तक के लिए स्थगित किया जा सकता है, जब तक स्थिति में सुधार नहीं होता है. लेकिन अगर उन्हें लगता है कि कोविड कोई समस्या नहीं है, तो चुनाव पारंपरिक तरीकों से होना चाहिए.'

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