कोविड के इलाज पर कोरोना का डंक

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च आइसीएमआर ने अस्पतालों के लिए कोविड-19 के इलाज का प्रोटोकाल बनाया है. इसमें सरकारी से निजी अस्पतालों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए पुख्ता बंदोबस्त करने के प्रावधान किया गया है. इसमें सरकारी अस्पतालों में पूरी व्यवस्था करने के बावजूद वहां लापरवाही की घटनाएं सामने आ रही हैं

किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज
आशीष मिश्र
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  • 21 मई 2020,
  • अपडेटेड 9:34 PM IST

लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कालेज (केजीएमयू) के ट्रामा सेंटर में 13 अप्रैल को एक संकाय सदस्य की सिफारिश पर भर्ती कराया गया था. बाद में इस मरीज की कोरोना जांच रिपोर्ट पाजिटिव आई थी. इसके बाद ट्रामा सेंटर के 55 डाक्टरों को कोरंटाइन करना पड़ा था. इसके बाद 26 अप्रैल को ट्रामा सेंटर में संक्रमित नर्स को ड्यूटी पर बुला लिया गया. कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की नर्स बुखार से पीड़ित थी बावजूद उसपर ड्यूटी का दबाव डाला गया. बाद में नर्स के संपर्क में आए 15 लोगों को क्वारंटाइन करना पड़ा था.

इसके बाद 16 मई को केजीएमयू के क्वीनमेरी अस्पताल में एक गर्भवती का आपरेशन करना पड़ा जिसकी रिपोर्ट बाद में पाजिटिव आई थी. इसमें 26 डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को एक्टिव क्वारंटाइन में भेजना पड़ा था. राजधानी लखनऊ में पहले कोरोना मरीज में बीमारी की पुष्टि 19 मार्च को हुई थी. इसके बाद अबतक कुल छह अस्पतालों और एक डायग्नोस्टिक सेंटर में कोरोना मरीज पाया गया है. इसके बाद अस्पताल को सील करके इलाज बंद कर दिया गया. केवल लखनऊ में ही नहीं आगरा का पारस अस्पताल के चिकित्सकों के कोरोना पाजिटिव होने के बाद बड़ी संख्या में यहां आए मरीजों को क्वारंटाइन कर अस्पताल को सील कर दिया गया था.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च आइसीएमआर ने अस्पतालों के लिए कोविड-19 के इलाज का प्रोटोकाल बनाया है. इसमें सरकारी से निजी अस्पतालों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए पुख्ता बंदोबस्त करने के प्रावधान किया गया है. इसमें सरकारी अस्पतालों में पूरी व्यवस्था करने के बावजूद वहां लापरवाही की घटनाएं सामने आ रही हैं.

इस कारण यहां के डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को क्वारंटाइन करना पड़ रहा है जिसका असर इलाज पर पड़ा है. ऐसे में निजी अस्पताल आइसीएमआर की पूरी गाइडलाइन फॉलो करने में हांफ रहे हैं. पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. आलोक राजवंशी बताते हैं “अस्पताल में इलाज कराने वाले हर मरीज की कोविड जांच करवाने का प्रावधान है. इस मरीज की जांच रिपोर्ट आने से पहले होल्डिंग एरिया में रखकर इलाज कराने का निर्देश दिया गया है लेकिन ज्यादातर सरकारी अस्पताल भी इन निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं.”

वहीं स्वास्थ्य विभाग में तैनात वरिष्ठ मेल नर्स राजकुमार सिंह बताते हैँ कि अस्पतालों में कोविड मरीजों के इलाज में डाक्टर खुद सामने नहीं आ रहे हैं वह पैरामेडिकल स्टाफ से ही कोरोना पेशेंट की देखभाल के लिए जाने का दबाव बनाते हैं. इस कारण अस्पतालों में कोविड मरीजों के इलाज से जुड़ी गाइडलाइन का उल्लंघन हो रहा है. वहीं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पीजीआइ, लखनऊ को कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच डाक्टरों-पैरामेडिकल कर्मचारियों को संक्रमण से बचाए रखने के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी करने को कहा है ताकि संक्रमण होने पर भी अस्पतालों की सेवाएं जारी रखी जा सकें.

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