दहेज प्रथा पर चोट करती है मोस्ट कॉमन बुड़बक

शशांक कुमार की फिल्म मोस्ट कॉमन बुड़बक दहेज प्रथा पर आधारित है, पर जरा अलग अंदाज में. दहेज का दानव आज भी यूपी, बिहार, झारखंड और एमपी जैसे राज्यों में मौजूद है. शशांक की फिल्म इस समस्या पर जोरदार प्रहार करती है

फोटोः नवीन कुमार
नवीन कुमार
  • मुंबई,
  • 02 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

इन दिनों सिनेमा हो या वेब, दोनों मीडियम में ऐसी कहानियों को पसंद किया जा रहा है जो यूपी, बिहार या छोटे शहरों से जुड़ी होती हैं. दर्शक भी ऐसी कहानियों के किरदारों से खुद को जोड़ कर देखते हैं और फिल्म को सफलता मिलती है. इस फार्मूले को शशांक कुमार ने भी अपनी फिल्म मोस्ट कॉमन बुड़बक के लिए आजमाया है.

उनकी फिल्म दहेज प्रथा को छूती है जो आज भी यूपी, बिहार, झारखंड और एमपी जैसे राज्यों में है. बकौल शशांक, 'मैंने दहेज प्रथा पर अलग तरह से चोट किया है. दहेज लेने देने की बात नहीं की है बल्कि शादी में जो खर्च है उसे वर-वधू दोनों पक्ष समान रूप से उठाए. यह व्यवस्था समाज में स्वीकार किया जा सकता है और आने वाले दिनों में यह भी खत्म हो जाएगी.' शशांक आगे कहते हैं कि यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है. इसलिए सब कुछ कॉमेडी के जरिए कहा गया है.

शशांक इस फिल्म के डाइरेक्टर और राइटर हैं. उन्होंने फिल्म की शूटिंग झारखंड के रांची शहर में की है. उनका कहना है कि यह कहानी की मांग थी और बिना सेट लगाए रियल लोकेशन पर शूटिंग की गई है.

उनकी फिल्म के लीड रोल में रॉबर्ट डॉमनिक डिसूजा और रजनी कटियार हैं. ये दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं और कहानी इन्हीं दोनों के इर्दगिर्द घूमती है. इन दोनों के प्यार में अमीरी और गरीबी का भी फासला दिखाया गया है.

कहानी में झारखंड, बिहार और यूपी के कल्चर को लिया गया है और संवाद में बिहारी टच ज्यादा दिया गया है.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले पटना के शशांक सिनेमा में करियर बनाने के लिए पिछले कुछ सालों से मुंबई में हैं. उन्होंने असम पर डाक्यूमेंटरी बनाई तो कुछ कॉरपोरेट हाउसों के लिए एड भी बनाए हैं. उन्होंने दिल ये मासूम है और सरहद बुला रही है म्यूजिक एलबम भी तैयार किए हैं. लेकिन वो फिल्म डाइरेक्टर बनाना चाहते थे और उनका यह सपना पूरा हुआ मोस्ट कॉमन बुड़बक फिल्म से.

शशांक के शब्दों में, 'पहली फिल्म के लिए फाइनेंसर मिलना मुश्किल होता है. इसलिए अपनी फिल्म के लिए ऐसे ऐक्टर्स और क्रू मेंसर्स को साथ किया जिन्हें प्रतिभा के बावजूद प्लेटफार्म नहीं मिल रहा था. सीरियल और कुछ फिल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं करने वाले रॉबर्ट और रजनी की जोड़ी बनाई. इनके अलावा गीत-संगीत के लिए दोस्तों को साथ किया और यह फिल्म पूरी हुई.

डिस्ट्रीब्यूशन के लिए यूएफओ का सहयोग मिला और फिल्म अब छह मार्च को रिलीज हो रही है.' शशांक का कहना है कि अगर ऐक्टर्स और दोस्तों का सहयोग मिल जाए तो कम बजट में फिल्म बन सकती है. यह प्रयोग करके फिल्म डेढ़ करोड़ रूपए में तैयार हो गई. फिल्म में अमितोष श्रीराम और राज नंदिनी भी अहम भूमिका में हैं.

स्क्रीनप्ले और डायलॉग में शशांक ने क्षितिज राय की मदद ली है. संजीव चतुर्वेदी, काशी कश्यप, श्वेता राज और दिव्या शर्मा ने गाने लिखे हैं जिसे काशी और रिचर्ड ने संगीत से सजाया है. फिल्म में संगीत काफी अहम है.

शशांक को भरोसा है कि उनकी फिल्म आज के दौर की है और कंटेंट बेहतर है. इसलिए इसे दर्शकों का प्यार मिलेगा.

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