कोरोना पीड़ितों की मदद में उतरा बजाज ग्रुप, 100 करोड़ रुपये देने का ऐलान

सहायता राशि का उपयोग सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में किया जाएगा जिससे कि आईसीयू, मेडिकल उपकरण, वेंटिलेटर्स और पर्सनल प्रोटेक्शन इक्वीपमेंट आदि की खरीदारी हो सके. इसका उपयोग आइसोलेशन यूनिट बनाने में भी किया जाएगा. पुणे, पिंपरी-चिंचवाड़ और पुणे के ग्रामीण इलाकों में बड़ा अभियान चलाया जाएगा.

मुंबई के ठाणे में लोगों की मदद में उतरे लोग (PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 26 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 8:24 PM IST

  • स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने पर ज्यादा राशि का खर्च
  • हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन में दी जाएगी राशि

कोरोना वायरस से जूझते लोगों की मदद में देश की नामी बिजनेस संस्था बजाज ग्रुप आगे आई है. इस संस्था ने लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 100 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है. ग्रुप ने अपने एक बयान में कहा है कि कोरोना वायरस के खतरों के बीच लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मयस्सर हो सकें, इसके लिए संस्थान की ओर से यह कोशिश की जा रही है.

बजाज ग्रुप ने अपने बयान में कहा, कोविड-19 के खिलाफ देश की लड़ाई में हम 100 करोड़ रुपये देते हैं. सरकार और अपने 200 एनजीओ पार्टनर के नेटवर्क के साथ काम करते हुए हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जरूरी संसाधन जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे.

इस कोशिश में पुणे में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने में मदद की जाएगी ताकि कोविड-19 पर काबू पाया जा सके. इस सहायता राशि का उपयोग सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में किया जाएगा जिससे कि आईसीयू, मेडिकल उपकरण, वेंटिलेटर्स और पर्सनल प्रोटेक्शन इक्वीपमेंट आदि की खरीदारी हो सके.

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सहायता राशि का उपयोग आइसोलेशन यूनिट बनाने में भी किया जाएगा. पुणे, पिंपरी-चिंचवाड़ और पुणे के ग्रामीण इलाकों में बड़ा अभियान चलाया जाएगा. कंपनी के इस ऐलान के बारे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने एक ट्वीट में जानकारी दी. उन्होंने अपने ट्वीट में बजाज ग्रुप के इस बयान को अटैच किया है.

कंपनी की कोशिश दिहाड़ी मजदूरों, बेघर और सड़कों पर जिंदगी काटने वाले बच्चों को राहत देने की है. कंपनी ने कहा है कि खाद्य आपूर्ति, आवास, स्वच्छता और हेल्थकेयर पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. कोरोना वायरस की महामारी फैलने के बाद ऐसा देखा जा रहा है कि लोग अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं. इसे देखते हुए सहायता राशि का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा.

कंपनी की कोशिश है कि परिवारों को कर्ज के तौर पर पैसा देकर रोजगार शुरू कराया जाए. बाद में जब लोन चुकाए जाएंगे तो उस पैसे से अन्य परिवारों को मदद दी जाएगी. इससे कई परिवारों को रोजगार मिलने की संभावना बढ़ जाएगी. कंपनी इसके साथ ही कोविड-19 को लेकर जागरूकता अभियान चलाने पर भी फोकस कर रही है ताकि लोगों को इस महामारी से बचाया जा सके.

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