मोस्‍ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद की सीनाजोरी

कुछ दिन पहले यानी ईद के रोज जिस हाफिज सईद ने लाल किले पर हमला करने की धमकी दी थी, अब उसी हाफिज ने खुद को पाक-साफ बताकर ऐसी पटली मारी है कि लोग हैरान हो गए हैं. उसका कहना है कि वो आतंकवादी है ही नहीं और वो अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए जहां ज्वाइंट कमिशन के सामने भी पेश हो सकता है.

हाफिज सईद
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली,
  • 16 अगस्त 2013,
  • अपडेटेड 6:55 AM IST

कुछ दिन पहले यानी ईद के रोज जिस हाफिज सईद ने लाल किले पर हमला करने की धमकी दी थी, अब उसी हाफिज ने खुद को पाक-साफ बताकर ऐसी पटली मारी है कि लोग हैरान हो गए हैं. उसका कहना है कि वो आतंकवादी है ही नहीं और वो अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए जहां ज्वाइंट कमिशन के सामने भी पेश हो सकता है.

समझ में नहीं आता है कि दुनिया के सबसे बदनाम और खौफनाक आतंकवादी हाफिज मोहम्मद सईद के इस ताजे बयान पर कोई हंसे या रोए लेकिन दहशत की सियासत शायद ऐसे ही कोरे बयानबाजियों के सहारे सिरे चढ़ती है. तभी तो अपने सिर पर एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम लिए घूमनेवाले इस शख्स ने अब ये नया शिगूफा छोड़ा है.

इंसान और इंसानियत तो शर्मसार करनेवाले इस शख्स ने पाकिस्तानी की आजादी यानी 14 नवंबर के रोज एक पब्लिक मीटिंग के दौरान जो बातें कहीं, उसे सुन कर अब सिर्फ हिंदुस्तानी एजेंसियां, सियासतदान और आवाम ही हैरान नहीं हैं, बल्कि उसकी इस बात ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. हालांकि जाननेवाले जानते हैं कि इस तरह की बयानबाजी का मतलब सिर्फ अपने समर्थकों के दिल में जगह बनाने की कोशिश के अलावा और कुछ भी नहीं है.

आतंकवादी संगठन जमात-उद-दावा की ओर से पाकिस्तान के पंजाब विधानसभा के सामने रखी गई एक रैली में हाफिज सईद ने ये कह कर एक नई बहस की शुरूआत कर दी कि वो ना सिर्फ बेगुनाह और पाक-साफ है, बल्कि अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए वो किसी ऐसे ज्युडिशियल कमिशन के सामने पेश होने के लिए भी तैयार है, जिस ज्युडिशियल कमिशन में हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों मुल्कों के जज शामिल हों. हालांकि समर्थकों को देख कर जोश में आया हाफ़िज सईद इतने पर भी नहीं रुका. उसने यहां तक कहा कि अगर उसके खिलाफ़ कोई सुबूत है, तो हिंदुस्तान उसे आतंकवादी साबित कर दिखाए.

वैसे पाकिस्तान के काम करने के तौर-तरीकों की ख़बर रखनेवाले हाफ़िज सईद की इन लंबी-चौड़ी डींगों से ज्‍यादा हैरान नहीं हैं क्योंकि मुंबई हमला यानी 26-11 के सिलसिले में हिंदुस्तान की तरफ़ से तमाम सुबूत दिए जाने के बावजूद ना सिर्फ़ पाकिस्तान की हाई कोर्ट बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने भी साल 2010 में ही सईद को क्लीन चिट दे रखी है. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुस्तान की ओर मिले तमाम सुबूतों की अनदेखी करते हुए कहा था कि सिर्फ सुनी-सुनाई बातों और कयासबाजियों की बुनियाद पर वो सरकार को सईद के खिलाफ़ किसी भी तरह की कार्रवाई की इजाजत नहीं दे सकती.

जाहिर है, सईद की ये तमाम बातें, वहां की सरकार और अदालत का रुख किसी फिक्स्ड मैच की तरह है और यही वजह है कि अब तक हिंदुस्तान की ओर से सईद की इस नई शिगूफेबाजी पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है.

हिंदुस्तान से खुद को आतंकवादी साबित करने की बात कहनेवाले हाफिज सईद ने अभी कुछ ही रोज़ पहले पांच हिंदुस्तानी फौजियों की जान लेकर अपना असली रंग दिखाया था लेकिन अब उसने इस वारदात में भी अपना हाथ होने की बात कह एक बार फिर से लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की है, जबकि अब तक की तफ्तीश साफ करती है कि पाकिस्तानी फ़ौज ने हाफिज सईद के उकसावे पर ही पिछले 5-6 अगस्त की रात को हिंदुस्तान की सरहद में दाखिल हो कर पांच जवानों की जान ली थी.

