पीएम किसान योजना पर जल्दबाजी में केंद्र सरकार

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर केंद्र सरकार अंतरिम बजट में घोषित पीएम-किसान योजना को जल्दी से जल्दी लागू करवा कर किसानों के खाते में नकद हस्तांतरित करना चाहती है. इस काम को तेजी देने के लिए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है. 

फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे
मंजीत ठाकुर
  • New Delhi,
  • 07 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 2:27 PM IST

लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और जिस तरह ग्रामीण भारत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का जनाधार कम होने की आशंकाएं पार्टी के भीतर भी सुगबुगा रही  हैं और देश भर के किसानों में बेचैनी से उनका वोट बैंक खिसकने की बातें भी विश्लेषक कर रहे हैं. ऐसे में, केंद्र सरकार अंतरिम बजट में घोषित पीएम-किसान योजना को जल्दी से जल्दी लागू करवा कर किसानों के खाते में नकद हस्तांतरित करना चाहती है. इस काम को तेजी देने के लिए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है. 

गौरतलब है कि पीएम-किसान योजना के तहत दो हेक्टेयर तक की खेतिहर जमीन वाले सभी छोटे और सीमांत किसान परिवारों को तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में 6000 रु. की सालाना नकद सहायता देने की घोषणा की गई है. यह योजना 1 दिसंबर, 2018 से ही लागू मानी गई है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश करते हुए सदन में ही कहा था कि इसकी पहली किस्त 31 मार्च तक की अवधि के लिए होगी और जल्द ही यह रकम खातों में डाल दी जाएगी.

राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखे अपनी चिट्ठी में राधा मोहन सिंह ने लिखा है कि “इस योजना के अंतर्गत पात्र लघु एवं सीमांत कृषक परिवारों का चयन राज्य सरकारों द्वारा किया जाना है तथा उनके चयन के पश्चात बैंक खातों इत्यादि अन्य आवश्यक विवरण अतिशीघ्र आनलाइन  पोर्टल के माध्यम से केंद्र सरकार को उपलब्ध कराना है, ताकि पात्र किसानों के खातों में प्रथम किस्त सीधे हस्तांतरित हो जाए.” 

इस बारे में राधा मोहन सिंह ने बताया कि लाभ हस्तांतरण में सहायता के लिए एक एकीकृत "पोर्टल पीएम किसान (http://pmkisan.nic.in)" भी लॉन्च किया गया है. इस पोर्टल पर एसएमएफ का ब्योरा भी अपलोड किया जायेगा.

योजना को लागू करने के लिए राज्य पात्र लाभार्थी भूमिधारक किसान परिवारों का नाम, आयु, लिंग, श्रेणी (एससी /एसटी), आधार संख्या (यदि आधार नंबर जारी नहीं किया गया है तो आधार नामांकन संख्या पहचान के निर्धारित दस्तावेजों के साथ साथ जैसे कि ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र,  नरेगा जॉब कार्ड, या केंद्र या राज्य/ केंद्रशासित प्रदेश सरकारों या उनके अधिकारीयों द्वारा जारी किए गए किसी भी पहचान से सम्बन्धित दस्तावेज आदि) बैंक खाता संख्या और आइएफएससी कोड की सूचना देगा. हालांकि मोबाइल नंबर अनिवार्य नहीं है, लेकिन सलाह दी गई है कि उपलब्ध होने पर इसे दर्ज किया जा सकता है ताकि मंजूरी/ लाभ के हस्तांतरण से संबंधित जानकारी का दी जा सके. 

अपने पत्र में राधा मोहन सिंह ने लिखा है कि इस योजना को ससमय लागू करने के लिए राज्य स्तर से ग्रामीण स्तर तक प्रशासनिक मशीनरी की भागीदारी जरूरी है. उन्होंने लिखा "मेरा अनुरोध है कि सभी राज्य सरकारें अपने कुशल नेतृत्व में इस योजना के क्रियान्वयन को गति प्रदान करने का कष्ट करें, जिससे सभी पात्र लघु एवं सीमांत किसान परिवारों को अतिशीघ्र इस योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा सके और वह नए उत्साह से खुशहाली की तरफ बढ़ सकें."

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