डॉक्टरों के अकाल की तरफ बढ़ता पश्चिम बंगाल

डॉक्टर अरुणाचल चौधरी को भी 10 नवंबर, 2017 को इसी तरह मुअत्तली की सजा दी गई थी. वह भी इसलिए कि एक फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार डेंगू के तथ्यों और आंकड़ों में "हेरफेर कर रही'' है.

खतरे का संकेत कोलकाता में डॉक्टरों का प्रदर्शन
संध्या द्विवेदी/मंजीत ठाकुर
  • नई दिल्ली,
  • 02 मई 2018,
  • अपडेटेड 2:53 PM IST

पश्चिम बंगाल डॉक्टर-मरीज के बेहद खराब अनुपात (1 ः1,850) से जूझ रहा है. अब एक नया खतरा सराकारी डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे का आ खड़ा हुआ है जो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी से उतार सकता है. बीते कुछ महीनों में 85 डॉक्टरों ने काम छोड़ दिया है और कोई 350 डॉक्टरों का कहना है कि वे भी सेवा छोड़ने का मंसूबा बना रहे हैं.

डॉक्टरों और संबद्ध पेशेवरों के सात संगठनों ने 23 मार्च को स्वास्थ्य सचिवालय, स्वास्थ्य भवन, पर विरोध प्रदर्शन किया और अस्पताल परिसरों में हमलों और सियासी गुंडागर्दी से बचाने के लिए सुरक्षा की मांग की.

पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम के प्रमुख रजाउल करीम कहते हैं कि सरकार ने एक भी एफआइआर दर्ज नहीं की है, जबकि 2009 के मेडिकेयर कानून में ऐसे किसी भी हमले के लिए सख्त सजा मुकर्रर की गई है.

दिलचस्प बात यह है कि डेढ़ साल तक उनकी बातों को कोई तवज्जो नहीं देने के बाद मुख्यमंत्री ने 2 अप्रैल को डॉक्टरों की एसोसिएशनों को बातचीत के लिए बुलाया. बनर्जी पंचायत चुनाव से पहले राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का ठप होना गवारा नहीं कर सकती थीं.

उन्होंने डॉक्टरों से अस्पतालों में और 4,000 पुलिस कर्मी देने और सीसीटीवी कैमरे तथा संभावित हमलावरों को आगाह करने के लिए बोर्ड लगाने का भी वादा किया.

गौरतलब है कि मई 2011 में अपने पहले कार्यकाल में बनर्जी ने वरिष्ठ न्यूरोसर्जन एस.पी. गोराई को इसलिए मुअत्तल कर दिया था, क्योंकि उन्होंने भारी-भरकम लश्कर के साथ एम.आर. बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस के अस्पताल में आने पर उन्हें फटकार लगा दी थी. गोराई मार्च 2018 में रिटायर होने तक मुअत्तल ही रहे.

डॉक्टर अरुणाचल चौधरी को भी 10 नवंबर, 2017 को इसी तरह मुअत्तली की सजा दी गई थी. वह भी इसलिए कि एक फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार डेंगू के तथ्यों और आंकड़ों में "हेरफेर कर रही'' है. हमलों और हंगामों के चलते भर्तियां भी नहीं हो पा रही हैं. पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने 300 खाली पदों के लिए इश्तहार निकाला, पर कुछ ही आगे आए.

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