Business Today MindRush: '10 कंपनियों के भरोसे चल रही है शेयर बाजार की तेजी'

इंडिया टुडे ग्रुप के सालाना बिजनेस इवेन्ट माइंडरश में शामिल एक्सपर्ट ने कहा कि शेयर बाजार की मौजूदा तेजी करीब 10 दिग्गज कंपनियों के भरोसे है और ज्यादातर मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों की हालत खराब है.

बिजनेस टुडे माइंडरश में हुई शेयर बाजार के विरोधाभास पर चर्चा (फोटो: मिलिंद श‍िलते)
aajtak.in
  • मुंबई ,
  • 13 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 7:14 PM IST

  • इकोनॉमी में सुस्ती के बावजूद शेयर बाजार में बनी हुई है तेजी
  • BT माइंडरश में वक्ताओं ने इस विरोधाभास को स्वीकार किया
  • मौजूदा तेजी करीब 10 दिग्गज कंपनियों के भरोसे है- एक्सपर्ट
  • 'अर्थव्यवस्था का दर्द मिडकैप-स्मॉलकैप सेक्टर में दिख रहा है'

इकोनॉमी में सुस्ती को लेकर राजनीतिज्ञों से लेकर अर्थशास्त्रियों तक में चिंता है. लोगों की नौकरियां जा रही हैं और खपत कम होने से कंपनियां हलकान हैं. लेकिन इस माहौल के बीच शेयर बाजार लगातार उंचाई पर बना हुआ है. आखिर क्या है इस विरोधाभास की वजह? मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे ग्रुप के सालाना बिजनेस इवेन्ट 'बिजनेस टुडे माइंडरश' के एक महत्वपूर्ण सत्र में शामिल वक्ताओं ने कहा कि शेयर बाजार की मौजूदा तेजी करीब 10 दिग्गज कंपनियों के भरोसे है और ज्यादातर मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों की हालत खराब है.

गौरतलब है कि शेयर बाजार में करीब 3000 कंपनियों में सक्रिय तरीके से खरीद-फरोख्त होती है. लेकिन जानकारों का कहना है कि सेंसेक्स और निफ्टी की करीब 10 कंपनियों में ही उछाल का दौर है और इसी के भरोसे शेयर बाजार में तेजी बनी हुई है. शेयर बाजार के जानकार दिग्गजों ने कहा कि अर्थव्यवस्था का दर्द मिडकैप और स्मॉलकैप सेक्टर में दिख रहा है.

क्यों आ रही बाजार में तेजी

एडेलवाइज एसेट मैनेजमेंट की सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा, ' ज्यादातर निवेशकों से यदि आप यह सवाल पूछें तो 95 फीसदी यह कहेंगे कि बुल मार्केट नहीं है, कंफ्यूजन, फ्रस्टेशन है. यह सच्चाई है. निफ्टी देखें तो सिर्फ 10 कंपनियों में ही बढ़त हो रही है. इकोनॉमी के बारे में धारणा अब पहले से ज्यादा खराब हुई है.'

आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज के एमडी और सीईओ विजय चंडोक ने कहा, 'अभी जो भी हम देख रहे है, शायद उस तरह से नहीं होना चाहिए था. अभी बाजार में जो दिख रहा है उसके लिए दो बड़े प्रेरक हैं. पहला ग्लोबल लिक्विडिटी जिसमें बढ़त हो रही है. दूसरा यह कि सरकार ने काफी कदम उठाए हैं और निवेशकों को यह उम्मीद है कि जमीनी स्तर पर मैक्रो इकोनॉमी में सुधार होगा. माइक्रो लेवल पर कुछ अच्छे संकेत दिख रहे हैं. उपभोग के लिए कई तिमाहियों को देखना होगा. पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर बैंक के क्रेडिट में हाल में अच्छी बढ़त हुई है. इन सकारात्मक उम्मीदों की वजह से बाजार मजबूत हुआ है.' 

