टायलेट टाइटनः गांवों का कायाकल्प

स्वदेश फाउंडेशन ग्रामीण भारत में विशेष रूप से महिलाओं और स्कूल जाने वाली लड़कियों की खातिर स्वास्थ्य और आरोग्य प्रबंधन के लिए

सफाई पर बातचीत रॉनी और जरीना स्क्रूवाला
सुहानी सिंह
  • महाराष्ट्र,
  • 09 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

विजेता-स्वदेश फाउंडेशन

जीत की वजह- ग्रामीण भारत में विशेष रूप से महिलाओं और स्कूल जाने वाली लड़कियों की खातिर स्वास्थ्य और आरोग्य प्रबंधन के लिए

रॉनी स्क्रूवाला ने 2004 में एक फिल्म स्वदेस बनाई जिसमें शाहरुख खान ने एक नासा वैज्ञानिक की भूमिका निभाई थी, जो अपनी अमेरिका की सुविधापूर्ण जिंदगी को छोड़कर गांव में रहने और उसकी मदद करने के लिए चला आता है.

रॉनी अपनी पत्नी जरीना स्क्रूवाला के साथ मिलकर अपने स्वदेस फाउंडेशन के तहत कुछ ऐसा ही प्रयोग कर रहे हैं, जिसका मिशन हर पांच साल में एक लाख ग्रामीण भारतीयों को सशक्त बनाना है. अपने सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के तहत यह संगठन जिन चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा है उनमें पानी और स्वच्छता शामिल हैं.

अपनी स्थापना के छह वर्षों में, स्वदेस ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के सात ब्लॉकों के लगभग 2,513 गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के क्षेत्रों में अच्छा काम किया है. स्वच्छता में उनका काम खुले में शौच मुक्त भारत के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है.

रॉनी बताते हैं, ''हमारा मिशन यह था कि हम जिन 1,20,000 घरों के लिए काम करते हैं, उन सबमें एक शौचालय जरूर होना चाहिए. पिछले चार वर्षों में हमने जिन 22,000 शौचालयों का निर्माण किया है, उनमें से प्रत्येक का उपयोग किया जा रहा है.''

स्वदेस ने 22,442 घरों में शौचालयों का निर्माण किया है, जिसका लाभ 96,500 लोगों को मिल रहा है और इन शौचालयों का उचित उपयोग और रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए समितियों का गठन किया है. रॉनी और जरीना कहते हैं, ''पानी और स्वच्छता के मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं और हमने दोनों को एक साथ लागू किया है.''

उनके काम ने 20 या अधिक छात्रों वाले 156 स्कूलों में पानी और शौचालय का प्रबंध करके 47,000 छात्रों की पीने के पानी और शौचालय तक पहुंच सुनिश्चित कराई है. इसकी बदौलत विद्यार्थियों के लिए बीमारियों के मामले घटे हैं, स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ देने वाली लड़कियों की संख्या में कमी आई है, और महिलाओं तथा बुजुर्गों की निजता और सुरक्षा बढ़ी है.

स्वदेस की सबसे बड़ी ताकत, इसके हजारों स्वयंसेवकों में निहित है.

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