चार्टर से मोदी सरकार ने दिये टैक्स पेयर्स को अधिकार, मगर कानूनी हक की मांग बरकरार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में पारदर्शी टैक्स प्रणाली की शुरुआत करते हुए टैक्सपेयर्स चार्टर की सौगात दी है. टैक्सपेयर्स चार्टर को एक बड़ा सुधार बताया जा रहा है. लेकिन जानकारों का मानना है कि बिना कानूनी हक दिये यह चार्टर बहुत प्रभावी साबित नहीं होगा.

मोदी सरकार ने टैक्सपेयर्स चार्टर की सुविधा दी है
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 9:11 AM IST

  • PM मोदी ने टैक्सपेयर्स चार्टर की सौगात दी है
  • इसे देश में बड़ा टैक्स सुधार बताया जा रहा है
  • जानकार कानूनी हक न मिलने पर सवाल उठा रहे हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश में पारदर्शी टैक्स प्रणाली की शुरुआत करते हुए टैक्सपेयर्स को फेसलेस असेसमेंट, फेसलेस अपील और टैक्सपेयर्स चार्टर के तीन सौगात दिए हैं. टैक्सपेयर्स चार्टर को एक बड़ा सुधार बताया जा रहा है. लेकिन जानकारों का मानना है कि बिना कानूनी हक दिये यह चार्टर बहुत प्रभावी साबित नहीं होगा.

क्या है टैक्सपेयर्स चार्टर

सबसे पहले यह जानते हैं कि पीएम ने जो देशवासियों को टैक्सपेयर्स चार्टर की सुविधा दी है, वह क्या है? अगर आसान भाषा में समझें तो ये चार्टर एक तरह का लिस्ट होगा, जिसमें टैक्सपेयर्स के अधिकार और कर्तव्य के अलावा टैक्स अधिकारियों के लिए भी कुछ निर्देश होंगे. इसके जरिए करदाताओं और इनकम टैक्स विभाग के बीच विश्वास बढ़ाने की कोशिश की जाएगी. इस चार्टर में टैक्सपेयर्स की परेशानी कम करने और इनकम टैक्स अफसरों की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था होगी.

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पहले भी आया था ऐसा चार्टर

साल 2010 में मनमोहन सरकार इसी तरह टैक्सपेयर्स के लिए एक सिटीजन चार्टर लेकर आई थी. उसमें यह दिया गया था कि आयकर विभाग और करदाता को क्या करना चाहिए और क्या नहीं. इस चार्टर को 2014 में नए स्वरूप में पेश किया गया था. जानकारों का कहना है कि उस चार्टर की बड़ी बातें अब इस नए चार्टर में भी शामिल की गई हैं.

नए चार्टर में भी कानूनी हक की बात स्पष्ट नहीं

नए चार्टर को लाने के पीछे सरकार का इरादा तो नेक है, लेकिन इसे कानूनी सहारा नहीं दिया गया है. इस चार्टर को लागू करना ही असल प्रभावी बात होगी.

इसमें सिर्फ इस बात की सूची दी गई है कि आयकर विभाग की टैक्सपेयर्स के प्रति क्या दायित्व हैं और विभाग की टैक्सपेयर्स से क्या अपेक्षाएं हैं. लेकिन असल बात इसकी बारीकियों में है. इस चार्टर का कानूनी स्वरूप क्या होगा इसको लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है.

अर्न्स्ट एंड यंग (EY) इंडिया के नेशनल लीडर टैक्स सुधीर कपाडिया का मानना है कि इस चार्टर को इनकम टैक्स एक्ट का हिस्सा बनाया जाएगा, जैसा कि बजट में ऐलान किया गया है. लेकिन इसका कानूनी दर्जा क्या होगा, इसको लेकर वह भी स्पष्ट नहीं हैं.

दूसरी तरफ फेलिक्स एडवाइजरी के फाउंडिंग पार्टनर अमित जिंदल ने कहा कि ऐसा चार्टर कभी भी इनकम टैक्स एक्ट का हिस्सा नहीं रहा. तो यह चार्टर भी कोई अलग नहीं होगा.

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बजट में हुआ था ऐलान

टैक्स एवं रेगुलेटरी सर्विसेज BDO इंडिया के पार्टनर एवं लीडर जिगर सइया का मानना है कि इस चार्टर को एक्ट का हिस्सा बनाया जाएगा. उन्होंने कहा, 'बजट में वित्त मंत्री ने ऐलान किया था कि ऐसा चार्टर लाया जाएगा और फाइनेंस बिल में एक्ट में सुधार कर एक नई धारा 119 A जोड़ी भी गई है.'

BMR लीगल के फाउंडर एवं मैनेजिंग पार्टनर मुकेश भूटानी कहते हैं कि चार्टर में इस बात पर जोर दिया गया है कि टैक्सपेयर्स की निजता और गोपनीयता का सम्मान किया जाएगा. साल 2014 के सीबीडीटी के सिटीजन चार्टर में ऐसे स्पष्ट बयान का अभाव था जिसकी वजह से कारोबारियों को काफी दिक्कतें होती थीं.

(www.businesstoday.in के इनपुट पर आधारित)

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