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एमडी नीलेश शाह ने कहा, 'अभी यह हाल है कि जो सेफ है वह महंगा है और जो सस्ता है वह सेफ नहीं है. हम यह कह सकते हैं कि कुछ कंपनियों के वैल्यूशन में बबल है. '

मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के आशीष सोमैया ने कहा, 'सभी स्लोडाउन एक तरह के जनरलाइजेशन होते है. बताइए भला बीमा कंपनियों पर स्लोडाउन का असर किस तरह से हो सकता है? व्हाइटगुड्स में उपभोग की उतनी समस्या नहीं आनी चाहिए. मार्केट फॉरवर्ड लुकिंग होता है. जोखिम यह है कि अगर बदलाव बाजार की उम्मीदों के मुताबिक नहीं हुआ तो फिर गिरावट आ सकती है.'  

उन्होंने कहा कि इस साल 10 महीने में घरेलू और विदेशी निवेशक दोनों का निवेश बढ़ा है. घरेलू निवेशकों का पेस जरूर कम हुआ है. स्लोडाउन परसेप्शन काफी हद तक ऑटो सेक्टर से आया है. व्हाइट गुड्स में कई सेक्टर अच्छा कर रहे हैं. ऑटो सेक्टर में कई तरह की समस्याएं हैं.

विदेशी निवेशक क्यों कर रहे निवेश

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक का भारत में पिछले एक साल में निवेश क्यों बढ़ा है, इस सवाल पर राधि‍का गुप्ता ने कहा कि बहुत समय के बाद स्टेबल पॉलिटिकल माहौल है, तेल की कीमतों में स्थिरता है. ऐसे में भारत सहित सभी उभरते बाजारों में निवेशकों की रुचि बढ़ी है. घरेलू म्यूचुअल फंड का फ्लो भी लगातार 8,000 करोड़ बना हुआ है.

नीलेश शाह ने कहा, 'एमएससीआई इंडेक्स को ज्यादातर विदेशी फंड मैनेजर फॉलो करते हैं, जिसमें हमारे वेटेज घटता गया, यह 7 से 6.5 हो गया. लेकिन पिछले 8 -9 महीने में अमेरिका में यह चर्चा हुई कि अमेरिकी आखिर चीन में क्यों निवेश कर रहे हैं. एमएससीआई ने चीन से कहा कि यदि वे जरूरी सुधार नहीं करते तो उनका वेटेज 32 से 50 नहीं किया जाएगा.  इसके बाद अमेरिकी निवेशकों ने भारत की तरफ रुख किया है. विदेशी निवेशकों को इंडिया की ग्रोथ स्टोरी में भरोसा है.  बाजार को यह उम्मीद है कि सरकार ,रेगुलेटर सुधार के उपाय करेेंगे.' 

क्या अगले एक साल में मिडकैप और स्मॉलकैप में होगा सुधार?

राधि‍का गुप्ता ने कहा कि उपभोग के बहुत से चैलेंज कर्ज से जुड़े हैं. इनमें सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और इसका फायदा आगे चलेकर मिडकैप और स्मॉलकैप को मिलेगा.

नीलेश शाह ने कहा कि सितंबर 2019 के तिमाही के रिजल्ट देखें तो ज्यादातर स्मॉल और मिडकैप का कैश फ्लो उनके मुनाफे से बेहतर रहा है. इसकी वजह से वे ज्यादा प्रोडक्टिव और इफेक्ट‍िव हुए हैं. मेरे अब तक के अनुभव में इतना बड़ा क्रेडिट संकट नहीं आया था. बिना पैसे के ग्रोथ नहीं हो सकती. जब क्रेडिट वापस आएगा और रेट सही होगा तो इसका सबसे ज्यादा लाभ मिडकैप और स्मॉलकैप को होगा.

उन्होंने कहा कि आरबीआई डेटा में कहा गया है कि कॉमर्श‍ियल सेकटर को फंड फ्लो अप्रैल से मिड सितंबर 2019 तक 91000 करोड़ रुपये ही रहा है. इसमें पिछले साल के मुकाबले 88 फीसदी की गिरावट आई है. जब तक क्रेडिट फ्लो नहीं होगा, तो ग्रोथ नहीं होगा.

क्या इस साल 50 हजार जाएगा सेंसेक्स?

क्या सेंसेक्स इस साल 50 हजार तक जा सकता है, इस सवाल पर ज्यादातर एक्सपर्ट्स का जवाब नहीं में था. इसके अलावा निवेश गोल्ड में करना चाहिए या शेयर में इसके जवाब में ज्यादातर एक्सपर्ट ने शेयर में निवेश करने की सलाह दी.

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