‘‘विद्यार्थियों को शोध में अपना हुनर दिखाने का मौका मिलना चाहिए

हमने अपने छात्रों के लिए कुछ नया देने के लिए दो नए विभाग—मटीरियल साइंस डिपार्टमेंट और डिजाइन डिपार्टमेंट—शुरू किए हैं. साथ ही सेंटर फॉर ऑटोमोबाइल रिसर्च और सेंटर फॉर साइबर-फिजिकल सिस्टम्स भी स्थापित किए गए हैं.

वी. रामगोपाल राव निदेशक, आइआइटी दिल्ली
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 10:13 PM IST

वी. रामगोपाल राव, निदेशक, आइआइटी दिल्ली

इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग और इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के फेलो वी. रामगोपाल राव आइआइटी दिल्ली के डायरेक्टर हैं. उनकी निगरानी में पिछले कुछ वर्षों में किए गए कार्यों से संस्थान आज शीर्ष पर है.

आइआइटी दिल्ली के डायरेक्टर के रूप में नियुक्ति से पहले राव आइआइटी बॉम्बे में नैनो टेक्नोलॉजी में पी.के. केलकर चेयर प्रोफेसर रहे हैं और देश के प्रमुख संस्थानों के पाठ्यक्रम को समय की जरूरतों के अनुरूप बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाई है. वे बता रहे हैं कि आइआइटी दिल्ली अपनी स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए आखिर क्यों इतना प्रसिद्ध है.

आइआइटी दिल्ली के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम्स में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पिछले तीन साल में क्या बदलाव किए गए हैं?

हमने अपने पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम्स में उच्च गुणवत्ता वाले शोध को जोड़ा है, और एक शोध सुविधा के निर्माण में निवेश किया है. पिछले तीन साल में, हमने कुछ नए प्रोग्राम्स भी शुरू किए हैं जो उद्योग से वित्त पोषित हैं. आइआइटी दिल्ली में पोस्ट ग्रेजुएट एजुकेशन का एक सिद्धांत यह है कि विद्यार्थियों को अपने शोध कौशल का प्रदर्शन करने के लिए अवसर मिलना चाहिए—इसलिए इसमें उद्योग से स्पॉन्शरशिप लाई गई है.

यह विद्यार्थियों को उद्योग की आवश्यकताओं को समझने और व्यवहारिक प्रशिक्षण हासिल करने में मदद देता है. दो प्रकार के विद्यार्थी हैं जो पोस्ट ग्रेजुएट अध्ययन के लिए दिल्ली आते हैं—पहले वे जो अपनी मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद नौकरी में जाना चाहते हैं, और दूसरे वे जो अपने एम.टेक. के बाद पीएचडी करना चाहते हैं. मास्टर्स के बाद नौकरी पाने के इच्छुक लोगों के लिए, उद्योगों के साथ हमारा यह गठजोड़ बहुत मददगार होता है. साथ ही, दोनों श्रेणियों के छात्रों को वास्तविक दुनिया की समस्याओं से भी परिचित होने के अवसर मिलते हैं.

पिछले तीन वर्षों में, हमने अपने छात्रों के लिए कुछ नया देने के लिए दो नए विभाग—मटीरियल साइंस डिपार्टमेंट और डिजाइन डिपार्टमेंट—शुरू किए हैं. साथ ही सेंटर फॉर ऑटोमोबाइल रिसर्च और सेंटर फॉर साइबर-फिजिकल सिस्टम्स भी स्थापित किए गए हैं. इसके अलावा दो नए स्कूल—स्कूल ऑफ इंटरडिसिप्लनरी रिसर्च और स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी की भी शुरुआत की गई है. इस साल, हमने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का एक स्कूल शुरू करने की भी योजना बनाई है.

● निकट भविष्य के लिए आइआइटी-दिल्ली में कोई नई पहल की योजना है?

पोस्ट ग्रेजुएट एजुकेशन का भारतीय मॉडल अमेरिका के मॉडल से बहुत अलग है. अमेरिकी विश्वविद्यालयों में, विद्यार्थियों को पीएचडी करने के लिए मास्टर्स डिग्री की जरूरत नहीं होती है; वे अपना बी.टेक पूरा करने के बाद पीएचडी प्रोग्राम्स में आवेदन कर सकते हैं. भारत में जो छात्र मास्टर्स डिग्री करते हैं, उन्हें आमतौर पर उसके बाद नौकरी की तलाश रहती है; उनकी शिक्षा को उद्योग की जरूरतों के साथ जोड़ा जाना चाहिए. इस बात ध्यान में रखते हुए कि हम आइआइटी दिल्ली के अपने सभी मास्टर प्रोग्राम्स की समीक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके. हमने यह प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है.

आगे बढ़ते हुए, साइबर सिक्योरिटी में एक एम.टेक और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस में एक एम.टेक की भी पेशकश की जाएगी; हमें इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है. इसलिए, कुल मिलाकर, हमारे मास्टर्स प्रोग्राम्स और कोर्स में एक बड़ा बदलाव हो रहा है.

इसके अलावा, हमारे एम.टेक छात्र फीस नहीं देते हैं और उन्हें 12,000 रुपये का मासिक वजीफा भी दिया जाता है. हम अब एम.टेक प्रोग्राम्स को संस्थान के लिए लागत-रहित बनाने की कोशिश कर रहे हैं जिसका अर्थ है कि हमारे छात्रों को उद्योग भी स्पॉन्सर करेगा.

● आइआइटी दिल्ली के कुछ सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले पोस्टग्रेजुएट कोर्स कौन से हैं?

कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस और इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के कुछ प्रोग्राम्स बहुत लोकप्रिय हैं. ठ्ठ

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‘‘हमने दो नए डिपार्टमेंट शुरू किए हैं—डिपार्टमेंट ऑफ मटीरियल्स साइंस और डिपार्टमेंट ऑफ डिजाइन’’

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