प्रधान संपादक की कलम से

सिकुड़ती अर्थव्यवस्था, देशव्यापी स्वास्थ्य संकट और सीमा पर टकराव गंभीर है. सर्वेक्षण के मुताबिक, देश प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा करता है लेकिन उनके आगे महती चुनौती है.

7 फरवरी, 2018 का आवरण
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 11:07 PM IST

आजाद भारत में ऐसा वक्त मुश्किल से ही ढूंढे मिलेगा, जब थोड़े ही समय में इतनी सारी चुनौतियां एक साथ आ धमकी हों—महामारी, लॉकडाउन, करोड़ों प्रवासी मजदूरों का शहरों से पलायन, आर्थिक मंदी और सीमा पर सैन्य टकराव. यही मौजूदा हालात हमारे छमाही इंडिया टुडे-कार्वी इनसाइट्स देश का मिजाज जनमत सर्वेक्षण को बेहद महत्वपूर्ण बना देता है.

लेकिन देश कभी भी चौंकाने-से नहीं चूकता और, वाकई, लॉकडाउन के बाद हमारे पहले देश का मिजाज सर्वेक्षण से कई हैरतनाक नतीजे निकले हैं. देश में अनेक संकटों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता आकाश चूम रही है. उनकी लोकप्रियता 78 फीसद पर अब तक के सबसे ऊंचे मुकाम पर है, जो इसके पहले जनवरी 2017 के सर्वाधिक 69 फीसद से बेहतर है.

हम इस विचित्र घटनाक्रम से इस साल जनवरी में अपने पिछले देश का मिजाज सर्वेक्षण से वाकिफ हुए. प्रधानमंत्री मोदी पर उनकी सरकार की किसी भी अनुमानित नाकामी से आंच आती नहीं दिखती. उस वक्त भी रोजगार और अर्थव्यवस्था की खस्ताहाली के साथ-साथ सरकार केकामकाज को लेकर काफी बेचैनी थी, मगर मोदी की लोकप्रियता ऊंचे ही चढ़ रही थी, 68 फीसद अंकों के साथ पिछले साल के अगस्त से महज तीन फीसद अंक कम.

यह जारी है और उनकी लोकप्रियता से कामकाज के दूर के रिश्ते का खुलासा भला कोविड-19 महामारी में उनकी सरकार के रवैए से बेहतर और क्या हो सकता है. हमारे सर्वेक्षण में 70 फीसद लोगों ने इसे देश में सबसे बड़ी समस्या माना और 25 फीसद का मानना है कि कोविड-19 के प्रति सरकार का रवैया उसकी सबसे बड़ी नाकामी है. फिर भी 77 फीसद लोग महामारी के प्रति मोदी के रवैए को अच्छा या बेहतरीन मानते हैं.

उन्हें 66 फीसद लोग अगले प्रधानमंत्री के लिए बेहतरीन पसंद मानते हैं. दरअसल, हमारे सर्वेक्षण में 44 फीसद लोग उन्हें अब तक का बेहतरीन प्रधानमंत्री मानते हैं. यह हमारे देश का मिजाज सर्वेक्षण में किसी प्रधानमंत्री को हासिल सर्वाधिक अंक है और जनवरी 2019 के सर्वेक्षण से 29 फीसद अंक अधिक है. उन पर वाकई ऐसा मुलम्मा चढ़ा हुआ है कि कुछ भी नकारात्मक उनसे नहीं चिपकता.

लिहाजा, 2016 में उनकी नोटबंदी से भले बड़े पैमाने पर मुसीबतें आईं, मगर उससे चार महीने बाद ही हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा की भारी जीत नहीं रुक पाई. उनकी भाषण-शैली और करिश्मे का कोई जवाब नहीं है. सबसे बढ़कर उनकी लोकप्रियता बड़े करीने से बनाई गई ऐसे जन-हितैषी नेता की छवि से कायम रहती है, जो आम आदमी की दशा सुधारने में शिद्दत से जुटा है.

सर्वेक्षण से पता चलता है कि उनकी गरीब-समर्थक और ग्रामीण-समर्थक पहल का भारी असर है. मौजूदा राजनैतिक परिदृश्य में ‘महज इकलौते मोदी’ का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है और विपक्ष बिखरा-बिखरा-सा है.

