वह क्या है जो जेएनयू में स्नातकोत्तर की पढ़ाई को खास बना देता है

विश्वविद्यालय का हर स्कूल अपने कोर्स खुद तैयार करता है ताकि स्नातकों का सर्वांगीण प्रशिक्षण हो

विक्रम शर्मा
कौशिक डेका
  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST

जेएनयू अपने शुरुआती दिनों से ही स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में अंतर-अनुशासन दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करता रहा है. लगभग हर स्नातकोत्तर (पीजी) प्रोग्राम की संरचना ऐसी है जो छात्रों को यहां उपलब्ध किसी भी अन्य अनुशासन का पाठ्यक्रम चुनने की अनुमति देती है. उदाहरण के तौर पर, सामाजिक विज्ञान का कोई छात्र स्कूल ऑफ एन्वायरनमेंटल साइंसेज में पढ़ाए जाने वाला पर्यावरणीय मुद्दों से संबंधित किसी पाठ्यक्रम का विकल्प चुन सकता है. भाषा का कोई छात्र अपनी पसंद के क्षेत्र में ज्ञानार्जन के लिए स्कूल ऑफ संस्कृत, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज या स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के किसी पाठ्यक्रम को ले सकता है.

यह व्यवस्था छात्रों की बुद्धि और व्यक्तित्व को गढऩे के साथ उनकी रुचियों और क्षमताओं को साकार करती है. यहां के कई छात्रों ने कला, संस्कृति, राजनीति, ऊर्जा, सामुदायिक स्वास्थ्य और प्राकृतिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने की विशेषज्ञता हासिल की है. यहां विज्ञान और मानविकी दोनों धाराओं के सभी स्कूल अपने पाठ्यक्रम को इस तरह डिजाइन करते हैं कि उनके स्नातकों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण मिल सके. पाठ्यक्रमों की नियमित समीक्षा होती है जिसके आधार पर किसी क्षेत्र विशेष में वर्तमान और संभावित प्रगति के दृष्टिगत पाठ्यक्रमों को अपग्रेड किया जाता है. विश्वविद्यालय में प्रयोगशाला और फील्ड वर्क पर भी जोर रहता है.

शिक्षा और अकादमिक माहौल की गुणवत्ता में सुधार के लिए पिछले तीन वर्षों में उठाए गए कदम

पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय ने स्नातकोत्तर शिक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख स्कूल और तीन विशेष केंद्र खोलने का निर्णय लिया है. ये हैं, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ऐंड आंत्रप्रेन्योरशिप, स्कूल ऑफ इंडियन ट्रेडिशनल डांस ऐंड म्यूजिक, स्पेशल सेंटर फॉर नेशनल सिक्योरिटी, स्पेशल सेंटर फॉर स्टडी ऑफ नॉर्थ-ईस्ट इंडिया और स्पेशल सेंटर फॉर डिजास्टर रिसर्च. हमने स्पेशल सेंटर फॉर संस्कृत को पूर्ण विकसित स्कूल ऑफ संस्कृत ऐंड इंडिक स्टडीज के रूप में उन्नत किया है. हमने 2018 में दीक्षांत समारोह की प्रक्रिया को भी फिर से शुरू किया है. शिक्षकों की भर्ती लंबे समय से लंबित थी जिसके कारण कुछ प्रमुख क्षेत्रों में शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था. हमने सुनिश्चित किया कि रिक्त स्थान एक निश्चित समय सीमा में भर लिए जाए ताकि कमी वाले क्षेत्रों को मजबूत किया जा सके. शोध डिग्री प्रोग्राम्स के लिए छात्रों की संख्या भी बढ़ाई गई है.

भविष्य की योजनाएं

जेएनयू बीते तीन वर्षों में शुरू हुए नए विषयों में दक्षता हासिल करेगा. इसके अलावा, विशेष रूप से डिजिटल प्रौद्योगिकी संसाधनों का उपयोग करते हुए शिक्षण उपकरणों का नवोन्मेष किया जाएगा जिससे शिक्षण प्रक्रिया तेज होगी और छात्र अत्यधिक उच्चस्तरीय ज्ञान से लैस हो सकेंगे. जेएनयू अपने संकाय सदस्यों की विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए ऑनलाइन डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों की भी योजना बना रहा है.

जेएनयू कैंपस की अनूठी बात क्या है?

