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इस सरकारी योजना से बढ़ी फसल की उपज, छत्तीसगढ़ में टूटा कमाई का रिकॉर्ड!

कोदो की खेती अनाज फसल के तौर पर की जाती है. कम बारिश वाले क्षेत्रों में इसे उगाया जाता है. छत्तीसगढ़ सरकार की मानें तो कोदो के बीज की बिक्री से किसानों की आय में चार गुना इजाफा हुआ है.

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milets crop( Pic credit: Pexels)
milets crop( Pic credit: Pexels)

किसानों की आय बढ़ाने के लिए के मिलेट्स की खेती को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है. कई राज्यों में इसका असर भी दिख रहा है. छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि कोदो के बीज की बिक्री करने के पर किसानों को 1.28 करोड़ रुपये की आय हासिल हुई है.

किसानों की आय में चार गुना इजाफा

छत्तीसगढ़ सरकार की मानें तो कोदो के बीज की बिक्री से किसानों की आय में चार गुना इजाफा हुआ है. बता दें कि राज्य में कोदो-कुटकी की समर्थन मूल्य पर 3000 प्रति क्विंटल की दर से तथा रागी की खरीदी 3377 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जा रही है.

कोदो की फसल के बारे में कितना जानते हैं आप?

कोदो की खेती अनाज फसल के तौर पर की जाती है. कम बारिश वाले क्षेत्रों में इसे उगाया जाता है. भारत और नेपाल के कई हिस्सों में कोदो का उत्पादन किया जाता है. इसकी फसल को शुगर फ्री चावल के तौर पर पहचानते है.

कोदो की खेती में कम मेहनत लगती है. इसकी बुवाई बारिश के मौसम के बाद की जाती है. कोदो का पौधा देखने में बड़ी घास या धान जैसा होता है. इससे निकलने वाली फसल को साफ करने पर एक प्रकार के चावल प्राप्त किया जाता है. 

9 हजार रुपये की सहायता भी दी जा रही है

छत्तीसगढ़ राज्य को राष्ट्रीय स्तर का पोषक अनाज अवार्ड 2022 सम्मान भी मिल चुका है. राज्य को ये अवॉर्ड मिलेट्स की खेती की उपज बढ़ने पर मिली है. इसे राजीव गांधी किसान न्याय योजना में शामिल किया गया है. मिलेट्स की खेती करने वाले किसानों को सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि के तौर पर 9 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है.

 

 

 

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