जनादेश 2019ः पहाड़ पर मोदी लहर बरकरार

भाजपा लोगों के बीच बालाकोट स्ट्राइक जैसे मुद्दे ले जाने में सफल हुई तो कांग्रेस का संगठन नाकाम रहा

फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे
संध्या द्विवेदी/मंजीत ठाकुर
  • देहरादून,
  • 30 मई 2019,
  • अपडेटेड 12:21 PM IST

उत्तराखंड में 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने कुल 70 में से 57 सीटों पर जीत दर्ज की थी. अब दो साल बाद लोकसभा चुनावों में भी वह फिर शक्तिशाली बनकर उभरी है. भाजपा ने राज्य की सभी पांच लोकसभा सीट जीत ली और राज्य में 60 फीसद से ज्यादा मत हासिल किए. वहीं, सांगठनिक ताकत के अभाव की वजह से राज्य में चुनावी मुद्दों की भरमार के बावजूद कांग्रेस उन्हें भुना नहीं पाई और उसे शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. उसके संगठन में कोई प्रबंधन नजर नहीं आया. इस हार से कांग्रेस में गुटबाजी का नया दौर शुरू हो सकता है.

इन नतीजों से स्पष्ट है कि राज्य में मोदी सरकार के राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लोगों ने भाजपा को वोट दिया. बालाकोट स्ट्राइक के मुद्दे को राष्ट्रवाद से जोड़कर भाजपा ने मतदाताओं के घर-घर पहुंचाया. ठीक चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के खाते में आई दो हजार रु. की किस्त से भाजपा को किसानों के बीच भी बढ़त मिलती चली गई. भाजपा के मजबूत संगठन और नेटवर्क ने उसे कांग्रेस के मुकाबले बहुत आगे खड़ा कर डाला. राजनैतिक समीक्षक लोकेंद्र सिंह बिष्ट कहते हैं, ''कांग्रेस ने राफेल रक्षा सौदे जैसे मुद्दों को हवा दी. राहुल गांधी शहीदों के परिवारों से मिले, पर भाजपा के राष्ट्रवाद का तोड़ नहीं निकाल पाए.'' कांग्रेस के घोषणापत्र में शामिल सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (आफस्पा) हटाने और राफेल समेत विभिन्न वादे जन भावना के विपरीत गए.

प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे हरीश रावत की बहुत बड़ी हार हुई. वे पहले हरिद्वार से दावेदार थे, पर अंतिम समय में उन्होंने जिद करके नैनीताल का टिकट ले लिया था. इसे भी कांग्रेस की प्रदेश में करारी हार का जिम्मेदार माना जा रहा है. इससे दो अन्य सीटों, हरिद्वार और अल्मोड़ा का भी समीकरण गड़बड़ा गया. अल्मोड़ा और हरिद्वार के जो कार्यकर्ता हरीश रावत के करीबी थे, वे अपने क्षेत्रों को छोड़कर नैनीताल में प्रचार के लिए चले गए. इससे कार्यकर्ता और संगठन की कमजोर स्थिति से जूझ रही कांग्रेस की मुसीबत बढ़ गई. अल्मोड़ा में कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टक्वटा को रावत के नैनीताल से लडऩे के चलते पूरे चुनाव में अकेले ही चुनाव में जूझना पड़ा, जबकि अल्मोड़ा में भाजपा प्रत्याशी और केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टक्वटा के खिलाफ शुरुआत में सत्ता विरोधी लहर थी.

 पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट पर भाजपा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री  भुवन चंद्र खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी को कांग्रेस ने उतारा पर यह रणनीति काम नहीं आई. वहीं, टिहरी लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी माला राज्य लक्ष्मी शाह की जीत राष्ट्रवाद के साथ-साथ मोदी को पीएम बनाने की आकांक्षा की जीत भी रही. माला राजलक्ष्मी के खिलाफ उतरे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह करीब तीन लाख वोटों से हार गए. हरिद्वार लोकसभा सीट पर भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक और कांग्रेस के अंबरीश कुमार में मुकाबला पहले दिन से ही एकतरफा था. गन्ना बकाए को लेकर भाजपा से किसानों की नाराजगी भी थी, पर कांग्रेस उसे नहीं भुना सकी. इससे निशंक ने पिछली जीत के अंतर को और बढ़ा लिया. ठ्ठ

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