पाकिस्तान के पंजाब में जमात-उद-दावा की रैली में हांकी गई तमाम डींगों के अलावा हाफिज सईद ने ये भी कहा कि वो हाल ही में सरहद पर हुई गोलीबारी से पहले लाईन ऑफ कंट्रोल तक नहीं गया था, जबकि जिन वक्‍त उसके एलओसी आने की बात कही जा रही थी, तब वो एक मस्जिद में तकरीर कर रहा था. हालांकि अपनी बेगुनाही की इन तमाम दलीलों के बावजूद वो हिंदुस्तान के अंदरुनी मामलों में टांग अड़ाने से बाज नहीं आया. उसने कहा कि हिंदुस्तान को जम्मू-कश्मीर से फौज हटा लेनी चाहिए.

वैसे सिर्फ इसी महीने में नहीं, इससे पहले भी हाफिज सईद के उकसावे पर ही पाकिस्तान के फौजियों ने दो हिंदुस्तानी जवानों का सिर कलम कर कर दिया था लेकिन सईद ना तो इससे पहले ख़ामोश था और ना ही इसके बाद रुका. बल्कि अब भी वो पूरे पाकिस्तान में घूम-घूम कर हिंदुस्तान के खिलाफ़ आग उगल रहा है और अब खुद को बेगुनाह बतानेवाले हाफिज सईद ने महज चंद रोज़ पहले ही हिंदुस्तान में और खास कर लाल किले पर दोबारा आतंकवादी हमला करने की धमकी दी थी.

हालांकि हाफिज सईद दुनिया और कानून की नजर में कितना बड़ा गुनहगार है ये सिर्फ़ इसी बात से समझा जा सकता है कि दुनिया के तमाम बड़े देशों के साथ-साथ खुद संयुक्त राष्ट्र संघ यानी यूएनओ तक ने उसे आतंकवादी करार दिया है और वो ना सिर्फ़ हिंदुस्तान बल्कि अमेरिका के मोस्ट वांटेड अपराधियों की फेहरिस्त में शामिल है.

हाफिज सईद पाकिस्तानी हुकूमत का वो मोहरा जिसके दिलो-दिमाग में हर वक्‍त अगर कुछ छाया रहता है, तो वो है हिंदुस्तान. फर्क बस इतना है कि उसके दिमाग में हिंदुस्तान के लिए सिर्फ नफरत भरी है और और ज़ुबान में तोहमत. ख़ास बात ये है कि मुंबई हमले का ये सबसे बड़ा गुनहगार हाफिज सईद कभी कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को गले लगाता है, तो कभी पाकिस्तानी फौज को उकसा कर हिंदुस्तान को लहुलूहान करता है लेकिन तमाम अंतरराष्‍ट्रीय दबावों के बावजूद वो पाकिस्तान में ना सिर्फ़ खुलेआम घूमता है, बल्कि कभी जिहाद तो कभी किसी और बहाने से हिंदुस्तान को जख्‍मी करता है.

हिंदुस्तान के खिलाफ़ हाफिज सईद के मन नफ़रत की बेल कोई आज नहीं बढ़ी, बल्कि ये बीज उसके मन में तभी पड़ गया था, जब दोनों मुल्कों का बंटवारा हुआ. बंटवारे से पहले हरियाणा का रहनेवाले उसके परिवार के कई लोग दंगों में मारे गए और इसके बाद से उसने बस एक ही काम चुन लिया और वो था हिंदुस्तान से दुश्मनी. लेकिन दुनिया ने हाफिज सईद का नाम तब पहली बार सुना, जब उसने 1990 में आईएसआई की मदद से जमात-उद-दावा के झंडे तले आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की बुनियाद रखी. इसके बाद सईद के इशारे पर लश्कर ने जम्मू-कश्मीर समेत हिंदुस्तान के कई इलाकों में एक के बाद कई आंतकवादी हमलों को अंजाम दिया और हर हमले के साथ सईद को बदनामी मिलती रही.

13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए हमले में मौलाना मसूद अजहर के साथ जब हाफिज़ सईद का नाम भी सामने आया, तो उसे अपने मकसद में एक और कामयाबी मिली. इसके बाद 11 जुलाई 2006 को मुंबई के ट्रेन धमाके और 26/11 के मुंबई हमलों के पीछे भी सईद के दिमाग की बात सामने आई, लेकिन भारत उसके खिलाफ़ कार्रवाई की बातें करने के सिवा और कुछ भी नहीं कर सका. हद तो ये रही कि तमाम सुबूतों के बावजूद पाकिस्तानी कोर्ट ने हाफिज सईद को इस मामले में बरी कर दिया.

इसके बाद सईद का हौसला था कि बढ़ता ही गया. इस साल उसने एलओसी पर हिंदुस्तानी जवानों का सिर कलम करवाया और अब उसने पांच फौजियों की जान ले ली लेकिन इतना होने के बावजूद फिलहाल ये कोई नहीं बता सकता कि हिंदुस्तान का मोस्ट वांटेड आतंकवादी आख़िर कब हिंदुस्तान की जद में होगा.

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