कंपनी सचिवों के जानकारी साझा न करने की वजह से नाराज सेबी

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंस बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने सूचीबद्ध सूचनाओं को सही तरीके से सार्वजनिक करने के नियमों का अनुपालन नहीं करने के कंपनी सचिवों के रवैये के प्रति निराशा जताई है.

प्रतीकात्मक तस्वीर
विकास जोशी
  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2018,
  • अपडेटेड 4:49 PM IST

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंस बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने सूचीबद्ध सूचनाओं को सही तरीके से सार्वजनिक करने के नियमों का अनुपालन नहीं करने के कंपनी सचिवों के रवैये के प्रति निराशा जताई है.

सेबी प्रमुख अजय त्यागी ने कहा कि कंपनी सचिव की जिम्मेदारी होती है कि वह व्यवहार में कंपनी संबंधी नियम कानून के अनुपालन का ऑड‍िट करे. उन्होंने कहा कि शेयर बाजार कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई करते हैं तो इसका उल्लेख सचिवों को अपनी ऑडिट रिपोर्ट में करना चाहिए. लेकि‍न ऐसा हो नहीं रहा है.

त्यागी ने कहा, 'मुझे यह देखकर निराशा होती है कि अधिकतर कंपनी सचिवों की ऑडिट रिपोर्ट में कंपनी के खिलाफ शेयर बाजारों की प्रतिकूल टिप्पणियों का उल्लेख नहीं होता है.' त्यागी ने यह बात इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही.

वहीं दूसरी तरफ, (सेबी) ने ऋण प्रतिभूतियों को छह दिन के भीतर सूचीबद्ध कराने के प्रस्ताव पर आम लोगों के टिप्पणी करने की समय सीमा 30 मई तक बढ़ा दी है.

पहले इस प्रस्ताव पर अपने सुझाव देने की आखिरी तारीख 14 मई थी. गौरतलब है कि मौजूदा नियम के तहत ऋण प्रतिभूतियों को 12 दिन के भीतर सूचीबद्ध कराना होता है. सेबी ने एक बयान जारी कर कहा कि लोग अब इस मामले में 30 मई तक अपने सुझाव भेज सकते हैं.

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