पाकिस्तान का स्टिंग ऑपरेशनः भारतीय हमले पर 'बालाकोट' की गवाही!

Pakistan Balakot sting operation इस स्टिंग के दौरान आजतक की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने खैबर पख्तून ख्वा में बालाकोट के आम लोगों के साथ पीओके के अधिकारियों और पुलिस अफसरों से भी बात की.

भारत के सर्वश्रेष्ठ समाचार चैनल आजतक ने पाकिस्तान का स्टिंग ऑपरेशन किया है
परवेज़ सागर
  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 12:25 PM IST

वारदात के वीडियों में आप कुछ आवाज़ सुनेंगे. ये आवाज़ सरहद के उस पार की हैं. यानी पाकिस्तान की. बालाकोट और पाक अधिकृत कश्मीर में रहने वाले आम पाकिस्तानी और पुलिस अफसरों की आवाज़. आप सुनेंगे 26 फरवरी के उस हमले का पूरा सच, जिसे पाकिस्तान आज तक लगातार झुठलाता रहा है. पाकिस्तान की ये अपनी आवाज़ आपको बताएगी कि भारतीय वायु सेना के मिग-21 फाइटर ने पाकिस्तानी सीमा में घुस कर क्या कहर बरपाया था. ये है पाकिस्तान का स्टिंग ऑपरेशन.

पाकिस्तान अब तक यही कहता आ रहा है कि पुलवामा हमले का बदला हमने सिर्फ जंगलों और पहाड़ों पर बम बरसा कर लिया है. वो ये भी यही कहता आ रहा है कि उसका एफ-16 फाइटर भी तबाह नहीं हुआ. मगर आज पाकिस्तान के अंदर से ही आई कुछ अलग-अलग आवाज हम जो सुनाने जा रहे हैं, वो आवाज़ पाकिस्तान को चुभेगी भी और शर्मिंदा भी करेगी. क्योंकि ये आवाज हमले का सच बताने जा रही हैं. हमारी एसआईटी टीम ने जब बालाकोट के स्थानीय नागरिकों और पुलिस अफसरों से बात की तो पता चला कि भारतीय वायुसेना के हमले में वहां भारी नुकसान हुआ. पाक आर्मी के कई जवान मारे गए.

ये नमूना भर है. उस सबूत का जिसे हासिल करने के लिए हमने हिंदुस्तान में ही बैठ कर पाकिस्तान के कुछ लोगों का स्टिंग ऑपरेशन किया. ताकि ये पता लगा सकें कि आखिर पुलवामा हमले का बदला लेने के लिए हमारे मिग-21 फाइटर ने जो बम बरसाए थे, वो कहां गिरे और उससे कितना नुकसान हुआ. इस स्टिंग के दौरान आजतक की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने खैबर पख्तून ख्वा में बालाकोट के आम लोगों के साथ पीओके के अधिकारियों और पुलिस अफसरों से भी बात की.

तो सबसे पहले सुनिए मोहम्मद नईम की जुबानी भारतीय वायु सेना के हमले की कहानी. नईम बालाकोट की एक मस्जिद में काम करते हैं. जब हमने उन्हें फोन किया तो उन्होंने खुद अपनी पहचान और लोकेशन बताई.

रिपोर्टर- अस्सलाम वालेकुम

मो. नईम- वालेकुल अस्सलाम. मैं सेहरी की नूर मस्जिद से बोल रहा हूं.

रिपोर्टर- क्या ये मस्जिद जबरा (बालाकोट) के आसपास है.

मो. नईम- जी?

रिपोर्टर- ये ख़ैबर पख्तून में जबरा के आसपास है क्या ये मस्जिद?

मो. नईम- जी.. जी.

नईम जिस जगह रहता है, वो बालाकोट के जाबा गांव के बेहद नज़दीक है. जहां 26 फरवरी की उस रात आतंकी कैंपों पर इंडियन एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने हमला किया. ज़ाहिर है हमने नईम से उस एयरस्ट्राइक में हुई तबाही और मौतों के बारे में सवाल किए. जिसे सुनते ही नईम ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया. खुलासा ये था कि भारतीय हमले में आतंकियों के साथ-साथ पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए हैं.

रिपोर्टर- कितने लोग शहीद हुए होंगे हिंदुस्तानी हमले में?

मो. नईम- मैंने देखा है 4-5 आदमी शहीद हुए पाकिस्तान आर्मी के.

रिपोर्टर- पाकिस्तान आर्मी?

मो. नईम- जी.. आर्मी के थे. वहां के रिहायशी थे.

रिपोर्टर- पाकिस्तान आर्मी के लोग शहीद हुए हैं?

मो. नईम- जी आर्मी के भी हुए हैं.

रिपोर्टर- ये बात सही है कि ये लोग हलाक हुए हैं?

मो. नईम- जी.. जी

नईम ना सिर्फ जाबा टेरर कैंप पर हुए भारतीय हवाई हमले की गवाही दे रहा है, बल्कि इस हमले में पाकिस्तानी आर्मी के सैनिकों के भी मारे जाने की पुष्टि कर रहा है. जो ये बताने के लिए काफी है कि इन आतंकियों को ना सिर्फ पाकिस्तान की शह मिली हुई है बल्कि ये उनकी हिफाजत में भी लगे रहते हैं.

