वह क्या है जो एमिटी यूनिवर्सिटी में पीजी की पढ़ाई को खास बना देता है?

डिसरीप्टव टेक्नोलॉजी के युग में जरूरी हुनर के लिए पीजी प्रोग्राम एजुकेशन 4.0 लागू किया गया

डॉ. बलविंदर शुक्ला, वाइस चांसलर, एमिटी यूनिवर्सिटी
कौशिक डेका
  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

स्नातकोत्तर (पीजी) प्रोग्राम छात्रों को जीवन के हुनर (एलएस) और हस्तांतरित किए जा सकने वाले हुनर (टीएस) सिखाने के साथ-साथ उद्योग की विशिष्ट अकादमिक जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं. पाठ्यक्रम को नियमित अपग्रेड किया जाता है और पीजी के हर छात्र को हरसंस्थान के कॉर्पोरेट रिसोर्स सेंटर निजी तौर पर सिखाते हैं ताकि वे उद्योग के लिए तैयार हो सकें. हम पूरी तरह लचीली पसंद पर आधारित क्रेडिट सिस्टम का अनुसरण करते हैं और छात्र अपनी रुचि के क्षेत्र और स्पेशलाइजेशन के आधार पर कोर्स चुन सकते हैं.

शिक्षा और अकादमिक माहौल की गुणवत्ता में सुधार के लिए पिछले तीन वर्षों में उठाए गए कदम

हमने इंडस्ट्री 4.0 की जरूरतों को ध्यान में रखकर परिणाम-आधारित शिक्षा और उसके साथ पूरी तरह लचीले चयन-आधारित आकलनों और उसके अनुरूप पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू किया है. वीयूसीए दुनिया में छात्रों को पेशेवरों की लगातार बदलती जरूरतों के अनुकूल बनाने के लिए साप्ताहिक आधार पर उद्योग और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अतिथि व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं. डिसरप्टिव टेक्नोलॉजी के इस युग में आवश्यक हुनर और योग्यताएं प्रदान करने के लिए तमाम पीजी प्रोग्रामों में एजुकेशन 4.0 को डिजाइन और लागू किया गया था. पाठ्यक्रमों में अब बिग डेटा, डेटा एनालिटिक्स, एआइ, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े कोर्स भी शामिल हैं.

भविष्य की योजनाएं

महामारी की मौजूदा स्थिति का नतीजा यह हुआ कि चल रहे सेमेस्टर के लिए नई रणनीतियां विकसित की गईं, जिनमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों का इस्तेमाल करते हुए रिमोट टीचिंग का फ्लिप्ड मोड, एमिटी इंट्रानेट एमिजोन पर तमाम कोर्सों का ई-कंटेंट मुहैया करवाना, छात्रों को क्लास में आने और संवाद के सत्र आयोजित करने में समर्थ बनाना शामिल है. भावनात्मक और अकादमिक सहारे के लिए साप्ताहिक मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं. लगातार आकलन का भारांश शुरुआती 30 फीसद से बढ़ाकर 50 फीसद कर दिया गया है ताकि छात्र लॉकडाउन के दौरान पेशेवर विकास की तमाम गतिविधियों के जरिए सीखने पर ध्यान दे सकें. हमने पीजी स्तर पर ही अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ शोध सहकार्य समझौतों पर दस्तखत किए हैं. साथ ही आइटी और विज्ञान तथा इंजीनियरिंग कोर्सों में संकाय सदस्य वर्चुअल लैब के जरिए प्रयोग और सिम्यूलेशन-आधारित पढ़ाई-लिखाई करवा रहे हैं.

एमिटी कैंपस की अनूठी बात क्या है?

एयूयूपी (एमिटी यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश) को जो बात अनूठा बनाती है, वह है दुनिया भर के एमिटी कैंपसों में विदेश अध्ययन कार्यक्रम सरीखी पहल. हमें कई अमेरिकी और ब्रिटिश अधिमान्यताएं हासिल हैं. यूनिवर्सिटी में करियर के विकास, इनक्यूबेटर और ऐसी ही कई ओर सहायता सेवाएं मुहैया की जा रही हैं. छात्रों की सहायता के लिए एक अनूठी मेंटर-मेंटी व्यवस्था भी मौजूद है. बिहैवियरल साइंसेज और बिजनेस कम्युनिकेशन स्किल्स पर छात्रों के लिए अनूठे मॉड्यूल विकसित किए गए हैं ताकि उनमें नेतृत्व के गुण और संचार का कौशल बढ़ाया जा सके. हमने छात्र की मेंटरिंग के लिए 4-टीयर तरीका अपनाया है और सातों दिन 24 घंटे काम करने वाले स्टुडेंट काउंसिलिंग ऐंड गाइडेंस सेल भी है.

कोविड-19 महामारी से निपटने की योजना

एयूयूपी पहली यूनिवर्सिटी है जिसने डिजिटल प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल करके रिमोट एजुकेशन की शुरुआत की. लॉकडाउन के दौरान स्वतंत्र छात्र अनुसंधान और लाइव ऑनलाइन इंडस्ट्री प्रोजेक्ट/इंटर्नशिप के माध्यम से पीजी छात्रों की शोध क्षमताओं में बढ़ोतरी की गई. अंतिम वर्ष के छात्रों की ऑनलाइन परीक्षाएं ली जा चुकी हैं. सीनियर छात्रों के लिए नया अकादमिक सत्र (2020-21) 13 जुलाई को शुरू हो गया. सभी कक्षाएं दूर-दराज से ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर आयोजित की जा रही हैं. पढ़ाने, सीखने, मूल्यांकन और सहायता के लिए छात्रों को तमाम शिक्षण संसाधन, प्रयोगशालाएं और संकाय सदस्य ऑनलाइन सुगम होंगे.

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