पहले समस्याओं से निबटें, फिर राम मंदिर के बारे में सोचें: चंपत राय

चंपत राय कहते, "हमारी सोच है कि अयोध्या में मंदिर मुद्दा हल होने के बाद सरकार काशी, मथुरा के संबंध में भी कानून की दिशा में चलेगी."

संतोष कुमार
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  • 07 अक्टूबर 2014,
  • अपडेटेड 3:08 PM IST

अचानक विहिप को एहसास हुआ है कि देश की समस्या पहले है, मंदिर बाद में. इसलिए वह मोदी सरकार के लिए कोई समय सीमा बांधने के पक्ष में नहीं है. इंडिया टुडे के प्रमुख संवाददाता संतोष कुमार ने विहिप के अंतरराष्ट्रीय महासचिव चंपत राय से बातचीत की.विहिप अपनी स्थापना की 50वीं वर्षगांठ मना रही है, इस सफर को आप कैसे देखते हैं? 50 साल की विहिप की यात्रा हिंदू समाज के लिए गौरव प्रदान करने वाली है. हम हिंदू हैं, इस भाव का विकास देश में हुआ है. राम जन्मभूमि, रामसेतु, इसके कारण अपने सांस्कृतिक चिन्हों की रक्षा करने की प्रवृत्ति जगी है.  विहिप और संघ परिवार हमेशा मंदिर, समान नागरिक संहिता, अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर मुखर रहा है, मोदी सरकार से कितनी उम्मीद है? सरकार समस्याओं का समाधान तभी करती है जब जनता की अग्नि ठीक से प्रज्ज्वलित होती है. फिर सरकार कोई भी हो, इस काम को करेगी. क्या आपको लगता है कि सरकार विकास के एजेंडे से हटकर इन मुद्दों को छुएगी?  ये सारे विकास के एजेंडे हैं.  प्रधानमंत्री बार-बार कह रहे हैं कि हमारा व्यवहार, हमारा कानून प्रत्येक  व्यक्ति के लिए होना चाहिए. वे हमेशा 125 करोड़ भारतीयों की बात कर रहे हैं. यह समान नागरिक संहिता की दिशा में कदम है. ये सारे हमारे उठाए मुद्दे हैं. उनका व्यवहार अब तक की सरकारों से बिल्कुल अलग है. वाजपेयी सरकार के समय कहां कसर रह गई? वह बैसाखी पर चलने वाली सरकार थी, अब ये सरकार बैसाखी पर नहीं है. लेकिन देश अन्य समस्याओं से गंभीरता से घिरा है, उन समस्याओं से बाहर निकालना भी राज्य की प्राथमिकता है. बीती ताहि बिसार दे.विहिप इंतजार करेगी या क्या कोई समय सीमा तय करेगी? समय सीमा की आवश्यकता नहीं है. 50 साल के सफर को मंदिर से मत जोड़ें. 50 साल पहले हम चले लेकिन मंदिर का मुद्दा लिया 1984 में.  अयोध्या की जनता 500 साल से इस मुद्दे के लिए लड़ रही है. हिंदू समाज के सम्मान की रक्षा के लिए 500 साल इंतजार किया है, करेंगे. राम मंदिर का मामला, लेकिन काशी, मथुरा भी आपके एजेंडे में है? हमारी सोच है कि अयोध्या मुद्दा हल होने के बाद सरकार काशी-मथुरा, दोनों स्थानों के संबंध में कानून की दिशा में चलेगी. हिंदू समाज की आस्था  समावेशी विचारों की है, ऐसे में स्वरूपानंद पर क्या राय है?  हमारा स्पष्ट विचार है. सबको उपासना का स्वातंत्र्य है. सब अपनी श्रद्धा के अनुसार गुरु और देवता चुन सकते हैं. हम किसी की श्रद्धा के केंद्र को तोडऩे में विश्वास नहीं करते, यही हिंदुत्व है.  आपने कहा है कि देश के सामने समस्याएं हैं पहले उससे निबटें, फिर विहिप के मुद्दे कब हल होंगे? देश बचेगा तो हम बचेंगे. देश बचेगा तो राम जन्मभूमि, राम सेतु, गाय सब बचेंगे. देश बचेगा तो कानून भी ठीक होगा. और अगर देश ही नहीं बचा, किसान आत्महत्या ही करता रहे, नौजवान भूखा-बेरोजगार घूमकर विदेशियों की नौकरी करता रहा, इतनी महंगाई हो जाए कि लोगों को रोटी भी न मिले तो मतलब साफ है-भूखे भजन न होय गोपाला.  तो आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं. मोदी सरकार पहले समस्या सुलझाए और फिर मंदिर पर काम करे? बिल्कुल. इनके कारण समाज समस्याओं से बाहर निकल गया तो दुनिया में हिंदुस्तान का गौरव बढ़ेगा. हिंदुस्तान का गौरव बढ़ा तो हिंदू का भी गौरव बढ़ेगा.

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