मोहक मुहर मुस्कान की

फिल्म इंडस्ट्री में ढाई दशक बिताने के बावजूद काजोल अब भी अपनी फिल्मों में उसी तरह का बालसुलभ चुलबुलापन घोलती हैं. उनकी खिलखिलाहट अब भी लाजवाब.

फोटोः यासिर इकबाल
सुहानी सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 7:02 PM IST

फिल्म इंडस्ट्री में 25 साल बिताने के बाद आखिरकार आपने तान्हाजी के रूप में पहली पीरियड फिल्म कर ही डाली. पर वह एक पसंदीदा ऐतिहासिक किरदार कौन-सा है, जिसे आप करना चाहतीं?

मैं क्लियोपेट्रा करना चाहती. कमाल का किरदार थी. एलिजाबेथ टेलर ने (1963 में बनी फिल्म में) निभाया भी बड़ी खूरसूरती से. किरदारों के बारे में आप जितना पढ़ते हैं, उतना ही आपको लगने लगता है कि हम इसके साथ न्याय नहीं कर पाएंगे क्योंकि उनमें इतनी तो परतें हैं और इतने डीटेल्स.

तो क्या आपका यह मानना है कि फिल्म जिस पुस्तक के आधार पर बनती है, उसके साथ पूरा न्याय कभी संभव नहीं?

अगर आप कोई किताब पढ़ें और फिर उस पर बनी फिल्म देखें तो हमेशा आपको थोड़ी निराशा ही होगी. गेम ऑफ थ्रोन्स मैंने किताबों में पढ़ा है, इस पर बनी सीरीज नहीं देखी. यकीन नहीं होता कि द फाउंटेनहेड बनाने के लिए भी आजमाइश हुई. कोशिश भी मत कीजिएगा, उस हद तक मत जाइए.

अगली फिल्म में आपको निर्देशित करने वालीं रेणुका शहाणे का कहना है कि सिनेमा में आपका ढंग से इस्तेमाल हो नहीं पाया.

त्रिभंग अभी-अभी पूरी हुई है. उसमें काम करके बहुत मजा आया. बेशक, मैंने बहुत कम फिल्में की हैं. मैं बहुत आलसी हूं. पर मैं यह भी नहीं मानती कि समय गंवा दिया या मौके चूक गई.

दोनों फिल्मों के निर्माता आपके पतिदेव (अजय देवगन) हैं. उनके साथ काम करने का आपको क्या फायदा होता है?

मैंने उनसे कहा था कि तान्हाजी में आप मुझे इसलिए लेना चाहते हैं कि पैसे न देने पड़ें और आपको मुफ्त में एक ऐक्टर मिल जाए. वे बोले कि यह किरदार मैं ही कर सकती हूं. मैंने स्क्रिप्ट सुनी. उन्हें पता है, मैं मुफ्त में कुछ भी नहीं करती.

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