हमारे सर्वेक्षण में 16 फीसद लोग अनुच्छेद 370 को बेमानी बनाने को सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि की तरह देखते हैं, जो जनवरी 2020 के मुकाबले हल्का-सा 4 फीसद अंक घटा है. हालांकि अयोध्या में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उनकी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि मानने वालों की तादाद चार फीसद अंक बढ़कर जनवरी 2020 के 9 फीसद से 13 फीसद पर पहुंच गई है.

हमारे सर्वेक्षण में मोदी के इस आभामंडल से सबसे अधिक फायदा एनडीए को है. इस गठजोड़ को जनवरी 2020 में 303 सीटें और 41 फीसद वोट के अनुमान के मुकाबले अब 316 सीटों और 42 फीसद वोट का अनुमान है. भाजपा की सीटों की संख्या जनवरी 2020 के 271 से बढ़कर 283 के अनुमान पर पहुंच गई है लेकिन दोनों सर्वेक्षणों में उसकी वोट हिस्सेदारी एक समान 36 फीसद ही बनी हुई है.

उधर, विपक्ष की दिशाहीनता कायम है. यूपीए जनवरी 2020 में 108 सीटों और 29 फीसद वोट हिस्सेदारी के अनुमान से अब 93 सीटों और 27 फीसद वोट हिस्सेदारी पर पहुंच गई है. कांग्रेस पिछले सर्वेक्षण में 60 सीटों के अनुमान से घटकर 49 सीटों पर आ गई है, जबकि उसकी वोट हिस्सेदारी एक फीसद अंक घटकर 19 फीसद हो गई है. 47 फीसद का मानना है कि पार्टी गर्त की ओर जा रही है. फिर भी, 44 फीसद लोग बतौर विपक्ष कांग्रेस की भूमिका को अच्छा या बेहतरीन बताते हैं. आश्चर्यजनक रूप से 23 फीसद की राय में राहुल गांधी ही कांग्रेस में जान फूंक सकते हैं.

सीमा पर टकराव के मामले में चीन पर आर्थिक पाबंदियां थोपने के सरकार के कदम को सर्वेक्षण में भारी समर्थन मिला. करीब 90 फीसद ने चीन के उत्पादों के बॉयकाट के पक्ष में राय दी, 67 फीसद चीन में न बने सामान खरीदने के लिए अधिक पैसे देने को तैयार हैं और 91 फीसद का सोचना है कि चीन के आक्रामक रुख के जवाब में चीन के ऐप पर पाबंदी और चीन की कंपनियों को ठेका देने से इनकार करना सही कदम है. करीब दो-तिहाई या 69 फीसद का मानना है कि मोदी सरकार ने चीन को करारा जवाब दिया.

हालांकि प्रधानमंत्री को भरपूर समर्थन से सरकार को चैन से नहीं बैठ जाना चाहिए. चेतावनियों के संकेत भी हैं. एनडीए सरकार की अर्थव्यवस्था के मामले में रेटिंग अगस्त 2019 के 60 फीसद से घटकर 43 फीसद पर आ गई है. 33 फीसद का मानना है कि सरकारी नीतियां बड़े कॉर्पोरेट के फायदे में हैं और 63 फीसद की आमदनी काफी घट गई है. सबसे अहम तो यह है कि मोदी के भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार की धारणा में गिरावट आई है—सिर्फ 9 फीसद ही उनकी यह उपलब्धि मानते हैं, जो छह महीने पहले से 8 फीसद अंक कम है.

इस बीच देश कुछ गंभीर समस्याओं की जद में है. सिकुड़ती अर्थव्यवस्था, देशव्यापी स्वास्थ्य संकट और सीमा पर टकराव गंभीर है. सर्वेक्षण के मुताबिक, देश प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा करता है लेकिन उनके आगे महती चुनौती है. अगर वे इन मसलों का सफलतापूर्वक हल निकालने में नाकाम रहते हैं तो उनसे मोहभंग हो सकता है. वह न तो देशहित में, न ही उनके हक में होगा.

Read more!

RECOMMENDED