भारत बॉण्ड ईटीएफ को मंजूरी, निवेश से पहले समझें बारीकियां

देश में शुरू हुए ये ईटीएफ निवेशकों के लिए कितने सुरक्षित हैं? और निवेश करते समय किन बातों का ख्याल एक निवेशक को रखना चाहिए? इन सवालों का जबाव दिया सर्टिफाइड फाइनेंनशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी.

फोटो साभारः इंडिया टुडे
शुभम शंखधर
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  • 04 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:24 PM IST

इक्विटी और डेट आधारित म्युचुअल फंड में अंतर को आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि इक्विटी ईटीएफ में आपका पैसा किसी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने में जाता है, जबकि डेट में आप उस कंपनी को उधार देते हैं. ऐसे में डेट आधारित उत्पाद इक्विटी की तुलना में ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं.

बुधवार को कैबिनेट ने देश के पहले कॉर्पोरेट बॉण्ड आधारित ईटीएफ ‘’भारत बॉण्ड ईटीएफ’’ को मंजूरी दे दी है. भारत बॉण्ड देश का पहला बॉण्ड ईटीएफ होगा. इससे पहले देश में केवल इक्विटी आधारित ईटीएफ ही ट्रेड होते थे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक इससे सरकारी कंपनियों और संस्थाओं को फंड का अतिरिक्त स्रोत मिलेगा.

भारत बॉण्ड ईटीएफ के अंतर्गत सरकारी संस्थाओं की ओर से जारी बॉण्ड ट्रेड किए जा सकेंगे. ईटीएफ की यूनिट का मूल्य 1000 रुपए होगा, जिससे छोटे निवेशक इसमें ज्यादा से ज्यादा हिस्सेदारी ले सके. इस ईटीएफ के अंतर्गत मैच्योरिटी की दो समयावधि हैं पहली तीन वर्ष और दूसरी आठ वर्ष.

देश में शुरू हुए ये ईटीएफ निवेशकों के लिए कितने सुरक्षित हैं? और निवेश करते समय किन बातों का ख्याल एक निवेशक को रखना चाहिए? इन सवालों का जबाव दे रहे हैं सर्टिफाइड फाइनेंनशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी.

फाइनेंनशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी कहते हैं, 'इस ईटीएफ में निवेश से पहले निवेशकों को यह भलिभांति समझ लेना चाहिए कि यह बॉण्ड बाजार से जुड़ा ईटीएफ है. यह पहला ऐसा मौका होगा जब आम जनता बॉण्ड मार्केट से जुड़ सकेगी ’’ अभी देश में बॉण्ड बाजार से जुड़े उत्पाद बहुत लोकप्रिय नहीं हैं. ऐसे में भारत बॉण्ड ईटीएफ निश्चित तौर पर छोटे निवेशकों को आकर्षित कर सकता है. गोल्ड और इक्विटी आधारित ईटीएफ बाजार में पहले से कारोबार कर रहे हैं, जिससे निवेशक ईटीएफ प्रोडक्ट से परिचित हैं.

बॉण्ड ईटीएफ में कैसे रिटर्न की उम्मीद?

परम्परागत निवेश माध्यम मसलन बैंक डिपॉजिट आदि की तुलना में बॉण्ड ईटीएफ अच्छे रिटर्न दे सकते हैं. हालांकि 3 साल की परिपक्वता वाले ईटीएफ महंगाई की दर को मात दे पाएंगे यह कहना मुश्किल है. सरकारी बॉण्ड की दर ही इन ईटीएफ के रिटर्न का आधार बनेगी.

निवेश में कोई जोखिम है?

भारत बॉण्ड ईटीएफ में नवरत्न कंपनियों के ट्रिपल ए रेटिंग वाले बॉण्ड ही ट्रेड करेंगे. यानी जोखिम सीमित है. लेकिन इस उत्पाद में तरलता एक मुश्किल हो सकती है. यानी लोग जब चाहें तब उन्हें ईटीएफ बेचने में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है या उन्हें मौजूदा बाजार भाव से नीचे बिकवाली करनी पड़ सकती है. निवेशकों को चाहिए कि निवेश से पहले बॉण्ड ईटीएफ में तरलता की स्थिती का आकलन कर लें.

10 साल की अवधि वाले बॉण्ड निवेश के लिए कैसे?

लंबी अवधि में ये बॉण्ड महंगाई को मात देकर पूंजी को सुरक्षित रख सकते हैं. 7 से 8 फीसदी तक के रिटर्न इन बॉण्ड्स में अपेक्षित हैं. 10 साल की अवधि शेयर बाजार में निवेश के लिहाज से भी बेहतर है. वहां निवेश करके इसी अवधि में अच्छे रिटर्न पाए जा सकते हैं. हालांकि वहां जोखिम ज्यादा है.

ऐसे समय में जब जमा पर ब्याज की दर नीचे जा रही है तब डेट मार्केट के रास्ते छोटे निवेशकों के लिए खोलना निवेश विकल्पों की दृष्टि से बेहतर हो सकता है. लेकिन इनके प्रति जागरुकता बढ़ाने लिए सतत प्रयास जरूरी हैं.

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