कोरोना के खिलाफ आइआइटी की तकनीकी का घेरा

कोरोना महामारी से निपटने के लिए आईआईटी कानपुर हर तरह का सहयोग सरकार को मुहैया करा रहा है. आइआइटी का ड्रोन सर्विलांस के काम आ रहा है. सर्विलांस से लैस इस ड्रोन से फिलहाल हॉटस्पॉट इलाकों में दिन-रात नजर रखी जा रही है.

आइआइटी
आशीष मिश्र
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  • 21 मई 2020,
  • अपडेटेड 11:24 PM IST

कोरोना के इलाज में वेंटीलेटर की कमी को दूर करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी, (आइआइटी) कानपुर एक मिसाल बनने की तैयारी में है. यहां के बने देश के पहले पोर्टेबल वेंटिलेटर की हॉस्पिटल में टेस्टिंग शुरू हो गई है. प्रोटोटाइप पास होने के बाद विभिन्न लैब से भी एप्रूवल मिलना शुरू हो गया है. अगले कुछ ही दिन में सभी तरह के एप्रूवल मिल जाने की उम्मीद है.

इससे मई के अंत तक वेंटिलेटर का उत्पादन भी शुरू होने के आसार हैं. इसे आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक और संस्थान की इंक्यूबेटेड कंपनी नोवा रोबोटिक्स ने मिलकर तैयार किया है. पोर्टेबल वेंटीलेटर का निर्माण आइआइटी कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय की देखरेख में वैज्ञानिकों की टीम कर रही है. यह वेंटीलेटर बहुत हल्का होगा और मोबाइल से भी आपरेट हो सकेगा.

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि संस्थान की नई उपलब्धि का तीन दिन से हॉस्पिटल में ट्रायल चल रहा है. अभी तक टेस्ट में पूरी तरह सफल रहा है. अगले दो दिन तक और टेस्टिंग चलेगी. इसके बाद उपयोग के लिए फाइनल एप्रूवल मिल जाएगा. आईआईटी की तकनीक पर आधारित वेंटिलेटर का उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड बड़े स्तर पर करेगा.

कोरोना महामारी से निपटने के लिए आईआईटी कानपुर हर तरह का सहयोग सरकार को मुहैया करा रहा है. आइआइटी का ड्रोन सर्विलांस के काम आ रहा है. सर्विलांस से लैस इस ड्रोन से फिलहाल हॉटस्पॉट इलाकों में दिन-रात नजर रखी जा रही है.

आईआईटी के वैज्ञानिकों के मुताबिक पुलिस और जिला प्रशासन कहेगा तो सर्विलांस, नाइट विजन कैमरे के साथ एनाउंसमेंट और दवा छिड़काव की भी व्यवस्था भी ड्रोन में कर दी जाएगी. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की इंक्यूबेटेड कंपनी पाई-ड्रोन और टेक्नोपार्क में स्थित वीटॉल कंपनी के ड्रोन कोरोना के खिलाफ मदद कर रहे हैं.

वीटॉल के अंसार ने बताया कि कानपुर के बेकनगंज, चमनगंज समेत हॉटस्पॉट इलाकों और थोक मंडी में ड्रोन से निगरानी की जा रही है. इससे मिलने वाले वीडियो और फोटो के जरिए सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है. उन्होंने बताया कि इसमें अनाउंसमेंट और दवा का छिड़काव करने की भी व्यवस्था है, बस थोड़ा सा बदलाव करना पड़ेगा.

उधर, पाई ड्रोन के डायरेक्टर रुषिकेष चौधरी ने बताया कि जल्द ही और जिलों के हॉटस्पॉट इलाकों में भी ड्रोन से निगरानी की जाएगी. यह 20 मिनट तक हवा में रहकर वीडियो व फोटो कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराता है.

इसके अलावा आइआइटी के वैज्ञानिक कई और तकनीकों को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लैस कर रहे हैं.

यूएवी चेंबर :आईआईटी के प्रो. जे राम कुमार और उनकी टीम ने यह चेंबर बनाया है. इसमें नोट, दूध, दवा, सब्जी से लेकर हर चीज सेनेटाइज हो जाती है. कोरोना जैसे वायरस का संक्रमण खत्म हो जाता है.

पाइप्स किट : आईआईटी के वैज्ञानिक डॉ. नितिन गुप्ता ने यह किट डिजाइन की है. मात्र 100 रुपए की यह किट कोरोना योद्धाओं को संक्रमण से सुरक्षित रखेगी. इसे प्लास्टिक इंडस्ट्री में पैकेजिंग के लिए प्रयोग होने वाली बेलनाकार पाइप रोल से तैयार किया गया है. इस पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्वूपमेंट) किट या पाइप्स (पॉलीइथेलाइन बेस्ड इंप्रोवाइज्ड प्रोटेक्टिव इक्वूपमेंट अंडर स्केरसिटी) किट का प्रयोग आगरा पुलिस कर रही है.

मास्क : आईआईटी के पूर्व छात्र डॉ. संदीप पाटिल आईआईटी, कानपुर के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर नया एन-95 मास्क तैयार कर रहे हैं. इसमें कोरोना वायरस को मारने की भी क्षमता होगी. इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने फंड मुहैया कराया है. अगले दो माह में यह मास्क बाजार में उपलब्ध होगा.

स्मार्ट डस्टबिन : आईआईटी के डॉ. अमित सिंह चौहान ने एक स्मार्ट डस्टबिन बनाया है. इसमें एक विशेष कोटिंग की गई है. इसमें कूड़ा फेंकते ही कोरोना वायरस जैसे सभी बैक्टीरिया व वायरस मर जाएंगे.

चेंबर : आईआईटी के प्रो. मणींद्र अग्रवाल और उनकी टीम ने मिलकर इस चेंबर को बनाया है. यह दो चरणों मे काम करता है. पहले चरण में व्यक्ति को स्प्रे चेंबर में जाना होता है. यहां डिसइंफेक्शन के लिए पूरे शरीर पर स्प्रे किया जाता है. इसके बाद हीट चेंबर से व्यक्ति गुजरता है. यहां से गुजरने के बाद सभी तरह से वायरस मर जाते हैं.

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