करतापुरः आस्था के रंग

भारत के सिख तीर्थयात्रियों के लिए 9 नवंबर को करतारपुर गलियारे का खुलना जज्बाती लम्हा था. क्या यह दोनों देशों के बीच नदारद विश्वास और अच्छे पड़ोसियों के रिश्तों को भी बहाल करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है?

सभी फोटोः बंदीप सिंह
aajtak.in
  • करतारपुर,
  • 20 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 2:44 PM IST

फोटो फीचरः बंदीप सिंह

जगमगाती शाम

गुरुद्वारा दरबार साहिब, जहां गुरु नानक ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताए थे, को जोडऩे वाले 4.5 किलोमीटर लंबे गलियारे का हाल में उद्घाटन हुआ. यह गलियारा पाकिस्तान सीमा पर बसे नरोवाल कस्बे और भारत में डेरा बाबा नानक के बीच बना है. पाकिस्तान सरकार की ओर से नया रूप देकर बहाल करने के बाद इसे भारतीय श्रद्धालुओं के लिए खोला गया है. उस शाम गुरुद्वारे के गुंबद पर पड़ती सूर्य की किरणों से उभरती आभा ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में बेहतरी की नई उम्मीद जगाई

उम्मीद का दरीचा 

एक बुजुर्ग भारतीय श्रद्धालु करतारपुर गुरुद्वारा परिसर के प्रवेश मार्ग में विश्राम करते हुए. उनके पीछे कांच की खिड़की में गुरुद्वारे का अक्स. भारतीय सिख अरदास करते हुए पाकिस्तान के इस गुरुद्वारे की झलक पाने की कामना करते हैं

जनसैलाब

गलियारा खुलने के पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं का हुजूम गुरुद्वारा परिसर में उमड़ पड़ा. इस गलियारे के खुलने से सफर का वक्त कई घंटे कम हो गया है और वीजा की जरूरत खत्म हो गई है

अमन की बात

गुरुद्वारे के भीतर प्रार्थना करते श्रद्धालु. 

करतारपुर गलियारे के उद्घाटन समारोह में सिख श्रद्धालुओं को संबोधित करते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान. उन्होंने इस मौके पर सिख धर्म के पांच प्रतीकों में से एक कृपाण के शिल्प का अनावरण भी किया

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