यह 1,000 एकड़ क्षेत्रफल में फैला वन्यजीवों समेत हरा-भरा परिसर है. परिसर में घूमने भर से ही प्रकृति के साथ एकात्म होने का आध्यात्मिक भाव पैदा होता है. परिसर की निर्माण योजना ऐसी है जो छात्रावासों तथा शैक्षणिक खंडों के बीच आसान पहुंच सुनिश्चित करती है. यह शायद एकमात्र ऐसा परिसर है जो छात्रावास से बाहर रहने वाले छात्रों को सार्वजनिक परिवहन की बस सुविधा से जोड़ता है. विश्वविद्यालय अपने आप में एक ऐसी दुनिया है जिसमें आप परिसर स्थित किसी भी चीज तक किसी भी समय पहुंच सकते हैं. कक्षा के घंटों के बाद छात्रों का पसंदीदा स्थान पुस्तकालय है, जो रात भर खुला रहता है. इसके अलावा, कभी भी देर रात तक समूह अध्ययन करने वालों को छात्रावासों की दौड़ लगाते देखा जा सकता है.

एक सक्रिय सुरक्षा व्यवस्था और एक दूसरे का सम्मान करने की संस्कृति के साथ इन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है. पूरे परिसर में इंटरनेट कनेक्टिविटी होने के कारण कभी-कभार आप छात्रों को चांदनी में बैठ कर अपना काम पूरा करते हुए देख सकते हैं. विज्ञान और भाषा स्कूलों में छात्रों के लिए मुफ्त और निर्बाध पहुंच वाली अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं हैं. विश्वस्तरीय संकाय सदस्यों वाला शोध-सह-शिक्षण विश्वविद्यालय होने के नाते जेएनयू ने अपनी बौद्धिक संपदा नीति का पुनर्निधारण करते हुए अटल इनक्यूबेशन सेंटर-जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय फाउंडेशन फॉर इनोवेशन (एआइसी-जेएनयूएफआइ) के माध्यम से स्टार्ट-अप क्रांति में योगदान देने के लिए भी कमर कस ली है. एआइसी-जेएनयूएफआइ को स्वास्थ्य, आइटी, ऊर्जा/पर्यावरण, खाद्य/कृषि, ग्रामीण प्रौद्योगिकियों, और अन्य विभिन्न क्षेत्रों में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत 'नॉट फॉर प्रॉफिट' कंपनी के रूप में स्थापित किया गया है. अब यहां के किसी भी छात्र या शिक्षक के विचारों और विशेषज्ञता के आधार पर उनकी अपनी स्टार्ट-अप कंपनी हो सकती है.

विशिष्ट पाठ्यक्रम

जेएनयू के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की विशिष्टता का ताजा उदाहरण स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग है जहां छात्र पांच साल का एकीकृत प्रोग्राम करते हैं. पहले चार वर्षों के दौरान वे मुख्य रुप से इंजीनियरिंग का अध्ययन करते हैं और पांचवें वर्ष में वे सामाजिक विज्ञान और मानविकी या भाषाओं के क्षेत्रों में से एक में स्नातकोत्तर डिग्री (एमएस) के लिए पंजीकृत होते हैं. एक और उदाहरण आयुर्वेद जीव विज्ञान में परास्नातक पाठ्यक्रम है जहां छात्रों को पढ़ाने और प्रशिक्षित करने के लिए लाइफ साइंसेज, इम्युनोलॉजी, आणविक चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सा और सिद्धांतों पर संस्कृत ग्रंथों का उपयोग करने के लिए संस्कृत विद्यालय के शिक्षकों के साथ मिलकर काम करते हैं.

कोविड—19 महामारी से निपटने की योजना

विंस्टन चर्चिल ने कहा था, ''कभी किसी अच्छे संकट को बेकार मत जाने दो.'' कोविड का प्रसार रोकने के लिए परिसर को अलग-थलग करने वालों में हम सबसे पहले थे. हमारे शिक्षक और छात्र बहुत जल्दी ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चले गए थे. शायद हम देश के एकमात्र विश्वविद्यालय हैं जिसका अकादमिक कैलेंडर सबसे कम प्रभावित हुआ. अधिकतर स्कूलों ने अपनी सेमेस्टर जरूरतों को पूरा किया है.

हम अगले शैक्षणिक सत्र में प्रवेश के लिए छात्रों के ऑनलाइन साक्षात्कार आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं. यह महामारी जैसे ही भारत पहुंची, जेएनयू ने 'कोविड -19 टास्क फोर्स' बना दी थी जिसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ थे. टास्क फोर्स कोविड के हर पहलू पर कड़ी नजर रखता है और जेएनयू में इससे निपटने के तरीके मुहैया कराता है. डीन ऑफ स्टूडेंट्स की अध्यक्षता वाली एक अन्य समिति में अधिकारी हैं जो परिसर में रहने वाले छात्रों का ध्यान रखते हैं और उनकी मदद के लिए कोविड -19 प्रबंधन से संबंधित सभी पहलुओं पर निगाह रखते हैं.

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