पीएम ने जिस दिन की सरलता की बात, उसी दिन टैक्स नियमों में सख्ती का प्रस्ताव!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता लाने और इसे सरल बनाने के लिए एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. गुरुवार को ही आयकर विभाग ने एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

टैक्स नियमों में और सख्ती का प्रस्ताव
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 3:38 PM IST

  • पीएम ने गुरुवार को टैक्स का नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया
  • इससे टैक्स सिस्टम सरल और पारदर्शी होने का दावा
  • इसी दिन आयकर विभाग ने सख्ती बढ़ाने वाला प्रस्ताव रखा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता लाने और इसे सरल बनाने के लिए एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. लेकिन इसी दिन आयकर विभाग ने टैक्सपेयर्स की मुश्किलें बढ़ाने वाला एक प्रस्ताव आगे बढ़ाया है.

PM ने की है टैक्सपेयर्स के सहूलियत की बात

पीएम मोदी ने एक फेसलेस स्कीम और सिटीजन चार्टर की सौगात टैक्सपेयर्स को दी है. ​फेसलेस स्कीम के तहत अब किसी टैक्सपेयर्स को नोटिस का जवाब देने के लिए आयकर दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने होंगे और उसके मामले पर सुनवाई देश के किसी भी आयकर दफ्तर में हो सकती है. इससे भ्रष्टाचार कम होने वाले और पादर्शिता बढ़ने की बात कही जा रही है. लेकिन इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार गुरुवार को ही आयकर विभाग ने एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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क्या है आयकर विभाग का प्रस्ताव

टैक्स बेस यानी करदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए आयकर विभाग जानकारी देने लायक वित्तीय लेनदेन की सूची का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है. यानी ऐसे लेनदेन जिनकी जानकारी लोगों को अपने आय​कर रिटर्न के द्वारा आयकर विभाग को फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट (SFT) के तहत देनी होती है.

अब 20,000 रुपये से ऊपर के होटल के भुगतान, 50,000 रुपये से ज्यादा बीमा प्रीमियम और 20,000 से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा, 1 लाख रुपये से ज्यादा सालाना कॉलेज फीस, विदेश यात्रा, घरेलू बिजनेस क्लास एयर ट्रैवल, व्हाइट गुड्स की खरीद, 1 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की ज्वैलरी या पेंटिंग, डीमैट अकाउंट और बैंक लॉकर आदि को फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है.

क्या होगा आयकर विभाग को फायदा

MyGovIndia के द्वारा किये गए एक ट्वीट से बताया गया है कि यह कदम टैक्स बेस बढ़ाने, बेहतर अनुपालन और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रस्तावित किया गया है. एक अधिकारी कहते हैं, 'ये अभी प्रस्ताव हैं, अभी ये लागू नहीं हुए हैं. इनसे टैक्सपेयर्स के ज्यादा लेनदेन की निगरानी एसएफटी के तहत हो सकेगी.'

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टैक्स अधिकारियों को इससे ज्यादा जानकारी मिल पाएगी. यह जिम्मा टैक्सपेयर्स को स्वैच्छिक तरीके से इसकी जानकारी देनी होती है. यह लोगों के फॉर्म 26AS में दिखेगी.

जुलाई में हुआ था बदलाव

असल में सरकार ने जुलाई में ही संशोधित फॉर्म 26AS जारी किया था जिनमें एसएफटी से हासिल हाई वैल्यू के लेनदेन को इस आकलन वर्ष से शामिल कर लिया गया. इसमें 10 लाख रुपये से ऊपर के नकद जमा, किसी भी व्यक्ति व्यक्ति द्वारा 1 लाख से ज्यादा नकद भुगतान, एक या उससे ज्यादा के क्रेडिट कार्ड पर 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च को शामिल किया गया है. इसी तरह, एक वित्तीय वर्ष में बॉन्ड, शेयर, डिबेंचर, म्यूचुअल फंड, शेयरों के बायबैक आदि में 10 लाख रुपये से ज्यादा के निवेश और 30 लाख रुपये से ऊपर की अचल संपत्ति की खरीद को भी एसएफटी द्वारा दर्ज किया जाता है.

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