गश्त पर डॉक्टर

नई दिल्ली के एम्स से पोस्ट ग्रेजुएट डॉ. पल्लव और उनकी त्वचा रोग विशेषज्ञ पत्नी डॉ. यश पल्लव माओवाद-प्रभावित जिले के दूर-दूर फैले इलाकों में पिछले ढाई साल में 80 से ज्यादा स्वास्थ्य शिविर लगा चुकी हैं.

डॉ. अभिषेक पल्लव
राहुल नरोन्हा/संध्या द्विवेदी
  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2019,
  • अपडेटेड 4:37 PM IST

डॉ. अभिषेक पल्लव, 36 वर्ष

क्या कियाः आइपीएस अफसर, दंतेवाड़ा, नक्सल इलाकों में स्वास्थ्य शिविर संचालन

अभिषेक पल्लव 2013 बैच के आइपीएस अफसर हैं और फिलहाल दंतेवाड़ा के एसपी हैं. छत्तीसगढ़ पुलिस को उनकी शक्ल में एक ऐसा अफसर मिला है जो माओवाद की चपेट में आए इस दूरदराज के जिले में इलाज की सुविधा मुहैया करके लोगों के दिल जीत रहा है. नई दिल्ली के एम्स से पोस्ट ग्रेजुएट डॉ. पल्लव और उनकी त्वचा रोग विशेषज्ञ पत्नी डॉ. यश पल्लव माओवाद-प्रभावित जिले के दूर-दूर फैले इलाकों में पिछले ढाई साल में 80 से ज्यादा स्वास्थ्य शिविर लगा चुकी हैं.

गांवों का चयन ऐन वक्त पर किया जाता है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि माओवादियों को पता चले और वे अलर्ट हो जाएं. इन शिविरों में लोगों की सेहत की परेशानियों की जांच की जाती है और उन्हें या तो दंतेवाड़ा के जिला अस्पताल में या अपोलो अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है. यह काम वे राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के जरिए करते हैं जो बैलाडिला की खदानों में काम कर रहा है और इस काम में उनके साथ जुड़ गया है. मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए पुलिस की एंबुलेंस लगा दी गई हैं.

मार्च 2017 में डॉ. पल्लव ने एक माओवादी का इलाज किया था, जो सुरक्षा बलों के साथ गोलीबारी में घायल हो गया था. इस गोलीबारी में पांच माओवादी और दो पुलिकर्मी मारे गए थे.

उनका मकसद सीधा-सादा हैः दूरदराज के इलाकों के नौजवानों को माओवादी की जमात में शामिल होने से रोकना.

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