सितंबर में 12 लाख नई नौकरियां मिलीं, ESIC के पेरोल आंकड़ों के आधार पर दावा

सितंबर महीने में करीब 12 लाख नई नौकरियों का सृजन हुआ है. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के पेरोल आंकड़ों से यह बात सामने आई है. अगस्त महीने में 13 लाख नई नौकरियों का सृजन हुआ था.

सितंबर में लाखों लोगों को मिलीं नौकरियां
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 26 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:40 PM IST

  • सितंबर महीने में 12 लाख नई नौकरियों का सृजन हुआ है
  • ESIC के पेरोल आंकड़ों के आधार पर सरकार का यह दावा है
  • अगस्त महीने में 13 लाख नई नौकरियों का सृजन हुआ था

इस साल सितंबर महीने में करीब 12 लाख नई नौकरियों का सृजन हुआ है. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के पेरोल आंकड़ों से यह बात सामने आई है. हालांकि, अगस्त महीने में 13 लाख नई नौकरियों का सृजन हुआ था.

दो साल में 3 करोड़ से ज्यादा नौकरियां!

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2018-19 में कुल मिलाकर 1.49 करोड़ नए सब्सक्राइबर ESIC से जुड़े हैं. रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2017 से सितंबर 2019 के दौरान ESIC से 3.10 करोड़ नए सब्सक्राइबर जुड़े हैं.

गौरतलब है कि ESIC की विभि‍न्न योजनाओं, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का प्रबंधन देखने वाली ईपीएफओ और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के नए सब्सक्राइबर पर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) रोजगार पर रिपोर्ट जारी करता है. एनएसओ द्वारा अप्रैल, 2018 से ही तीनों संस्थाओं का पेरोल डेटा जारी किया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, ESIC में सितंबर 2017 से मार्च 2018 के दौरान 83.35 लाख नए नामांकन हुए हैं.

EPFO के मुताबिक मिलीं इतनी नौकरियां

NSO रिपोर्ट के अनुसार, इस साल सितंबर महीने में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से 9.98 लाख नए सब्सक्राइबर जुड़े हैं, जबकि अगस्त महीने में 9.41 लाख लोग जुड़े थे. साल 2018-19 के दौरान ईपीएफओ की योजनाओं से कुल 61.12 लाख नए लोग जुड़े हैं. इसी तरह सितंबर 2017 से मार्च 2018 के दौरान 15.52 लाख नए लोग जुड़े हैं.

NSO के अनुसार, सितंबर 2017 से सितंबर 2019 के दो साल के दौरान कुल 2.85 करोड़ नए लोग ईपीएफओ की योजनाओं से जुड़े हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि नामांकन की संख्या कई स्रोतों से हासिल की जाती है, इसलिए इसमें ओवरलैपिंग की गुंजाइश रहती है. एनएसओ ने कहा कि यह रिपोर्ट औपचारिक क्षेत्र में रोजगार के स्तर का अलग पहलू पेश करती है और इसे समग्र तरीके से रोजगार का मापन नहीं हो सकता.

मोदी सरकार रोजगार के मोर्चे पर लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है. इसके पहले एनएसओ की एक कथित लीक रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि बेरोजगारी की दर 2017-18 में 45 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई. लेकिन सरकार ESIC, EPFO और PFRDA के नए नामांकन का हवाला देकर यह साबित करने की कोशिश करती रही है कि रोजगार में पर्याप्त बढ़त हो रही है.

(https://www.businesstoday.in/ से साभार)

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