आजतक की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम यहीं नहीं रुकी. इसके बाद हमने बालाकोट के इर्द गिर्द के दूसरे गांवों को भी खंगाला और हमारी बात हुई मस्जिद में बतौर मौलवी काम करने वाले रहमान से. जिन्होंने उस रात क़यामत के मंज़र को अपनी आंखों से देखा था.

रिपोर्टर- जी क्या हुआ था?

रहमान- एक मकान है जो डैमेज हुए है.

रिपोर्टर- आप वहीं थे जब जाबा में हमला हुआ है?

रहमान- जी बिलकुल. सुबह तीन बजे का वक्त था. धमाके से इतनी ज़ोरदार आवाज़ हुई कि लोग अपने घरों से बाहर निकल आए थे. एक क़यामत का मंज़र था.

जो पाकिस्तान इंडियन एयरफोर्स के हमले को नकार रही थी. उसी के अपने लोग इसकी तस्दीक कर रहे हैं.

ज़ोरदार धमाका हुआ. कई इमारतें ढह गईं. आर्मी के लोग भी मारे गए. खुलासा अभी बाकी था. अब हमने रुख किया पीओके यानी पाकिस्तानी कब्ज़े वाले कश्मीर का. क्योंकि यहां भी भारतीय वायुसेना ने आतंकी कैंपों पर हमला किया था. और यहीं से पाकिस्तानी एफ-16 ने भारतीय सीमा में दाखिल होने की जुर्रत की थी. मगर जब भारत ने सबूत पेश किए तो पाकिस्तान ने एफ-16 उड़ाने की बात से ही इनकार कर दिया. मगर भारतीय सैन्य अधिकारियों ने एफ16 के पुर्ज़े सामने रखकर पाकिस्तान का झूठ बेनकाब कर दिया.

मगर हमले का आधिकारिक सच तब सामने आया जब हमने पीओके के भिंबर में एक लोकल पुलिस थाने में पाकिस्तानी इंटेलिजेंस अधिकारी बनकर फोन किया. जिस अधिकारी ने हमारा फोन उठाया उसने बताया कि उसे पाकिस्तानी आर्मी के ऑर्डर थे कि एफ-16 विमान के क्रैश होने की कोई भी भनक किसी को नहीं लगनी चाहिए.

अधिकारी- कैप्टन साहब मेरी रिक्वेस्ट ये है कि आप जिस नंबर से बात कर रहे हैं वो नंबर नहीं आया.

रिपोर्टर- अरे क्योंकि ये हेडक्वॉर्टर का नंबर है. मैं इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट से बोल रहा हूं.

अधिकारी- सर मुझे ये हिदायत दी गई है कि कोई भी जानकारी नहीं देनी है.

रिपोर्टर- अच्छा ये बताई.. आपको ये हिदायत किसने दी?

अधिकारी- आर्मी के अधिकारियों से हमारी बैठक हुई है. उसमें ये फैसला हुआ है कि कोई लूज़ बात नहीं करनी है किसी के साथ.

अमेरिका की नाराज़गी मोल लेने के डर से पाकिस्तान ने एफ-16 विमान को लेकर तमाम जानकारी बेहद खुफिया रख रखी है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एफ-16 विमान के लिए हुए समझौते के मुताबिक पाकिस्तान इन विमानों का इस्तेमाल सिर्फ आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए ही कर सकता है. मगर बालाकोट हमले के बाद उसने इन्हें भारतीय विमानों के खिलाफ तैनात कर दिया था.

हालांकि हमारी बातचीत में भिंबर पुलिस अधिकारी ने एफ-16 विमान के मलबा मिलने की बात से इंकार नहीं किया. बल्कि उसने उस आदेश का पालन किया. जो उसे पाकिस्तानी सेना की तरफ से उसे मिले थे. यानी उस साइट पर पहरा देना जहां भारतीय वायुसेना ने एफ-16 जेट मार गिराया था.

रिपोर्टर- हैलो

अधिकारी- हैलो

रिपोर्टर- कैप्टन हनीफ बोल रहा हूं. आप एक काम कीजिए जहां पर पाकिस्तान का हवाई जहाज़ क्रैश हुआ है. वहां पर आप जाइये और वहां पर जाकर पूरे एरिये को आप देखिए कि वहां कोई भी पत्रकार ना पहुंच पाए.

अधिकारी- ओके

रिपोर्टर- जहां पाकिस्तान का हवाई जहाज़ क्रैश हुआ है. मैं वहां की बात कर रहा हूं. किसी को भी ख़बर ना लगे कि हमारा हवाई जहाज़ क्रैश हुआ है.

अधिकारी- ओके जी ओके.

तमाम एहतियात के बावजूद भिंबर पुलिस थाने के अधिकारी ने आखिर मान ही लिया कि पीओके में पाकिस्तानी एफ-16 क्रैश हुआ है और उन्हें उसकी जानकारी बाहर आने से रोकनी है.

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