जब मां की मौत के बाद डिप्रेशन में चली गई थीं दिव्या, सुनाया दर्द भरा अनुभव

दिव्या दत्ता ने अपनी मां के बारे में बताया कि वह 35 साल की उम्र में विधवा हो गई थीं. उन्होंने हमें (मुझे और मेरे भाई को) एक सिंगल मदर के तौर पर बड़ा किया था. उन्होंने दोबारा कभी अपनी जिंदगी के बारे में नहीं सोचा और हमारे इर्द-गिर्द ही अपनी दुनिया बुन ली.

दिव्या दत्ता
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 14 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

फिल्म शीर कोरमा का पहला पोस्टर हाल ही में रिलीज कर दिया गया है. फिल्म की कहानी दो मुस्लिम लड़कियों के समलैंगिक रिश्तों पर आधारित है. फिल्म में दिव्या दत्ता और स्वरा भास्कर लीड रोल प्ले करते नजर आएंगी. फिल्म का पहला पोस्टर रिलीज किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसका खूब विरोध हुआ है और कयास लगाए जा रहे हैं कि इस फिल्म की रिलीज के रास्ते में बहुत सी दिक्कतें आ सकती हैं.

इसी बीच फिल्म की लीड एक्ट्रेस दिव्या दत्ता ने एक इंटरव्यू में अपनी जिंदगी के उस दौर की बातें शेयर की हैं जब वह भारी डिप्रेशन में चली गई थीं. मुंबई मिरर से बातचीत में दिव्या ने बताया, "मेरा डिप्रेशन एक बहुत ही अलग वजह से था. ये तब हुआ जब मेरी मां गुजर गई थीं. वह मेरे लिए सब कुछ थीं. मेरी निजी या प्रोफेशनल जिंदगी में कुछ भी गड़बड़ होती थी तो वो हमेशा मेरी दिक्कतों का हल होती थीं."

"वह 35 साल की उम्र में विधवा हो गई थीं और उन्होंने हमें (मुझे और मेरे भाई को) एक सिंगल मदर के तौर पर बड़ा किया था. उन्होंने दोबारा कभी अपनी जिंदगी के बारे में नहीं सोचा और हमारे इर्द-गिर्द ही अपनी दुनिया बुन ली. वो कहती थीं, "बेटा तुम एक रिजेक्शन से परेशान क्यों हो रही हो? तुमने अभी पूरी जिंदगी नहीं गुजारी है." जब वो गुजर गईं तो मुझे नहीं पता था कि जिंदगी का सामना किस तरह करना है."

दिव्या ने बताया कि उन्होंने बहुत ज्यादा काम करना शुरू कर दिया. इतना ज्यादा कि वह घर भी नहीं लौटा करती थीं. हालांकि इससे दिक्कत और बढ़ गई क्योंकि मैं अपनी भावनात्मक दिक्कतों का हल नहीं कर पा रही थी. मुझे पैनिक अटैक आने लगे, घबराहट होने लगी और दवाइयां लेनी शुरू कर दीं. मेरा दवाइयों का डिब्बा बड़ा होता जा रहा था और मैंने सोचा कि ये मैं कर क्या रही हूं.

कैसे मिली मदद?

इसके बाद अंततः मैंने योग और ध्यान की मदद लेनी शुरू की. आध्यात्म ने मेरी मदद की. मेरे भाई ने और उसके परिवार ने मेरी मदद की. मेरी छोटी सी पेट सखी और मेरे तमाम दोस्त मेरी मदद के लिए आगे आए. मुझे लगा कि अब मैं ठीक हो गईं हूं लेकिन हां वो खालीपन हमेशा वहां मौजूद था.

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